MBBS Fees : NEET छात्रों को तगड़ा झटका, प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की फीस 17.13 लाख पहुंची
MBBS Fees : शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए वार्षिक एमबीबीएस फीस 7.50 लाख रुपये से 17.13 लाख रुपये के बीच तय की गई है। प्राइवेट एमबीबीएस की फीस में एक बार फिर इजाफा होने से नीट अभ्यर्थियों के अभिभावक नाराज हैं।

MBBS Fees : नीट यूजी 2026 में थोड़े कम अंक होने के चलते प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट तलाश रहे छात्रों के लिए बुरी खबर है। महाराष्ट्र के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई की फीस एक बार फिर बढ़ गई है। शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए वार्षिक एमबीबीएस फीस 7.50 लाख रुपये से 17.13 लाख रुपये के बीच तय की गई है। प्राइवेट एमबीबीएस की फीस में एक बार फिर इजाफा होने से नीट अभ्यर्थियों के अभिभावक नाराज हैं। इससे उनके परिवार के एजुकेशन बजट और एजुकेशन लोन की योजना पर बड़ा असर डाला है।
अभिभावक पहले से ही एमबीबीएस की साढ़े पांच वर्ष की पढ़ाई के दौरान ट्यूशन फीस, हॉस्टल, खाना,किताबें और अन्य खर्चों का हिसाब लगा रहे हैं, उनके लिए फीस में मामूली सालाना वृद्धि भी कुल खर्च में कई लाख रुपये का इजाफा कर सकती है। महाराष्ट्र फीस रेगुलटरी अथॉरिटी की ओर से मंजूरी की गई नई फीस लिस्ट में राज्य के 19 प्राइवेट एमबीबीएस कॉलेज शामिल हैं। पालघर स्थित वेदांता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज सबसे महंगा कॉलेज है, जहां वार्षिक फीस 17.13 लाख रुपये है। इसके बाद नागपुर का एनकेपी साल्वे इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज है, जिसकी फीस 15.62 लाख रुपये है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे कम फीस पुणे के भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 7.50 लाख रुपये और सिंधुदुर्ग के SSPM मेडिकल कॉलेज में 7.64 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
किस कॉलेज की फीस कितनी बढ़ी
कई मेडिकल कॉलेजों में फीस में बड़ा इजाफा गया है। एनकेपी साल्वे मेडिकल कॉलेज की वार्षिक फीस 13.95 लाख रुपये से बढ़कर 15.62 लाख रुपये हो गई है, यानी एक वर्ष में 1.67 लाख रुपये की वृद्धि। अमरावती के डॉ. राजेंद्र गोडे मेडिकल कॉलेज की फीस 7.11 लाख रुपये से बढ़कर 8.93 लाख रुपये हो गई है, जबकि परभणी मेडिकल कॉलेज की फीस 7.54 लाख रुपये से बढ़कर 8.78 लाख रुपये हो गई है।
अभिभावकों की प्रतिनिधि सुधा शेनॉय ने कहा, "बिना किसी इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार के वेदांता द्वारा इतनी अधिक फीस लेना उचित नहीं है। वहीं SSPM मेडिकल कॉलेज कागजों पर ट्यूशन फीस कम दिखाता है, लेकिन हॉस्टल, मेस और अन्य खर्चों के नाम पर बड़ी रकम वसूलता है।"
नवी मुंबई के टेरना मेडिकल कॉलेज की फीस 7.90 लाख रुपये से बढ़कर 9.13 लाख रुपये हो गई है। वहीं नासिक के वसंतराव पवार मेडिकल कॉलेज ने अपनी फीस 11.96 लाख रुपये से बढ़ाकर 13.16 लाख रुपये कर दी है।
कई संस्थानों में फीस में कमी भी हुई
हालांकि जहां अधिकांश कॉलेजों ने फीस बढ़ाई है, वहीं कुछ संस्थानों ने फीस में कमी भी की है। मुंबई के के.जे. सोमैया मेडिकल कॉलेज की फीस पहले 12 लाख रुपये थी, जिसे घटाकर 9.70 लाख रुपये कर दिया गया है, यानी 2.30 लाख रुपये की कमी। तालेगांव के MIMER मेडिकल कॉलेज ने फीस 11.30 लाख रुपये से घटाकर 11.06 लाख रुपये कर दी है। वहीं नासिक के SMBT इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने अपनी फीस 13 लाख रुपये से घटाकर 12.27 लाख रुपये कर दी है। हालांकि फीस कम वाले मामले बेहद कम हैं।
कहां फीस जस की तस
सात मेडिकल कॉलेजों को नो अपवर्ड रिवीजन (फीस में बढ़ोतरी नहीं) श्रेणी में रखा गया है। इनमें ACPM मेडिकल कॉलेज, MIMS लातूर, पद्मश्री डॉ. विठ्ठलराव विखे पाटिल मेडिकल कॉलेज, बीकेएल वालावलकर रूरल मेडिकल कॉलेज और SSPM मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।
इस वर्ष मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए सबसे कम और सबसे अधिक वार्षिक फीस के बीच 9.63 लाख रुपये का अंतर है। FRA द्वारा स्वीकृत शुल्क में केवल ट्यूशन और डेवलपमेंट फीस शामिल है। इसके अलावा हॉस्टल, मेस, सिक्योरिटी डिपॉजिट और अन्य संस्थागत शुल्क अलग से देने होंगे।


