मार्च 2026 में स्कूल कॉलेज रहेंगे कई दिन बंद, होली से महावीर जयंती तक छुट्टियों की भरमार; देखें लिस्ट

Feb 27, 2026 06:11 pm ISTHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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मार्च 2026 में होली, ईद उल फितर, राम नवमी और महावीर जयंती जैसे त्योहारों के कारण देशभर में स्कूल और कॉलेज कई दिन बंद रहेंगे। जानिए पूरी छुट्टियों की सूची और जरूरी अपडेट।

मार्च 2026 में स्कूल कॉलेज रहेंगे कई दिन बंद, होली से महावीर जयंती तक छुट्टियों की भरमार; देखें लिस्ट

मार्च 2026 का महीना छात्रों के लिए पढ़ाई के साथ साथ छुट्टियों का भी खास मौका लेकर आ रहा है। इस महीने कई बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक त्योहार पड़ रहे हैं, जिनकी वजह से देशभर के स्कूल और कॉलेज अलग अलग तारीखों पर बंद रहेंगे। हालांकि छुट्टियों की अंतिम घोषणा राज्य सरकारों और संबंधित शिक्षण संस्थानों की अधिसूचना पर निर्भर करेगी, इसलिए हर जगह एक जैसा कैलेंडर नहीं होगा।

त्योहारों की वजह से मार्च में पढ़ाई का शेड्यूल कई बार टूटेगा, जिससे छात्रों को छोटे छोटे ब्रेक मिलेंगे। वहीं कुछ संस्थान परीक्षा या अन्य गतिविधियों के कारण सीमित रूप से खुले भी रह सकते हैं।

देशभर में पड़ने वाली प्रमुख छुट्टियां

  • 4 मार्च, बुधवार - होली

रंगों का यह प्रमुख त्योहार पूरे देश में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन अधिकतर स्कूल और कॉलेज बंद रहते हैं। कई राज्यों में एक दिन पहले होलिका दहन के कारण भी अवकाश दिया जाता है।

  • 21 मार्च, शनिवार - ईद उल फितर (संभावित)

रमजान के समापन पर मनाया जाने वाला यह त्योहार चांद दिखने पर निर्भर करता है, इसलिए इसकी तारीख एक दिन आगे पीछे हो सकती है। इस अवसर पर देश के अधिकांश शिक्षण संस्थानों में छुट्टी रहती है।

  • 26 मार्च, गुरुवार - राम नवमी

भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला यह दिन सार्वजनिक अवकाश होता है। स्कूलों में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं और पढ़ाई बंद रहती है।

  • 31 मार्च, मंगलवार - महावीर जयंती

भगवान महावीर की जयंती पर देशभर में सरकारी अवकाश घोषित रहता है। इस दिन लगभग सभी स्कूल, कॉलेज और कई सरकारी संस्थान बंद रहते हैं।

क्षेत्रीय स्तर पर भी रहेंगी अलग अलग छुट्टियां

मार्च के दौरान कुछ त्योहार विशेष राज्यों में ज्यादा महत्व रखते हैं, इसलिए वहां अतिरिक्त अवकाश दिया जाता है।

  • 3 मार्च - डोल जात्रा, होलिका दहन, याओसांग

पश्चिम बंगाल, मणिपुर और पूर्वोत्तर के कुछ इलाकों में इस दिन त्योहार मनाया जाता है, जिससे स्थानीय संस्थानों में छुट्टी रहती है।

  • 19 मार्च - उगादी, गुड़ी पड़वा, चैत्र नवरात्रि की शुरुआत

आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में नववर्ष के रूप में यह दिन मनाया जाता है। इन राज्यों के स्कूल और कॉलेज बंद रहते हैं।

  • 23 मार्च - शहीद दिवस

कुछ उत्तरी राज्यों में इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं और कई जगह शिक्षण संस्थान बंद रहते हैं या आधे दिन का अवकाश रहता है।

हर राज्य में अलग हो सकता है छुट्टियों का कैलेंडर

शिक्षा बोर्ड, निजी स्कूल और विश्वविद्यालय अपने अपने शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार छुट्टियों में बदलाव कर सकते हैं। कई कॉलेजों में परीक्षाएं चल रही हों तो वहां छुट्टी नहीं भी दी जा सकती। इसलिए छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने स्कूल या कॉलेज से जारी आधिकारिक सूचना जरूर देखें। खासकर ईद उल फितर की तारीख चांद पर निर्भर होने के कारण अंतिम समय में बदल सकती है।

पढ़ाई और त्योहार के बीच संतुलन का महीना

मार्च का महीना हर साल त्योहारों के कारण खास माना जाता है, लेकिन यह शैक्षणिक सत्र का भी अहम समय होता है। कई जगह वार्षिक परीक्षाएं, प्रैक्टिकल और नई कक्षाओं की तैयारी भी इसी दौरान होती है। ऐसे में छुट्टियों के बीच छात्रों को अपनी पढ़ाई की योजना सही तरीके से बनानी होगी ताकि पढ़ाई का नुकसान न हो।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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