विदेश से MBBS करने वालों को राहत देने की तैयारी, आसान होगी FMGE परीक्षा, ग्रेस मार्क्स पर रुख साफ
विदेशों से एमबीबीएस करने वाले भारतीय छात्रों को FMGE परीक्षा में कुछ राहत मिलने के आसार हैं। सरकार की तरफ से परीक्षा को साल में दो की बजाय तीन बार करने और प्रश्नों की श्रेणियां तय करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

विदेशों से मेडिकल डिग्री लेकर आने वाले भारतीय छात्रों को विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा (एफएमजीई) परीक्षा में कुछ राहत मिलने के आसार हैं। सरकार की तरफ से परीक्षा को साल में दो की बजाय तीन बार करने और प्रश्नों की श्रेणियां तय करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। लेकिन सरकारी सूत्रों ने साफ कर दिया है कि जून में आयोजित हुई परीक्षा के लिए कोई अतिरिक्त अंक छात्रों को नहीं दिए जाएंगे। आपको बता दें कि विदेशों से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों को भारत लौटकर एफएमजीई (FMGE) पास करनी होती है, जिसके बाद ही उन्हें देश में डॉक्टरी करने की अनुमति मिलती है। इस टेस्ट को पास करना काफी कठिन होता है। बेहद चुनौतिपूर्ण मानी जाने वाली इस परीक्षा का रिजल्ट करीब 15 से 25 फीसदी ही रहता है। हालांकि इस बार नतीजे और भी कम आए हैं। जून सत्र की एफएमजीई देने वाले छात्रों का कहना है कि इस बार जून में हुई परीक्षा बेहद कठिन थी। इस मुद्दे को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं तथा जून परीक्षा में ग्रेस अंकों की मांग कर रही हैं।
इन पर अमल की तैयारी
सूत्रों ने कहा कि समिति की जिन सिफारिशों पर अमल की तैयारी है, उनमें परीक्षा को साल में तीन बार करना, परीक्षा के सवालों को तीन श्रेणियों में विभाजित करना शामिल है जिसमें 30 फीसदी निम्न, 50 फीसदी मध्यम और 20 फीसदी उच्च कठिनता वाले प्रश्न शामिल किए जाएंगे। इसके अलावा परीक्षा शुल्क की समीक्षा, परीक्षा केंद्रों को पारदर्शी बनाना तथा छात्रों की अन्य चिंताओं का समाधान शामिल है।
पहली बार परीक्षा पास करने का प्रतिशत घटा
जून की परीक्षा में पहली बार परीक्षा पास करने वालों का प्रतिशत घटा है। दिसंबर 2025 में पहली बार परीक्षा पास करने वालों का प्रतिशत 47.53 था वहीं जून में यह 35.74 फीसदी रह गया। जून की परीक्षा में ऐसे उम्मीदवार ज्यादा पास हुए हैं जो पांच बार या उससे अधिक परीक्षा दे रहे थे। इस परीक्षा में औसतन 35-40 हजार चिकित्सा स्नातक हर बार बैठते हैं, जिनमें करीब 10 हजार पहली बार परीक्षा देने वाले होते हैं।
FMGE, जून 2026 का रिजल्ट केवल 12.38 फीसदी रहा। यह बीते तीन चार वर्षों के मुकाबले करीब 50 फीसदी कम रहा।
FMGE परीक्षा साल में दो बार (जून और दिसंबर सत्र में) आयोजित की जाती है। जून 2020 से लेकर जून 2026 तक के अलग-अलग सत्रों का पास प्रतिशत इस प्रकार रहा है:
वर्ष 2020:
जून 2020: 11.62%
दिसंबर 2020: 21.75%
वर्ष 2021:
जून 2021: 23.71%
दिसंबर 2021: 23.61%
वर्ष 2022:
जून 2022: 10.61%
दिसंबर 2022: 30.83%
वर्ष 2023:
जून 2023: 10.22% (यह इन वर्षों में सबसे कम पास प्रतिशत रहा है)
दिसंबर 2023: 31.25% (यह इन वर्षों में सबसे अधिक पास प्रतिशत रहा है)
वर्ष 2024:
जून 2024: 20.71%
दिसंबर 2024: 29.02%
वर्ष 2025:
जून 2025: 18.61%
दिसंबर 2025: 23.90%
वर्ष 2026:
जून 2026: 12.38%
पिछले 13 सत्रों का औसत पास प्रतिशत 21.47% रहा है। FMGE परीक्षा पास करने के लिए 300 में से कम से कम 150 अंक (50%) लाना अनिवार्य होता है।


