March 6 History : हुमायूं की पैदाइश, मिले थे गांधी और टैगोर; जानें 6 मार्च का इहितास

Mar 05, 2026 06:35 pm ISTHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
share

March 6 History : 6 मार्च का इतिहास बेहद खास है। आज ही के दिन हुमायूं का जन्म हुआ, गांधी टैगोर की ऐतिहासिक मुलाकात हुई और भारत में कोरोना ने अपनी डरावनी दस्तक दी थी।

March 6 History : हुमायूं की पैदाइश, मिले थे गांधी और टैगोर; जानें 6 मार्च का इहितास

March 6 History : वक्त का दरिया अपनी रफ्तार से खामोशी के साथ बहता रहता है, लेकिन इसकी लहरें अपने पीछे कुछ ऐसे गहरे निशान छोड़ जाती हैं, जिन्हें हम 'इतिहास' कहते हैं। कलैंडर की तारीखें सिर्फ नंबर नहीं होतीं, बल्कि ये वो झरोखे होते हैं जिनसे झांककर हम सदियों पुरानी दुनिया का अक्स देख सकते हैं। भारतीय और विश्व इतिहास की किताब में 6 मार्च का पन्ना भी ऐसी ही कई दिलचस्प, हैरान करने वाली और अहम घटनाओं से भरा हुआ है। यह वो तारीख है जिसने एक तरफ मुगल सल्तनत के वारिस को दुनिया में आते देखा, तो दूसरी तरफ हिन्दुस्तान की सरजमीं पर दो महान विचारकों के ऐतिहासिक मिलन की गवाही दी। कहीं किसी देश ने गुलामी की बेड़ियों को तोड़ा, तो कहीं खेल के मैदान में एक नई दास्तान का आगाज हुआ। आइए, आज के इस खास सफर में मुड़कर देखते हैं 6 मार्च की वो अहम घटनाएं, जिन्होंने हमारी दुनिया और सियासत को एक नई शक्ल दी।

हुमायूं का हुआ था जन्म (1508)

तारीख थी 6 मार्च 1508, जब अफगानिस्तान के काबुल में नसीरुद्दीन मुहम्मद हुमायूं का जन्म हुआ था। भारत में मुगल साम्राज्य की नींव रखने वाले बाबर के इस सबसे बड़े बेटे की जिंदगी कभी भी फूलों की सेज नहीं रही। 'हुमायूं' नाम का मतलब भले ही 'खुशकिस्मत' होता है, लेकिन उनकी जिंदगी बगावत, जंग और दर बदर भटकने की कहानियों से भरी रही। शेरशाह सूरी से हारने के बाद उन्हें सालों तक अपनी ही सल्तनत से दूर रहना पड़ा, लेकिन उनके जज्बे ने हार नहीं मानी और उन्होंने दोबारा दिल्ली के तख्त पर अपना परचम लहराया।

सूरत की संधि और मराठा साम्राज्य में अंग्रेजों की सेंध (1775)

हिन्दुस्तान की तारीख में 1775 का साल मराठा साम्राज्य के लिए एक बड़े तूफान का इशारा था। आज ही के दिन रघुनाथ राव और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच 'सूरत की संधि' पर हस्ताक्षर किए गए थे। सत्ता की लालच में की गई इस संधि ने अंग्रेजों को भारतीय सियासत और खासकर मराठाओं के आपसी मामलों में सीधे दखलंदाजी करने का मौका दे दिया। इसी संधि की वजह से आगे चलकर प्रथम आंग्ल मराठा युद्ध का बिगुल बजा, जिसने भारत के मुस्तकबिल को काफी हद तक बदल दिया।

दुनिया के सबसे मशहूर फुटबॉल क्लब का आगाज (1902)

खेलों की दुनिया, खासकर फुटबॉल के दीवानों के लिए 6 मार्च का दिन किसी त्योहार से कम नहीं है। साल 1902 में आज ही के दिन स्पेन के अंदर 'मैड्रिड क्लब' की बुनियाद रखी गई थी। वक्त के साथ यह क्लब 'रियल मैड्रिड' के नाम से दुनिया भर में मशहूर हुआ। आज रियल मैड्रिड सिर्फ एक क्लब नहीं, बल्कि फुटबॉल की दुनिया का एक ऐसा चमकता हुआ सितारा है, जिसके करोड़ों चाहने वाले हर मुल्क में मौजूद हैं।

शांति निकेतन में दो फकीरों का ऐतिहासिक मिलन (1915)

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और हमारे सांस्कृतिक इतिहास में 6 मार्च 1915 की तारीख सुनहरे हर्फों में दर्ज है। यह वो दिन था जब पश्चिम बंगाल के शांति निकेतन में महात्मा गांधी और गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की पहली बार मुलाकात हुई थी। ये दोनों ही शख्सियतें भारत की आत्मा थीं। भले ही कई मुद्दों पर इन दोनों के विचार एक दूसरे से जुदा रहे हों, लेकिन आपसी सम्मान और मुल्क की फिक्र ने इन्हें हमेशा जोड़े रखा। इसी दौर में दोनों ने एक दूसरे को 'महात्मा' और 'गुरुदेव' की उपाधि से नवाजा था।

मिस्र के रहस्य और अफ्रीका की आजादी (1924 और 1957)

राजा टुट का मकबरा (1924): मिस्र के पिरामिडों और फराओ का इतिहास हमेशा से इंसानों को हैरत में डालता रहा है। 6 मार्च 1924 को ही मिस्र में राजा तूतनखामेन (King Tut) के ममी मकबरे का आधिकारिक तौर पर उद्घाटन किया गया था। इस खोज ने दुनिया भर के पुरातत्वविदों को चौंका दिया था।

घाना बना एक आजाद मुल्क (1957): 6 मार्च 1957 का दिन अफ्रीकी महाद्वीप के लिए एक नई सुबह लेकर आया। प्रधानमंत्री क्वामे न्क्रूमाह की रहनुमाई में घाना ने ब्रिटिश हुकूमत की गुलामी को उतार फेंका और एक स्वतंत्र राष्ट्र बनकर उभरा। यह बाकी अफ्रीकी देशों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा थी।

अन्य घटनाएं

सियासी घमासान (1991): भारत की राजनीति में 6 मार्च 1991 को एक बड़ा भूचाल आया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद देश को एक बार फिर से मध्यावधि चुनावों का सामना करना पड़ा था।

मिग 23 की आखिरी उड़ान (2009): भारतीय वायुसेना के आसमान के सिकंदर कहे जाने वाले मिग 23 (MiG 23) लड़ाकू विमान ने तीन दशकों तक देश की सरहदों की हिफाजत करने के बाद 6 मार्च 2009 को अपनी अंतिम उड़ान भरी और हमेशा के लिए रिटायर हो गया।

कुछ अहम चेहरे (2015, 2018): साल 2015 में आज ही के दिन बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और मशहूर राजनेता राम सुंदर दास ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। वहीं, 6 मार्च 2018 को कॉनराड संगमा ने मेघालय के 12वें मुख्यमंत्री के रूप में अपने नए सफर का आगाज किया।

कोरोना की वो डरावनी दस्तक (2020): 6 मार्च 2020 की तारीख शायद ही कोई हिंदुस्तानी कभी भूल पाए। यह वो दिन था जब भारत में कोरोना वायरस (COVID 19) ने अपने पांव पसारने शुरू किए थे। इसी दिन देश में 30 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी, और इसके बाद जो हुआ, वह अपने आप में एक खौफनाक इतिहास बन चुका है।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

और पढ़ें
करियर सेक्शन में लेटेस्ट एजुकेशन न्यूज़, सरकारी जॉब , एग्जाम , एडमिशन और Board Results 2026 ( UP Board Result 2026, MP Board Result 2026, CBSE 2026 Result) देखें और Live Hindustan App डाउनलोड करके सभी अपडेट सबसे पहले पाएं।