MBBS एडमिशन में दिव्यांग कोटे को लेकर सख्ती, येलो यूडीआईडी कार्ड की होगी कड़ी जांच

लाइव हिन्दुस्तान
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UDID यानी यूनिक डिसएबिलिटी आईडी कार्ड दिव्यांग व्यक्तियों की पहचान से जुड़ा एक अहम डॉक्यूमेंट होता है। उपलब्ध वर्गीकरण के अनुसार, दिव्यांगता के स्तर के आधार पर अलग-अलग रंग के कार्ड जारी किए जाते हैं।

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क्या होता है येलो यूडीआईडी कार्ड?

देशभर के मेडिकल कॉलेज में इस वक्त एमबीबीएस में एडमिशन की प्रक्रिया जारी है। एडमिशन के दौरान कई तरह के डॉक्यूमेंट्स की जरुरत पड़ती है। पहले इन डॉक्यूमेंट्स को गहन जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। वहीं, इसी बीच MBBS एडमिशन में दिव्यांग कोटे का लाभ लेने वाले उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच को लेकर मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल डाल्टनगंज ने सख्त रुख अपनाया है। कॉलेज प्रशासन ने खास तौर पर येलो यूडीआईडी कार्ड पेश करने वाले उम्मीदवारों के दस्तावेजों का कड़ाई से वैरिफिकेशन शुरू किया है। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य किसी भी तरह की हेराफेरी या गलत दावे की संभावना को रोकना है। साथ ही इस प्रक्रिया से एडमिशन में पारदर्शिता भी रहेगी।

क्या है येलो यूडीआईडी कार्ड

बता दें कि UDID यानी यूनिक डिसएबिलिटी आईडी कार्ड दिव्यांग व्यक्तियों की पहचान से जुड़ा एक अहम डॉक्यूमेंट होता है। दिव्यांगता के स्तर पर अलग-अलग रंग के कार्ड जारी किए जाते हैं। इसमें सफेद, पीला और नीला कार्ड शामिल है। बता दें कि 40 प्रतिशत से कम दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को सफेद कार्ड, 40 से 79 प्रतिशत तक दिव्यांगता वाले लोगों को पीला कार्ड और 80 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को नीला कार्ड जारी किया जाता है।

MBBS एडमिशन में 40 प्रतिशत से कम दिव्यांगता वाले उम्मीदवारों को दिव्यांगता कोटे के तहत आरक्षण का लाभ नहीं मिलता। ऐसे में काउंसलिंग और एडमिशन के दौरान दिव्यांग कोटे के तहत आरक्षण का लाभ लेने के लिए पीला UDID कार्ड सबसे अधिक पेश किए जाने वाला दिव्यांगता प्रमाणपत्र है।

हर येलो UDID Card की होगी कड़ी जांच

MMCH के प्रिंसिपल डॉ. जक्का श्रीनिवास राव के मुताबिक, MBBS एडमिशन के दौरान जमा किए जाने वाले हर येलो UDID कार्ड की जांच होगी। उन्होंने आगे बताया कि कॉलेज प्रशासन दिव्यांगता प्रमाणपत्रों की जांच में पूरी सतर्कता बरत रहा है, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता की गुंजाइश न रहे। उन्होंने बताया कि एडमिशन प्रक्रिया में निवास और जाति प्रमाणपत्रों के अलावा दिव्यांगता से जुड़े डॉक्यूमेंट्स की भी विशेष जांच की जाती है।

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट में मेडिकल सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सुनने की क्षमता से जुड़े डॉक्यूमेंट्स की जांच भी बेहद सख्ती से की जाएगी। इसके लिए उम्मीदवारों से मेडिकल टेस्ट भी कराया जा सकता है, ताकि दिव्यांगता के दावे की पुष्टि की जा सके।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 के MBBS एडमिशन के दौरान एक उम्मीदवार ने सुनने की क्षमता की कमी के आधार पर दिव्यांग श्रेणी में एडमिशन के लिए अप्लाई किया था। लेकिन, जब उसे बताया गया कि जांच प्रक्रिया के तहत ऑडियोमेट्री टेस्ट कराना होगा, तो उसने आगे दाखिले की प्रक्रिया में शामिल नहीं होने का फैसला किया।

कॉलेज प्रशासन का कहना है कि दिव्यांग कोटे के तहत MBBS में प्रवेश लेने वाले उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच इसलिए महत्वपूर्ण है, ताकि आरक्षण का लाभ केवल पात्र उम्मीदवारों को ही मिल सके और एडमिशन प्रक्रिया भी पारदर्शी बनी रहे।

Dheeraj Pal

लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण: धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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