
MBBS : एमबीबीएस दाखिले में मानसिक दिव्यांगों को भी दिया जा सकता है आरक्षण, गाइडलाइंस जारी
संक्षेप: मेडिकल एजुकेशन में दिव्यांगजनों को आरक्षण सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एनएमसी ने हाल में एक अंतरिम गाइडलाइन जारी की है। गाइडलाइन में कहा गया कि मानसिक रूप से दिव्यांगों को भी आरक्षण प्रदान किया जाएगा।
मेडिकल एजुकेशन में दिव्यांगजनों को आरक्षण सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने हाल में एक अंतरिम गाइडलाइन जारी की है। गाइडलाइन में कहा गया कि मानसिक रूप से दिव्यांगों को भी आरक्षण प्रदान किया जाएगा, लेकिन अभी इसके आकलन के लिए पर्याप्त मानक उपलब्ध नहीं हैं। चिकित्सा आयोग के विशेषज्ञ दुनिया भर के मानकों का अध्ययन करने के बाद इसे लागू करेंगे। दरअसल, दिव्यांगों को पांच श्रेणी में आरक्षण देने की बात कही गई है। मौजूदा नियमों के तहत कुल 5 फीसदी आरक्षण दिव्यांगों को दिया जा सकता है, जिसमें सभी श्रेणियों जैसे अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), ईडब्ल्यूएस आदि श्रेणियों के उम्मीदवार शामिल हैं।

इसके लिए पांच श्रेणियों में दिव्यांगता को विभाजित किया गया है।
आकलन की जरूरत : वहीं मानसिक व्यवहार से जुड़ी दिव्यांगता पर कहा गया कि इस श्रेणी में भी आरक्षण जरूरी है और वह प्रदान किया जाएगा, लेकिन मौजूदा समय में इसके आकलन के मानकों की कमी है। इसलिए विशेषज्ञ इसके लिए मानकों का निर्धारण करेंगे तथा उसके बाद उसे लागू करेंगे। हालांकि, एनएमसी सैद्धांतिक तौर पर मानसिक व्यवहार से ग्रस्त दिव्यांगों को मेडिकल में प्रवेश देने पर सहमति है। पांचवीं श्रेणी में एक से अधिक दिव्यांगताओं की श्रेणी रखी गई है। इसमें आरक्षण का लाभ देने की बात कही गई है।
40 से ज्यादा और 80% से कम हो दिव्यांगता
अंतरिम गाइडलाइन के जरिये मौजूदा सत्र 2025-26 से दिव्यांगों को एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश दिया जाना है। इसके अनुसार, शारीरिक, बौद्धिक तथा अन्य श्रेणियों (तंत्रिका और रक्त विकारों से होने वाली दिव्यांगता शामिल) में उन दिव्यांगों को मेडिकल एडमिशन में आरक्षण का लाभ देने की बात कही गई गई है, जिनकी दिव्यांगता 40 फीसदी से ज्यादा है लेकिन 80 फीसदी से कम है। हालांकि, इस रेंज के भीतर भी कुछ शर्तें रखी गई हैं जो चिकित्सा की पढ़ाई के लिए जरूरी हैं। जैसे अंगुलियों की गतिविधियां, दिखाई देना आदि।





