
MBBS : कोई 27 साल तो कोई 15 वर्ष से कर रहा एमबीबीएस, डॉक्टर बनने में फंसा पेच, अब कॉलेज भेजेगा रिमाइंडर
MBBS Degree : गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के तीन एमबीबीएस छात्रों के रिजल्ट रोके जाने का मामला खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। मेडिकल कॉलेज इस मामले को लेकर एक और रिमाइंडर पत्र गोरखपुर विश्वविद्यालय को भेजकर तीनों छात्रों के रिजल्ट को जारी करने का आग्रह करेगा।
MBBS Degree : 12वीं के बाद 4.5 साल से 6 साल का एमबीबीएस पूरा कर डॉक्टर बना जा सकता है, लेकिन गोरखपुर का बाबा राघव दास (BRD) मेडिकल कॉलेज इन दिनों सुर्खियों में हैं। इस मेडिकल कॉलेज के कुछेक स्टूडेंट्स 15 तो कोई 27 साल में भी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी नहीं कर पा रहा है। इन्होंने एमबीबीएस की फाइनल परीक्षा तो दे दी है पर लंबे समय से रिजल्ट अटका हुआ है। डीडीयू ने तीन छात्रों का परिणाम रोक रखा है। रिजल्ट जारी होते ही ये एक साल का इंटर्न कर डॉक्टर बनेंगे। मेडिकल कॉलेज प्रशासन इस मामले को लेकर एक और रिमाइंडर पत्र गोरखपुर विश्वविद्यालय को भेजकर तीनों छात्रों के रिजल्ट को जारी करने का आग्रह करेगा। कॉलेज प्रशासन इसके लिए एमसीआई के नियमों का हवाला देगा।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में लंबे समय से पास न हो रहे छात्र प्रशासन के गले की हड्डी बने हुए हैं। मामला मीडिया में आने के बाद कॉलेज प्रशासन अब इस मसले को संजीदगी से ले रहा है। प्रशासन चाहता है कि जल्द तीनों छात्रों का इंटर्नशिप पूरा करा दिया जाए। इसमें से एक छात्र 1998 बैच के हैं। वह आगरा के हैं। जबकि 2009 बैच का छात्र मऊ का निवासी है। 2010 बैच का छात्र कुशीनगर का निवासी है। तीनों छात्रों ने एमबीबीएस अंतिम वर्ष की परीक्षा दे रखी है। उनके परीक्षा को गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन ने रोक रखा है।
कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं तीनों मेडिकल छात्र
बताया जाता है कि रिजल्ट घोषित करने के लिए तीनों छात्र कोर्ट का दरवाजा खटखटाने पर विचार कर रहे हैं। इसके लिए साथियों से सलाह ले रहे हैं। छात्रों के सहपाठियों ने बताया कि 2023-24 में डीडीयू ने करीब 18 ऐसे छात्रों का रिजल्ट जारी कर दिया पर इस बार रोक दिया गया। जबकि एनएमसी का नियम 2022-23 में लागू हो गया था। 11 साल से एमबीबीएस प्रथम वर्ष में पढ़ाई कर रहे एक छात्र के पिता अब तक मेडिकल कॉलेज नहीं पहुंचे हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर 2024 तक गोरखपुर यूनिवर्सिटी से ही संबद्ध था। यूनिवर्सिटी ही मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट्स को रिजल्ट और डिग्री आवंटित करता था।
11 साल से MBBS फर्स्ट ईयर में है स्टूडेंट
बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में ये पहला मामला नहीं है, जब MBBS पूरा करने में स्टूडेंट्स कई साल लगा रहे हैं। इससे पूर्व मेडिकल कॉलेज एक ऐसे ही स्टूडेंट को लेकर सुर्खियों में आ चुका है। असल में बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर का एक स्टूडेंट पिछले 11 साल से MBBS फर्स्ट ईयर में ही है। असल में इस स्टूडेंट ने 2014 में MBBS में एडमिशन लिया था, लेकिन वह पिछले 11 साल से MBBS फर्स्ट ईयर में ही है। वह बार बार फेल हो रहा है। उसके पिता दारोगा है। अब मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने उसके पिता को बुलाया है। छात्र ने वर्ष 2014 में सीपीएमटी के जरिए प्रवेश लिया था।
कहां फंस रहा पेच
जब छात्र का प्रवेश हुआ था तब मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) के नियमों के तहत प्रवेश होता था। एमसीआई के नियमों में कहीं भी छात्रों के लिए कोई बंदिश नहीं थी। वह कितने भी वर्ष में पढ़ाई पूरी कर सकते थे। वर्ष 2023 में एनएमसी के प्रावधान मेडिकल कॉलेज पर लागू हुए। एनएमसी में नियम सख्त हैं। इस छात्र पर एनएमसी के नियम लागू होंगे या नहीं यह विधिक सवाल है। एनएमसी के मौजूदा नियमों के अनुसार, MBBS छात्रों को पहले साल की परीक्षा चार अटेंप्ट में पास करनी होती है और पूरा कोर्स 9 साल (पढ़ाई और इंटर्नशिप को मिलाकर) में पूरा करना होता है।
यह छात्र 2014 बैच का है, जब मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) मेडिकल एजुकेशन को रेगुलेट करती थी। 2014 से पहले एमसीआई के नियम स्नातक चिकित्सा शिक्षा विनियम, 1997 के अंतर्गत आते थे इसलिए यह मामला रेगुलेटरी ग्रे एरिया में आता है, जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई करना मुश्किल हो रहा है।
गोरखपुर का छात्र 22 वर्ष में पास हुआ था एमबीबीएस
मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कई वर्ष में करने का यह पहला मामला नहीं है। यहां कई ऐसे छात्र रहें, जो 4.5 वर्ष के इस कोर्स को 10 से 12 वर्ष में पूरा किए। बताया जाता वर्ष 1980 में प्रवेश लेने वाले एक छात्र ने करीब 22 वर्ष में यह पढ़ाई पूरी की थी। यह कालेज में सबसे लंबे समय तक छात्र के पढ़ाई करने का रिकार्ड हैं। उस छात्र ने सामान्य श्रेणी में प्रवेश लिया था। वह छात्र गोरखपुर का ही था।





