
MBBS : एम्स के एमबीबीएस फर्स्ट ईयर में 6 बार फेल होने वाले कई छात्र पास, एक लड़की फिर फेल
एम्स गोरखपुर में MBBS प्रथम वर्ष में 5 और 6 बार फेल होने वाले सात में से छह छात्र पास हो गए हैं। चार छात्रों को दो बार मर्सी अटेम्प्ट मिला था, जबकि तीन को एक बार मौका मिला। एक छात्रा फिर पास नहीं हो सकी है।
एम्स गोरखपुर में एमबीबीएस प्रथम वर्ष में पांच और छह बार फेल होने वाले सात में से छह छात्र पास हो गए हैं। यह सभी दूसरे वर्ष में पहुंच गए हैं। इनमें से चार छात्रों को दो बार मर्सी अटेम्प्ट मिला था, जबकि तीन को एक बार मौका मिला। एक छात्रा फिर पास नहीं हो सकी है। हालांकि, उसको दूसरे मर्सी अटेम्प्ट के लिए एम्स प्रशासन से अनुरोध की तैयारी है। एम्स की कार्यकारी निदेशक ने इसकी पुष्टि की है। वर्ष 2019 में एम्स में एमबीबीएस कोर्स शुरू हुआ था। पहले बैच में 50 छात्रों ने प्रवेश लिया था। इनमें से चार छात्र लगातार चार वर्ष तक फेल होते रहे। दूसरे बैच यानी 2020 के दो छात्र व एक छात्रा लगातार फेल होते रहे। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के नियम के अनुसार ऐसे छात्रों को फिर मौका नहीं दिया जाता है। इन छात्रों ने एम्स की गवर्निंग बाडी में दया की अपील की थी।
एमबीबीएस छात्र के पिता को बुलाएगा बीआरडी
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 11 साल से एमबीबीएस के पहले साल की पढ़ाई कर रहे छात्र के मामले में कार्रवाई शुरू हो गई है। सोमवार को एकेडमिक कमेटी की बैठक प्राचार्य कार्यालय में हुई। बैठक की अध्यक्षता मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने की। इस कमेटी में आठ सदस्य हैं, जिसमें से छह विभागाध्यक्ष हैं। कमेटी में हॉस्टल के वार्डन को भी बुलाया गया। उनसे पूरे मामले की जानकारी ली गई। इसके बाद कमेटी ने तय किया कि एमबीबीएस छात्र के पिता को बुलाकर वार्ता की जाए। छात्र के पिता दारोगा हैं। छात्र से भी संवाद किया जाएगा। दोनों पक्षों से संवाद के बाद ही कोई रास्ता निकाला जाएगा। एकेडमिक कमेटी में मौजूद शिक्षकों ने तय किया कि छात्र को मौका मिलना चाहिए। इसके लिए कुछ पहल छात्र को भी करनी पड़ेगी। उसे पढ़ना पड़ेगा। तैयारी करनी पड़ेगी। समय से परीक्षा देनी होगी। एकेडमिक कमेटी ने छात्र की काउंसलिंग करने का भी फैसला किया है। इसके साथ यह भी तय किया है कि अगर छात्र पढ़ना चाहेगा तो उसे शिक्षक अतिरिक्त क्लास देंगे। उसकी काउंसलिंग की जाएगी।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एक छात्र बवाले जान बना है। मेडिकल कॉलेज में छात्र बीते 11 वर्ष से एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहा है। वह आजमगढ़ का रहने वाला है। उसके पिता पुलिस में दारोगा हैं। छात्र ने वर्ष 2014 में सीपीएमटी के जरिए प्रवेश लिया था। बीते 11 वर्षो में उसने सिर्फ एक बार एमबीबीएस प्रथम वर्ष की परीक्षा दी। उस समय सभी पेपर में वह फेल हो गया। उसके बाद से उसने दोबारा कभी परीक्षा दी ही नहीं। वह मेडिकल कॉलेज के एक हॉस्टल में रहता है। हॉस्टल के वार्डन ने इसकी शिकायत पूर्व प्राचार्य डॉ गणेश कुमार से तीन-चार बार की थी। उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। अब वार्डन ने वर्तमान प्राचार्य डॉ रामकुमार जायसवाल से शिकायत दर्ज कराई है।





