MBBS : रूसी चीनी भाषा में एमबीबीएस किया तो डिग्री होगी बेकार, सरकार ने विदेश से डॉक्टरी करने वालों को किया आगाह

Apr 11, 2026 06:26 am ISTPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान
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पूर्व सोवियत देशों और चीन में करीब 8-10 हजार छात्र प्रतिवर्ष मेडिकल की पढ़ाई के लिए जा रहे हैं। इनमें से 70-80 फीसदी चीनी, रूसी और अन्य स्थानीय भाषाओं में मेडिकल की शिक्षा ले रहे हैं। ऐसे छात्रों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

MBBS : रूसी चीनी भाषा में एमबीबीएस किया तो डिग्री होगी बेकार, सरकार ने विदेश से डॉक्टरी करने वालों को किया आगाह

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने आगाह किया है कि सिर्फ अंग्रेजी माध्यम से की गई मेडिकल की पढ़ाई ही भारत में मान्य होगी। भारत से बड़े पैमाने पर छात्र चीन और रूस और पूर्व सोवियत देशों में मेडिकल की पढ़ाई के लिए जा रहे हैं। इनमें अधिकतर छात्र उन देशों की स्थानीय भाषा में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। इसको देखते हुए एनएमसी ने यह कदम उठाया है।

उजबेकिस्तान के चार विश्वविद्यालय ब्लैकलिस्ट

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की ओर से विदेश में भारतीय छात्रों को मेडिकल शिक्षा देने वाले संस्थाानों को चिह्नित भी किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, हाल ही में आयोग ने उजबेकिस्तान के चार ऐसे विश्वविद्यालयों को भी ब्लैकलिस्ट किया है।

भारत में अधिक होता है खर्चा

भारत में एमबीबीएस की सीटें 1.29 लाख तक पहुंच गई हैं, लेकिन निजी मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल की पढ़ाई बेहद महंगी है। पूरे कोर्स में एक करोड़ रुपये से भी ज्यादा का खर्च आता है। ऐसे में भारतीय छात्र विदेश में जाकर एमबीबीएस करने का रास्ता अपनाते हैं। इसके अलावा बहुत से स्टूडेंट्स को नीट में कम अंक होने के चलते भारत में प्राइवेट व सरकारी किसी भी मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं मिल पाता, ऐसे में वे विदेश के मेडिकल संस्थान से डॉक्टरी करने का रास्ता चुनते हैं।

एक चौथाई खर्चे पर विदेश में पढ़ाई का अवसर

जानकारी के अनुसार, भारत में भले ही मेडिकल की पढ़ाई अत्यधिक महंगी हो चुकी है, लेकिन चीन, रूस और कई अन्य देशों से अब भी भारत के मुकाबले एक चौथाई कम खर्च में मेडिकल का कोर्स हो जाता है। यानी जो पढ़ाई भारत में एक करोड़ से अधिक रकम खर्च करने के बाद हो रही है, वही पढ़ाई इन देशों में 20 से 25 लाख रुपये खर्च करने होते हैं। यही वजह है कि भारतीय छात्र वहां जाते हैं। इन देशों में कुछ विश्वविद्यालय अंग्रेजी में शिक्षण करते हैं, लेकिन ज्यादातर में अपने देश की भाषा में होती है। ऐसे में भारत से जाने वाले छात्र पहले एक साल स्थानीय भाषा सीखते हैं।

हजारों छात्रों की मुश्किलें बढ़ेंगी

एक अनुमान के अनुसार, पूर्व सोवियत देशों और चीन में करीब 8-10 हजार छात्र प्रतिवर्ष मेडिकल की पढ़ाई के लिए जा रहे हैं। इनमें से 70-80 फीसदी चीनी, रूसी और अन्य स्थानीय भाषाओं में मेडिकल की शिक्षा ले रहे हैं। ऐसे छात्रों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

खास बातें

- पूर्व सोवियत देशों और चीन में भारत से हर साल आठ से 10 हजार छात्र मेडिकल की पढ़ाई करने जा रहे हैं।

- विदेश जाने वाले करीब 80 प्रतिशत छात्र उन्हीं देशों की स्थानीय भाषाओं में मेडिकल शिक्षा हासिल कर रहे हैं।

- विदेशों में पढ़ने के लिए जाने वाले छात्रों को शुरुआती एक साल तक स्थानीय भाषा सीखनी होती है।

- विदेशों से बिना अंग्रेजी माध्यम के पढ़ाई करने वाले छात्रों को नए आदेश के बाद नीट परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

Pankaj Vijay

लेखक के बारे में

Pankaj Vijay

पंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार

शॉर्ट बायो पंकज विजय एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में livehindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे करियर, स्कूल व हायर एजुकेशन, जॉब्स से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। 9 वर्षों से यहां इसी भूमिका में हैं। सरकारी भर्तियों, बोर्ड व एंट्रेंस एग्जाम, प्रतियोगी परीक्षाओं, उनके परिणाम, बदलते दौर में करियर की नई राहों, कोर्स, एडमिशन एवं नए जमाने के रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स से जुड़ी अपडेट तेजी से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।


15 से अधिक सालों का अनुभव

पंकज विजय ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। अमर उजाला समाचार पत्र में रिसर्च, संपादकीय और करियर एजुकेशन जॉब्स डेस्क पर काम किया। यहां उन्हें फीचर लेखन व रिपोर्टिंग का भी मौका मिला। इसके बाद उन्होंने आज तक डिजिटल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आज तक वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और एजुकेशन व रोजगार जगत से जुड़ी खबरें लिखीं। इसके बाद एनडीटीवी ऑनलाइन में एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर इस विषय में अपनी समझ को और व्यापक बनाया। एनडीटीवी की पारी के बाद वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और बीते 9 वर्षों से करियर एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर रहे हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा, गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में एमए व दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में बीए ऑनर्स किया है। एनसीसी सी सर्टिफिकेट होल्डर हैं जिसके चलते उन्हें रक्षा क्षेत्र जैसे पुलिस व सेनाओं की भर्तियों की बेहतर समझ है।


विजन

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