MBBS की फीस पहली प्राइवेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में 1.1 करोड़ रु हुई, कई छात्रों का खर्च 2.36 करोड़ पहुंचा
नागपुर स्थित एकेपी साल्वे इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के प्राइवेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में तब्दील होने के कुछ ही हफ्तों बाद MBBS की फीस में करीब 56 फीसदी की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है।

MBBS Fees : महाराष्ट्र में प्राइवेट मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करना चाह रहे छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए मायूसी भरी खबर है। नागपुर स्थित एकेपी साल्वे इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के प्राइवेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में तब्दील होने के कुछ ही हफ्तों बाद MBBS की फीस में करीब 56 फीसदी की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। जहां शैक्षणिक सत्र 2025-26 में MBBS की सालाना फीस 13.95 लाख थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर 21.75 लाख प्रति वर्ष कर दिया गया है। इतना ही नहीं फीस में हर साल 7.5 फीसदी की बढ़ोतरी का प्रावधान भी किया गया है। इस हिसाब से MBBS की पूरी 5.5 साल की पढ़ाई का कुल खर्च करीब 1.1 करोड़ तक पहुंच सकता है।
नई फीस के अनुसार राज्य कोटे की 40 फीसदी और ऑल इंडिया कोटे की 45 फीसदी सीटों के लिए ट्यूशन और डेवलपमेंट फीस 20.75 रुपये लाख सालाना होगी। इसके अलावा छात्रों को हर साल 1 लाख रुपये यूनिवर्सिटी फीस भी देनी होगी। वहीं 50 हजार रुपये का रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट लिया जाएगा।
NRI/OCI छात्रों के लिए सालाना फीस 46650 डॉलर तय की गई है जबकि इंस्टीट्यूशनल कोटे की फीस 43 लाख प्रति वर्ष होगी।
कुल 250 एमबीबीएस सीटें
कॉलेज में MBBS की कुल 250 सीटें हैं। निजी यूनिवर्सिटी के गठन की प्रक्रिया के कारण अब तक इन सीटों को केंद्रीयकृत मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया था। महाराष्ट्र सीईटी सेल के अनुसार दूसरे राउंड की प्रोविजनल सीट मैट्रिक्स जारी हो चुकी है और अंतिम सीट मैट्रिक्स में कॉलेज को शामिल किया जाएगा।
इसी नई यूनिवर्सिटी का हिस्सा बने रंजीत देशमुख डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर की फीस में भी बढ़ोतरी हुई है। यहां सालाना फीस 4.75 लाख रुपये से बढ़ाकर 5.85 लाख रुपये कर दी गई है।
महाराष्ट्र सरकार ने अगस्त के अंतिम सप्ताह में तीन शिक्षण संस्थानों को निजी विश्वविद्यालय में बदलने की मंजूरी दी थी। इनमें अहिल्यानगर का डॉ. विट्ठलराव विखे पाटिल फाउंडेशन मेडिकल कॉलेज, नागपुर के एनकेपी साल्वे इंस्टीट्यूट और रणजीत देशमुख डेंटल कॉलेज शामिल हैं।
मेडिकल एजुकेशन ऑब्जर्वर ब्रिजेश सुटरिया ने कहा कि मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह बहुत बड़ा आर्थिक बोझ है। नीट यूजी काउंसलिंग में विकल्प भरने से पहले अभिभावकों को पूरी 5.5 साल की फीस और अन्य खर्चों का हिसाब जरूर लगा लेना चाहिए।


