Success Story: सड़क किनारे बेची चाय, रिश्तेदारों ने मारा ताना; आज हैं 400 से ज्यादा आउटलेट्स के फाउंडर
आज के समय में चाय बेचकर कई परिवारों की रोजी रोटी चल रही है। लेकिन सिर्फ चाय बेचकर करोड़ों का कारोबार खड़ा करना काफी बड़ी बात होती है, वो भी एक यंग और पढ़े-लिखे युवा के लिए। जी हां, हम बात कर रहे हैं 'एमबीए चाय वाला' की।

आज के समय में चाय बेचकर कई परिवारों की रोजी रोटी चल रही है। लेकिन सिर्फ चाय बेचकर करोड़ों का कारोबार खड़ा करना काफी बड़ी बात होती है, वो भी एक यंग और पढ़े-लिखे युवा के लिए। जी हां, हम बात कर रहे हैं 'एमबीए चाय वाला' की। इसके बारे में आपने जरूर सुना या पढ़ा होगा या आपने वहां की चाय पी होगी। 'एमबीए चाय वाला' आज के समय में एक ब्रांड बन गया है और करीब उसके 400 से अधिक आउटलेट्स हैं। इस ब्रांड के फाउंडर हैं प्रफुल्ल बिल्लौर।
एमबीए चाय वाला की कहानी
प्रफुल्ल बिल्लौर आज एमबीए चाय वाला के नाम से मशहूर हैं। हालांकि ये ब्रांड बनाने में उनके सफर की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं। प्रफुल्ल बिल्लौर मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं। उन्होंने MBA करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। पढ़ाई के दौरान उन्होंने पॉर्ट टाइम जॉब भी किया। जॉब करते हुए प्रफुल्ल के दिमाग में एक बात आई। उन्होंने सोचा कि जब विदेशी कंपनियां हमारे देश बर्गर बेचकर इतना ज्यादा कमा सकती हैं तो क्यों न वह भी अपना खुद का कोई प्रोडक्ट चुनें जो पूरे देश को कनेक्ट करता हो। काफी दिमाग लगाने के बाद वह इस नतीजे पर पहुंचे कि सिर्फ चाय है जो हर जगह कॉमन है। नॉर्थ से साउथ और ईस्ट से वेस्ट हर कोई इसे पीता है।
नौकरी छोड़ लगाया चाय का स्टॉल
इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ी और खुद का कुछ शुरू करने का फैसला किया। हालांकि उनके पास बड़ा निवेश नहीं था, इसलिए उन्होंने बेहद छोटे स्तर पर अहमदाबाद में एक चाय का स्टॉल शुरू किया। प्रफुल्ल जानते थे कि चाय ऐसा पेय है कि जिसे लोग बड़े पसंद से पीते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने सिर्फ 8000 रुपये की पूंजी से अपना कारोबार शुरू किया। एमबीए चायवाला की शुरुआत के बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपने स्टार्टअप का विस्तार किया। बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने कई नई मार्केटिंग रणनीतियां अपनाईं और अपनी अलग पहचान बनाई।
रिश्तेदार मारते थे ताने
शुरुआती दिनों में प्रफुल्ल के इस फैसले से उनके माता-पिता खुश नहीं थे और रिश्तेदार भी अक्सर उन्हें ताने देते थे। लेकिन उन्होंने इन बातों की परवाह किए बिना अपने सपनों को साकार करने के लिए मेहनत जारी रखी। उनकी खास शैली लोगों का ध्यान खींचने लगी। अंग्रेजी बोलते हुए ग्राहकों को चाय परोसने के कारण बड़ी संख्या में लोग उनके चाय स्टॉल की ओर आकर्षित होने लगे।
सोशल मीडिया से मिली ताकत
प्रफुल्ल बिल्लौर को सोशल मीडिया से ताकर मिली है। इंस्टाग्राम और यूट्यूब ने उनके ब्रांड को तेजी से फैलाया। इससे उनकी पहचान नेशनल लेवल पर पहुंची, स्टॉल ब्रांड में बदल गया और युवाओं में एक अलग पहचान बनी बिजनेस मॉडल: सिर्फ चाय नहीं, ब्रांड अनुभव आज MBA Chai Wala सिर्फ एक स्टॉल नहीं है, बल्कि एक ब्रांड एक्सपीरियंस बन चुका है।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण:
धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
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