डॉक्टर बनने के लिए बेलने पड़ते हैं कितने पापड़, MBBS की पढ़ाई में हर साल क्या पढ़ाया जाता है

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भारत में डॉक्टर बनाने के लिए एमबीबीएस कोर्स 5.5 साल का होता है, जिसमें हर साल के सिलेबस, विषयों और अनिवार्य इंटर्नशिप की पूरी जानकारी यहां जानें।

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MBBS छात्र

हर साल लाखों बच्चे सफेद कोट, गले में लटका स्टेथोस्कोप और मरीजों की जान बचाने का जुनून लिए नीट की परीक्षा देते हैं। लेकिन इस सफेद कोट तक पहुंचने का रास्ता उतना आसान नहीं जितना दिखता है। नीट क्वालिफाई करने के बाद जब कोई छात्र मेडिकल कॉलेज के गेट में दाखिल होता है, तो असल परीक्षा वहीं से शुरू होती है। अक्सर पैरेंट्स और स्टूडेंट्स के मन में एक सवाल घूमता रहता है आखिर एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने में कितने साल लगते हैं और इन सालों में डॉक्टर बनने के लिए क्याक्या सीखना पड़ता है? आइए इसे सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं।

कितने साल का होता है पूरा कोर्स

भारत में एमबीबीएस की पढ़ाई कुल साढ़े पांच साल यानी 5.5 साल की होती है। इस पूरी अवधि को दो बड़े हिस्सों में बांटा गया है पहला, साढ़े चार साल की किताबी और क्लिनिकल पढ़ाई, और दूसरा, एक साल की अनिवार्य रोटेटिंग इंटर्नशिप। नेशनल मेडिकल कमीशन यानी NMC के मौजूदा नियमों के मुताबिक 2026 बैच के लिए भी यह ढांचा जस का तस बना हुआ है, हालांकि कॉलेजों में पढ़ाने के तरीकों और स्किल लैब ट्रेनिंग को लगातार बेहतर किया जा रहा है। दिलचस्प बात यह भी है कि हाल ही में NMC ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर कोर्स पूरा करने की अधिकतम समयसीमा को 9 साल से बढ़ाकर 10 साल करने का प्रस्ताव रखा है, ताकि जिन छात्रों की पढ़ाई किसी वजह से बीच में रुक जाए, उन्हें डिग्री पूरी करने के लिए ज्यादा मौका मिल सके।

पहला साल शरीर की बनावट समझने की शुरुआत

एमबीबीएस के पहले 14 से 15 महीनों में छात्रों को इंसानी शरीर की बुनियादी जानकारी दी जाती है। इसमें तीन मुख्य विषय पढ़ाए जाते हैं एनाटॉमी, जिसमें कैडावर यानी शव के जरिए हड्डियों, मांसपेशियों और अंगों की बनावट सिखाई जाती है; फिजियोलॉजी, जिसमें यह समझाया जाता है कि शरीर के अलगअलग अंग कैसे काम करते हैं; और बायोकेमिस्ट्री, जिसमें शरीर के भीतर होने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं और ब्लड टेस्ट की बारीकियां पढ़ाई जाती हैं।

दूसरे साल पढ़ाई जाती है बीमारियां और दवाइयों की दुनिया

शरीर की बनावट समझने के बाद दूसरे साल में छात्रों का सामना बीमारियों और उनके इलाज से होता है। पैथोलॉजी में सिखाया जाता है कि बीमारियां क्यों और कैसे होती हैं और शरीर पर उनका क्या असर पड़ता है। फार्माकोलॉजी में यह पढ़ाया जाता है कि कौनसी दवा किस बीमारी में काम आती है और उसके क्या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। इसके अलावा माइक्रोबायोलॉजी में बैक्टीरिया, वायरस और फंगस से जुड़े इंफेक्शन की पढ़ाई होती है, जबकि फॉरेंसिक मेडिसिन में पोस्टमॉर्टम और मेडिकललीगल मामलों की जानकारी दी जाती है।

तीसरे साल में कम्युनिटी मेडिसिन से लेकर आंख-नाक-कान तक

तीसरे साल में छात्रों को आम बीमारियों के साथसाथ कुछ खास अंगों की पढ़ाई भी कराई जाती है। कम्युनिटी मेडिसिन में सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं, महामारियों और ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य समस्याओं को समझाया जाता है। वहीं ईएनटी में कान, नाक और गले की बीमारियों की पढ़ाई होती है, जबकि ऑफ्थैल्मोलॉजी में आंखों से जुड़ी बीमारियों और उनकी जांच के तरीके सिखाए जाते हैं।

फाइनल ईयर में होती है असली डॉक्टरी की मास्टरक्लास

12 से 18 महीने की यह अवधि पूरे कोर्स का सबसे अहम और चुनौतीपूर्ण दौर मानी जाती है। यहां जनरल मेडिसिन में गंभीर बीमारियों का बिना सर्जरी दवाइयों से इलाज करना सिखाया जाता है, जनरल सर्जरी में ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी करना और टांके लगाना सिखाया जाता है। गायनेकोलॉजी में महिला स्वास्थ्य, डिलीवरी और गर्भावस्था की देखभाल पढ़ाई जाती है, जबकि पीडियाट्रिक्स में बच्चों की बीमारियों और उनके इलाज की जानकारी दी जाती है।

आखिरी पड़ाव में एक साल की इंटर्नशिप

साढ़े चार साल की थ्योरी और प्रैक्टिकल परीक्षाएं पास करने के बाद छात्र को भले ही 'डॉक्टर' का टैग मिल जाए, लेकिन असल में प्रैक्टिस करने का लाइसेंस इंटर्नशिप पूरी होने के बाद ही मिलता है। इस एक साल के दौरान छात्रों को इमरजेंसी वॉर्ड, आईसीयू, लेबर रूम और सर्जरी डिपार्टमेंट में सीनियर डॉक्टरों की देखरेख में असली मरीजों का इलाज करना होता है। यही वह दौर है जब किताबी ज्ञान असली अनुभव में बदलता है और एक छात्र पूरी तरह से एक जिम्मेदार डॉक्टर बनकर निकलता है।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

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