IIT में 2 बार फेल, 20 हजार की नौकरी से की शुरुआत; आज दुबई में है करोड़ों का बिजनेस
सोशल मीडिया पर एक शख्स की स्टोरी काफी वायरल हो रही है, जो यह बता रही है कि आईआईटी के बिना भी करोड़ों की कमाई की जा सकती है। दावा किया जा रहा है कि शख्स लगातार 2 बार आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में फेल होने के बावजूद आज दुबई में करोड़ों का बिजनेस कर रहा है।

आईआईटी में दाखिला लेना हर किसी का सपना होता है। कहते हैं कि अगर आईआईटी से पढ़ाई कर ली, तो लाइफ सेट है। हाई सैलरी वाली अच्छी नौकरी होगी, शानदार लाइफस्टाइल होगा। हर साल आईआईटी में दाखिला लेने का सपना कुछ ही लोगों का पूरा हो पाता है और कुछ लोगों का अधूरा रह जाता है। लेकिन सोशल मीडिया पर एक शख्स की स्टोरी काफी वायरल हो रही है, जो यह बता रही है कि आईआईटी के बिना भी करोड़ों की कमाई की जा सकती है। दावा किया जा रहा है कि शख्स लगातार 2 बार आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में फेल होने के बावजूद आज दुबई में करोड़ों का बिजनेस कर रहा है।
शख्स ने सोशल मीडिया पर किया दावा
सोशल मीडिया के एक्स प्लेटफॉर्म पर एक शख्स ने दावा किया है कि वो IIT की परीक्षा में दो बार फेल हुआ था। इतना ही नहीं एक समय ऐसा भी आया, जब उसे लगने लगा था कि अब जिंदगी में कुछ नहीं बचा। शख्स से ने लिखा कि छोटे शहरों में असफलता केवल एक परीक्षा में हार तक सीमित नहीं रहती। वहां लोगों की तुलना, ताने और खामोश नजरें व्यक्ति को अंदर तक तोड़ देती हैं।
सरकारी कॉलेज में लिया दाखिला
उन्होंने लिखा, "छोटे शहरों में आपकी असफलता सबकी नजरों में होती है। लोग आपकी तुलना करते हैं, बिना कुछ कहे आपको जज करते हैं और आपको महसूस होने लगता है कि अब हर कोई आपको अलग नजर से देख रहा है। मैंने यह सब झेला है और इसका दर्द लंबे समय तक अपने अंदर दबाए रखा।" लगातार बढ़ते मानसिक दबाव और आसपास के माहौल से बाहर निकलने के लिए उन्होंने अपना शहर छोड़ने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने दूसरे शहर के एक सरकारी कॉलेज में दाखिला लिया और वहीं से अपने जीवन की नई शुरुआत की।
2 समोसे खाकर होता था गुजारा
शख्स ने सोशल मीडिया पर लिखा कि परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, इसलिए माता-पिता उनकी कॉलेज की पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकते थे। ऐसे में उन्होंने एजुकेशन लोन लिया और खर्च चलाने के लिए स्कूल के बच्चों को गणित पढ़ाना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं कई बार पूरे दिन सिर्फ एक या दो समोसे खाकर गुजारा करना पड़ता था। आज पीछे मुड़कर देखता हूं तो लगता है कि संघर्ष का दौर इंसान को वह सिखा देता है, जो आराम की जिंदगी कभी नहीं सिखा सकती।"
20 हजार की नौकरी
कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें कैंपस प्लेसमेंट के जरिए एक आईटी कंपनी में 20 हजार रुपये महीने की नौकरी मिली। उन्होंने कहा, "मैं इस मौके के लिए आभारी था, लेकिन मन ही मन जानता था कि मुझे हमेशा इसी जगह नहीं रुकना है।"
उन्होंने अपने परिवार का भविष्य बदलने का लक्ष्य तय किया और खुद से एक वादा किया कि अगले कुछ साल सिर्फ अपने करियर पर ध्यान देंगे। उन्होंने पार्टी, शराब, सिगरेट और हर तरह के भटकाव से दूरी बना ली और पूरी मेहनत अपने काम पर लगा दी।
एआई और मशीन लर्निंग खुद से सीखा
ऑफिस के बाद वह रोज शाम को खुद ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) सीखने लगे। उन्होंने बताया कि उनके पास न कोई महंगा कोर्स था, न कोई मेंटर और न ही कोई तय रास्ता। सिर्फ सीखने की जिज्ञासा, इंटरनेट और अपनी जिंदगी बदलने का जुनून था। कुछ समय बाद उन्होंने अपनी कंपनी के एक मैनेजर को उन्हें AI/ML प्रोजेक्ट में मौका देने के लिए राजी कर लिया। उनका कहना है कि यही फैसला उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
बिजनेस लीडरशिप तक पहुंचा सफर
AI प्रोजेक्ट से शुरुआत करने के बाद उनका सफर प्रोडक्ट मैनेजमेंट और फिर बिजनेस लीडरशिप तक पहुंच गया। शख्स के दावे के मुताबिक कुछ वर्षों में वह सबसे कम उम्र के वाइस प्रेसिडेंट (VP) में शामिल हो गए और कंपनी के सबसे बड़े बिजनेस पोर्टफोलियो में से एक की जिम्मेदारी संभालने लगे। उनकी कमाई उन दोस्तों के बराबर पहुंच गई, जिन्होंने उसी साल IIT में दाखिला लिया था, जिस साल वह परीक्षा में असफल हुए थे।
उन्होंने बताया कि इस साल उन्होंने अपने करियर में एक और बड़ा कदम उठाया और नई पेशेवर जिम्मेदारी के लिए दुबई चले गए। उन्होंने लिखा, "जब आप एक बार खुद को फिर से खड़ा करना सीख जाते हैं, तो नई शुरुआत करने से कभी डर नहीं लगता।"
हालांकि, उन्होंने माना कि करियर में मिली इस सफलता की एक कीमत भी चुकानी पड़ी। उन्होंने लिखा कि करियर बनाने की दौड़ में उन्होंने अपनी सेहत और रिश्तों पर उतना ध्यान नहीं दिया, जितना देना चाहिए था।
रिश्ते और सेहत पर पड़ा असर
शख्स ने कहा कि मैंने करियर को बहुत ज्यादा प्राथमिकता दी और स्वास्थ्य और रिश्तों को पीछे छोड़ दिया। सफलता आपको बहुत कुछ देती है, लेकिन अगर आप संतुलन नहीं बना पाते तो यह चुपचाप आपसे बहुत कुछ छीन भी लेती है। अपनी पोस्ट के अंत में उन्होंने जीवन से मिली सबसे बड़ी सीख साझा करते हुए लिखा कि असाधारण सफलता पाने के लिए परफेक्ट शुरुआत जरूरी नहीं होती।
(डिस्क्लेमर: इस कहानी में किए गए सभी दावे और विचार संबंधित व्यक्ति के निजी अनुभव हैं। 'लाइव हिंदुस्तान' वेबसाइट सोशल मीडिया पोस्ट पर किए गए इन दावों की पुष्टि नहीं करती है।)
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण:
धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
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