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NEET UG : देश में MBBS की कहां कितनी सरकारी और प्राइवेट सीटें, 72 खाली, सरकार ने दिया राज्यवार ब्योरा

NEET UG : देश में MBBS की कहां कितनी सरकारी और प्राइवेट सीटें, 72 खाली, सरकार ने दिया राज्यवार ब्योरा

संक्षेप:

MBBS Seats in India : केंद्र सरकार ने कहा है कि एमबीबीएस की कुल 1,28,875 सीटें और मेडिकल पीजी की 80291 सीटें हैं। । चार राउंड ऑल इंडिया इंडिया काउंसलिंग के बाद कुल 72 एमबीबीएस सीटें खाली रह गई हैं।

Dec 09, 2025 12:00 pm ISTPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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NEET UG MBBS Seats in India : केंद्र सरकार ने कहा है कि देश में शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में एमबीबीएस की कुल 1,28,875 सीटें और मेडिकल पीजी की 80291 सीटें हैं। सरकारी एमबीबीएस सीटों की संख्या 65193 और प्राइवेट 63682 हैं। चार राउंड ऑल इंडिया इंडिया काउंसलिंग के बाद कुल 72 एमबीबीएस सीटें खाली रह गई हैं। रिक्त 72 सीटों में 26 सरकारी और 46 डीम्ड यूनिवर्सिटी सीटें शामिल हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में यह जानकारी दी। 80291 मेडिकल पीजी सीटों में 17,707 डीएनबी, डीआरएनबी, एफएनबी और पोस्ट एमबीबीएस डिप्लोमा सीटें भी शामिल हैं।

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सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में राज्यवार एमबीबीएस सीटें (State wise MBBS seats in government and private colleges in India )

क्रम राज्य सरकारी सीटें प्राइवेट सीटें

1 आंध्र प्रदेश 3415 3800

2 अंडमान और निकोबार 114 0

3 अरुणाचल प्रदेश 100 0

4 असम 1975 0

5 बिहार 1645 1900

6 चंडीगढ़ 150 0

7 छत्तीसगढ़ 1555 900

8 दादरा नगर हवेली 177 0

9 दिल्ली 1296 100

10 गोवा 200 0

11 गुजरात 4325 3200

12 हरियाणा 1060 1650

13 हिमाचल प्रदेश 820 150

14 जम्मू कश्मीर 1525 200

15 झारखंड 855 400

16 कर्नाटक 4249 9695

17 केरल 1855 3549

18 मध्य प्रदेश 3025 2700

19 महाराष्ट्र 6075 6749

20 मणिपुर 375 150

21 मेघालय 100 100

22 मिज़ोरम 100 0

23 नागालैंड 100 0

24 ओडिशा 1925 1100

25 पुडुचेरी 423 1450

26 पंजाब 999 900

27 राजस्थान 4630 2700

28 सिक्किम 0 150

29 तमिलनाडु 5250 7800

30 तेलंगाना 4390 5150

31 त्रिपुरा 150 250

32 उत्तर प्रदेश 5925 7500

33 उत्तराखंड 750 700

34 पश्चिम बंगाल 4149 2250

35 कुल 65193 63682

क्या सवाल पूछे गए थे

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने उपरोक्त जानकारी भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे के प्रश्न के जवाब में दी। राजाराम वाकचौरे ने पूछा था कि आज की तिथि तक देश में सरकारी और गैर-सरकारी मेडिकल कॉलेजों/संस्थानों में विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययन हेतु उपलब्ध सीटों की संख्या कितनी है।

- (ख) आज की तिथि तक इन कॉलेजों/संस्थानों में विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए प्राप्त आवेदनों की संख्या कॉलेज/संस्थान-वार कितनी है।

- (ग) क्या सभी आवेदकों को इन कॉलेजों/संस्थानों में प्रवेश मिल गया है और यदि हां, तो इसका ब्योरा क्या है;

- क्या सरकारी और गैर-सरकारी मेडिकल कॉलेजों/संस्थानों में विभिन्न पाठ्यक्रमों में सीटें रिक्त हैं;

- यदि हां, तो कॉलेज/संस्थान-वार और पाठ्यक्रम-वार तत्संबंधी ब्यौरा क्या है;

- क्या सरकार ने इन कॉलेजों और संस्थानों में रिक्त सीटों को भरने के लिए कोई कदम उठाए हैं/उठाने की योजना है; और

- यदि हां, तो तत्संबंधी ब्योरा क्या है?

क्या आने वाले वर्षों में 11वीं में हो जाएगी नीट, जेईई मेन व सीयूईटी

कोचिंग संस्थानों पर निर्भरता कम करने और डमी स्कूलों की समस्या से निजात पाने के लिए केंद्र सरकार आगामी वर्षों में जेईई मेन, नीट और सीयूईटी प्रवेश परीक्षाओं के तौर तरीकों में बड़े बदलाव कर सकती है। केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय की ओर से बनाई गई समिति कई सुझावों पर मंथन कर रही है जिसमें 11वीं कक्षा में ही जेईई मेन, नीट और सीयूईटी यूजी जैसी प्रवेश परीक्षाएं कराना, कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई 2-3 घंटे तक सीमित करना और बोर्ड परीक्षा के अंकों को प्रवेश परीक्षा के नतीजों के साथ जोड़ने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। गौरतलब है कि जून माह में शिक्षा मंत्रालय ने कोचिंग सेंटरों पर बढ़ती निर्भरता और डमी स्कूलों की समस्या के मद्देनजर 11 सदस्यों की एक समिति गठित की थी। 15 नवंबर को हुई समिति की बैठक में इन्हीं सुझावों पर चर्चा की गई। समिति ने उन कारणों पर मंथन किया जो स्टूडेंट्स को स्कूल के बाद बहुत ज्यादा कोचिंग लेने पर मजबूर करते हैं।

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समिति जिन प्रस्तावों पर गहन विचार विमर्श कर रही है, उनमें सबसे बड़ा सुझाव यह है कि क्या कक्षा 11वीं में ही इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन, मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट और यूनिवर्सिटी प्रवेश परीक्षा सीयूईटी हो सकती है या नहीं। कमेटी सुझावों को फाइनल करने से पहले देश के सभी शिक्षा बोर्ड में सिलेबस की एकरूपता पर भी अध्ययन करेगी। समिति के कई सदस्यों का तर्क है कि प्रवेश परीक्षाओं का समय पहले रखने से विद्यार्थियों पर एकेडमिक दबाव कम हो सकता है। साथ ही कक्षा 12वीं में बनने वाली तनाव और अत्यधिक दबाव की स्थिति भी कम होगी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पैनल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एईपी 2020) के हिसाब से साल में दो बार अप्रैल और नवंबर में एंट्रेंस एग्जाम कराने पर भी चर्चा की। कमिटी यह भी देख रही है कि क्या एंट्रेंस एग्जाम के लिए एक ऐसा हाइब्रिड असेसमेंट मॉडल लाया जा सकता है जिसमें बोर्ड परीक्षा के मार्क्स और एप्टीट्यूड बेस्ड टेस्ट दोनों को वेटेज दिया जाए। यानी इंजीनियरिंग मेडिकल दाखिलों में प्रवेश परीक्षा प्राप्तांकों के साथ-साथ बोर्ड परीक्षा का प्रदर्शन भी देखा जाए। अधिकारियों ने कहा कि इससे क्लासरूम लर्निंग मजबूत हो सकती है। इंटरनल असेसमेंट बेहतर हो सकते हैं और कोचिंग पर बहुत ज्यादा निर्भरता कम हो सकती है।

Pankaj Vijay

लेखक के बारे में

Pankaj Vijay
पंकज विजय लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर हैं। यहां वह करियर, एजुकेशन, जॉब्स से जुड़ी खबरें देखते हैं। पंकज को पत्रकारिता में डेढ़ दशक से ज्यादा का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने एनडीटीवी डिजिटल, आजतक डिजिटल, अमर उजाला समाचार पत्र में काम किया। करियर-एजुकेशन-जॉब्स के अलावा वह विभिन्न संस्थानों में देश-विदेश, राजनीति, रिसर्च व धर्म से जुड़ी बीट पर भी काम कर चुके हैं। भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा व डीयू से इतिहास में बीए ऑनर्स किया है। और पढ़ें
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