MBBS : खुशखबरी, 4 साल के बाद बढ़ेगा एमबीबीएस छात्रों का स्टाइपेंड, केंद्र सरकार कर रही तैयारी
MBBS Stipend: 4 साल के बाद केंद्र सरकार एमबीबीएस छात्रों का स्टाइपेंड बढ़ा सकती है। इस पर विचार किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय से मिले आरटीआई के जवाब में यह बात सामने आई है।

देश के एमबीबीएस छात्रों को जल्द ही बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। 4 साल के बाद केंद्र सरकार एमबीबीएस छात्रों का स्टाइपेंड बढ़ा सकती है। इस पर विचार किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय से मिले आरटीआई के जवाब में यह बात सामने आई है। पहले दो दो साल बाद स्टाइपेंड में बदलाव होता था। छह सालों तक लगातार ऐसा हुआ। लेकिन बीते चार सालों से इसमें बदलाव नहीं हुआ है। अगर इस कदम को मंजूरी मिलती है, तो केंद्र सरकार के मेडिकल कॉलेजों और एम्स संस्थानों के हजोरों इंटर्न एमबीबीएस डॉक्टरों को फायदा होगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय के रिकॉर्ड बताते हैं कि स्टाइपेंड को 23,500 रुपये प्रति माह (1 जनवरी, 2018 से लागू) से बढ़ाकर 1 जनवरी, 2020 से 26,300 रुपये और 1 जनवरी, 2022 से 30,070 रुपये किया गया था। उसके बाद से इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक 1 जनवरी, 2022 के बाद MBBS इंटर्नशिप स्टाइपेंड में बदलाव न होने के बारे में जानकारी मांगने वाली आरटीआई के जवाब में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 15 जून को कहा कि यह मामला नीतिगत फैसले से जुड़ा है और अभी मंत्रालय में इस पर विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव की समीक्षा, जांच और प्रशासनिक पड़ताल सक्षम अधिकारियों द्वारा की जा रही है।
कितना बढ़ेगा, कब बढ़ेगा, कोई टाइम नहीं बताया
हालांकि मंत्रालय ने फाइल नोटिंग, समिति की टिप्पणियों और विभागों के बीच हुई बातचीत का खुलासा करने से इनकार कर दिया। इसके लिए उन्होंने आरटीआई एक्ट की धारा 8(1)(i) का हवाला दिया जो फैसला लेने की चल रही प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने से छूट देती है। मंत्रालय ने इस मुद्दे पर किसी भी बढ़ोतरी की संभावित राशि या फैसले के लिए कोई समयसीमा भी नहीं बताई है।
स्टाइपेंड में पिछले बदलाव -
1 जनवरी, 2018 -23,500 प्रति माह
1 जनवरी, 2020: बढ़ाकर 26,300 रुपये किया गया
1 जनवरी, 2022: बढ़ाकर 30,070 रुपये किया गया
1 जनवरी, 2022 के बाद से स्टाइपेंड में कोई संशोधन नहीं किया गया है।
एनएमसी ने जताई स्टाइपेंड ने देने की जिंता
नेशनल मेडिकल कमीशन ने बार-बार मेडिकल कॉलेजों में स्टाइपेंड का भुगतान न होने और असमान भुगतान को लेकर चिंता जताई है और संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करें।
सिर्फ 7 मेडिकल कॉलेज इंटर्न और डॉक्टरों को नहीं दे रहे पैसे, NMC ने सुप्रीम कोर्ट ने दी जानकारी
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने उच्चतम न्यायालय को इसी माह की शुरुआत में बताया था कि देश के 756 मेडिकल कॉलेजों में से सात कॉलेज इंटर्न, जूनियर रेजिडेंट और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को उनका स्टाइपेंड नहीं दे रहे हैं। आयोग ने इन संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। एनएमसी की ओर से पेश अधिवक्ता ने न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ को बताया कि 756 स्नातक मेडिकल कॉलेजों में से 573 कॉलेजों में स्टाइपेंड के भुगतान को लेकर कोई विवाद नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि 176 मेडिकल कॉलेज हाल ही में स्थापित किए गए हैं। पीठ ने इस मामले को लेकर कहा, ''एनएमसी की ओर से बताया गया कि सात मेडिकल कॉलेज मानदेय नहीं दे रहे हैं। आयोग ने इन संस्थानों पर जुर्माना लगाने के उद्देश्य से कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं और उनके जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। पीठ ने यह भी दर्ज किया कि एक मेडिकल कॉलेज बंद है और वहां कोई इंटर्न नहीं है। इसके अलावा, 562 मेडिकल कॉलेजों में पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सेज संचालित हो रहे हैं और वे मानदेय दे रहे हैं। केवल दो मेडिकल कॉलेजों में कोई इंटर्न नहीं है, इसलिए वहां मानदेय भुगतान का सवाल ही नहीं उठता।


