मेरा साल बच जाएगा, MBBS में 1 अंक के लिए गिड़गिड़ाया फेल छात्र, ग्रेस मार्क्स पर क्या बोला कोर्ट
एमपी हाईकोर्ट ने जबलपुर में सरकारी एमपी मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के चांसलर से जवाब मांगा है कि क्या उनके पास यूनिवर्सिटी के कानून के मुताबिक किसी एमबीबीएस स्टूडेंट को एक अंक बतौर ग्रेस मार्क्स देने का अधिकार है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर में सरकारी एमपी मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के चांसलर से जवाब मांगा है कि क्या उनके पास यूनिवर्सिटी के कानून के मुताबिक किसी एमबीबीएस स्टूडेंट को एक अंक बतौर ग्रेस मार्क्स देने का अधिकार है। टीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला ग्वालियर में यूनिवर्सिटी से जुड़े गजरा राजा मेडिकल कॉलेज के एक स्टूडेंट की याचिका से जुड़ा है। अर्जी में मेडिकल छात्र ने कोर्ट से दखल देने और उसे एक ग्रेस मार्क दिलाने में मदद करने की अपील की है ताकि उसका एक साल बर्बाद न हो।
8 सितंबर को जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस एके सिंह की डिवीजन बेंच ने एडिशनल एडवोकेट जनरल जाह्नवी पंडित को यूनिवर्सिटी के चांसलर से यह पता लगाने का निर्देश दिया कि क्या स्टूडेंट को एक ग्रेस मार्क देने का कोई प्रावधान है ताकि एक होनहार मेडिकल स्टूडेंट का एक साल बचाया जा सके। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जबलपुर में मौजूद सरकारी एमपी मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के चांसलर से जवाब मांगा है कि क्या उनके पास यूनिवर्सिटी के कानून के मुताबिक किसी स्टूडेंट को एक ग्रेस मार्क देने का अधिकार है।
अपनी याचिका में एमबीबीएस स्टूडेंट रामनरेश कुशवाह ने कहा कि वह फर्स्ट ईयर की एमबीबीएस परीक्षा में सिर्फ एक नंबर से फेल हो गया था। वह लगातार दूसरे साल की क्लास में जा रहा है लेकिन पहले साल की परीक्षा में एक नंबर कम होने की वजह से उसे परीक्षा में बैठने की इजाजत नहीं मिल सकती है। उसने कहा कि यूनिवर्सिटी के चांसलर के पास मध्य प्रदेश यूनिवर्सिटीज कॉमन ऑर्डिनेंस नंबर 6 के क्लॉज 32 के तहत ऐसी बहुत ज्यादा पेचीदे मामलों में ग्रेस मार्क देने के अधिकार हैं। कोर्ट ने अब इस केस को आज, 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई के लिए टॉप 10 केस में रखा है।
एमपी हाईकोर्ट ने ग्रेस मार्क्स, राउंडिंग ऑफ पर पहले के केस में क्या कहा था
एमपी हाई कोर्ट के सामने पहले के एक केस में देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी, इंदौर के एक स्टूडेंट, जिसने अपनी एमए पॉलिटिकल साइंस की परीक्षा में 47.8 फीसदी नंबर हासिल किए थे, ने अपने नंबरों को 48 फीसदी करने की अपील की थी ताकि उसे सेकंड डिवीजन दिया जा सके और मिडिल स्कूल टीचर की पोस्ट के लिए योग्य घोषित किया जा सके।
इंडियन कानून के अनुसार यूनिवर्सिटी ने कहा कि ऑर्डिनेंस नंबर 6 कुलपति को एक ग्रेस मार्क तभी देने की इजाजत देता है जब कोई कैंडिडेट पास होने या डिवीजन पाने में एक नंबर कम हो; हालांकि, नंबरों को आम तौर पर राउंडिंग ऑफ करने का कोई नियम नहीं था। क्योंकि स्टूडेंट सेकंड डिवीजन लाने से दो नंबर कम था इसलिए हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी और कहा कि राउंडिंग ऑफ की इजाजत देने वाले नियम के बिना यूनिवर्सिटी को डिवीजन अपग्रेड करने का आदेश नहीं दिया जा सकता।


