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Delhi Blast : अल फलाह मेडिकल कॉलेज पर NMC की कड़ी निगरानी, कितनी है यहां MBBS की फीस, कितनी हैं सीटें

Delhi Blast : अल फलाह मेडिकल कॉलेज पर NMC की कड़ी निगरानी, कितनी है यहां MBBS की फीस, कितनी हैं सीटें

संक्षेप: आतंकी मॉड्यूल से लिंक जुड़ने के बाद एनएमसी अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में चल रही गतिविधियों पर नजर रख रहा है। एनएमसी ने कहा है कि जांच एजेंसियों की जांच के नतीजों के आधार पर वह कार्रवाई करेगा।

Thu, 13 Nov 2025 04:55 PMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके से तार जुड़ने के बाद फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय न सिर्फ जांच एजेंसियों बल्कि नेशनल मेडिकल कमिशन (एनएमसी) की भी कड़ी निगरानी में है। नेशनल मेडिकल कमिशन ही देश में मेडिकल एजुकेशन की देखरेख करती है। अल फलाह विश्वविद्यालय ही अल-फलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च को संचालित करता है। इसी यूनिवर्सिटी के कैंपस में यह मेडिकल कॉलेज है। मेडिकल कॉलेज में पढ़ाने वाले तीन डॉक्टरों उमर मोहम्मद, मुजम्मिल शकील और शाहीन शाहिद के तार लाल किला ब्लास्ट से जुड़े बताए जा रहे हैं। आतंकी मॉड्यूल से लिंक जुड़ने के बाद एनएमसी अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में चल रही गतिविधियों पर नजर रख रहा है। एनएमसी ने कहा है कि जांच एजेंसियों की जांच के नतीजों के आधार पर वह कार्रवाई करेगा।

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एनएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, "मामला अभी जांच के दायरे में है। चिकित्सा नियामक प्राधिकरण होने के नाते एनएमसी जाच एजेंसियों के निष्कर्ष मिलने के बाद नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई करेगा।" हरियाणा में फरीदाबाद जिले के मुस्लिम बहुल धौज गांव में बनी अल-फलाह प्राइवेट यूनिवर्सिटी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से मान्यता प्राप्त है, लेकिन इसका मेडिकल स्कूल एनएमसी के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस प्राइवेट यूनिवर्सिटी की स्थापना हरियाणा विधानसभा द्वारा हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटी एक्ट के तहत 1997 में की गई थी।

एमबीबीएस कोर्स के लिए 74 लाख रुपये की फीस

अल-फलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर 2019 से एमबीबीएस की डिग्री दे रहा है। इस मेडिकल कॉलेज से 650 बिस्तरों वाला एक अस्पताल भी जुड़ा हुआ है। यहां एमबीबीएस कोर्स की 200 सीटें हैं। पिछले साल यह 150 थी। इस बार 50 बढ़ा दी गई थीं। विश्वविद्यालय कोर्स के पहले चार वर्षों के लिए 16.37 लाख रुपये और अंतिम वर्ष के लिए 9 लाख रुपये प्रति छात्र शुल्क लेता है। इस प्रकार पूरे कोर्स के लिए कुल 74.50 लाख रुपये का शुल्क आता है। छात्रावास में प्रत्येक वर्ष के लिए विश्वविद्यालय 3 लाख रुपये शुल्क लेता है। अल-फलाह विश्वविद्यालय में कश्मीरी छात्रों की संख्या अच्छी-खासी है, कुछ अनुमानों के अनुसार यह संख्या 40 प्रतिशत है।

अल-फलाह विश्वविद्यालय इंजीनियरिंग, चिकित्सा और स्वास्थ्य विज्ञान, प्रबंधन (एमबीए), वाणिज्य, विज्ञान, मानविकी, शिक्षा, डिप्लोमा और डॉक्टरेट (पीएचडी) कोर्सेज कराता है। यह यूनिवर्सिटी करीब 70 एकड़ में फैली हुई है। यह 650 बेड का चैरिटेबल अस्पताल है। यहां पर देश के अलावा विदेशों के छात्र भी शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। परिसर में ही छात्रावास है। यह मेडिकल कॉलेज आसपास के करीब 20 गांवों के लिए एम्स से कम नहीं है। यहां पर निशुल्क उपचार की सुविधा है।

अलफ्लाह ट्रस्ट यूनिवर्सिटी का संचालन करती है

यूनिवर्सिटी का संचालन अलफ्लाह चैरिटेबल ट्रस्ट करता है। ट्रस्ट यूनिवर्सिटी के अलावा कई अन्य शैक्षणिक संस्थान भी संचालित करता है। बताया जाता है कि यूनिवर्सिटी परिसर में अलफ्लाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, ब्राउन हिल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, अलफ्लाह स्कूल ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग चलाए जाते हैं। अलफ्लाह स्कूल ऑफ फिजिकल एंड मोलेकुलर साइंस, अलफ्लाह स्कूल ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट, अलफ्लाह स्कूल ऑफ पैरामेडिकल एवं हेल्थ साइंस स्कूल भी है।

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अल-फलाह मेडिकल कॉलेज

- अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में करीब 20 से अधिक कोर्स की पढ़ाई कराई जाती है।

- गांव धौज में बनी यह यूनिवर्सिटी करीब 70 एकड़ में फैली हुई।

- 650 बेड का चैरिटेबल अस्पताल है। यहां पर रोजाना काफी मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं।

- यूनिवर्सिटी में डिप्लोमा, ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और डॉक्टरेट कोर्स संचालित होते हैं।

मान्यता पर वेबसाइट पर बोला झूठ, नैक ने लिया एक्शन

राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने अल-फलाह यूनिवर्सिटीको अपनी वेबसाइट पर गलत मान्यता प्रदर्शित करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

ब्लास्ट से पहले मिले थे भारी मात्रा विस्फोटक

फरीदाबाद से विस्फोटकों की भारी बरामदगी के बाद अल-फलाह विश्वविद्यालय सुर्खियों में आ गया था। अलफलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर से जुड़े डॉक्टर मुजम्मिल द्वारा कैंपस के बाहर किराए पर लिए गए कमरों में लगभग 2,900 किलोग्राम बम बनाने की सामग्री, जिसके अमोनियम नाइट्रेट होने का संदेह है, बरामद हुई। मेडिकल कॉलेज की एक अन्य डॉक्टर, डॉ. शाहीन को उनकी कार में असॉल्ट राइफलें और अन्य हथियार मिलने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया।

इस खबर के सामने आने के कुछ ही घंटों बाद लाल किले के पास एक कार में विस्फोट हो गया। खबरों के अनुसार कार चला रहा व्यक्ति डॉ. उमर था, जो अल-फलाह में ही काम करता है। पुलवामा का डॉक्टर उमर इस यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में पढ़ाता था।

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लेखक के बारे में

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पंकज विजय लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर हैं। यहां वह करियर, एजुकेशन, जॉब्स से जुड़ी खबरें देखते हैं। पंकज को पत्रकारिता में डेढ़ दशक से ज्यादा का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने एनडीटीवी डिजिटल, आजतक डिजिटल, अमर उजाला समाचार पत्र में काम किया। करियर-एजुकेशन-जॉब्स के अलावा वह विभिन्न संस्थानों में देश-विदेश, राजनीति, रिसर्च व धर्म से जुड़ी बीट पर भी काम कर चुके हैं। भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा व डीयू से इतिहास में बीए ऑनर्स किया है। और पढ़ें
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