महाराष्ट्र में थमेगी रफ्तार, ई-चालान के खिलाफ ट्रांसपोर्टर्स का चक्का जाम; क्या स्कूलों पर भी पड़ेगा असर

Mar 05, 2026 05:02 pm ISTHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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महाराष्ट्र में ई चालान के खिलाफ ट्रांसपोर्टर्स ने 5 मार्च की आधी रात से 'चक्का जाम' का ऐलान किया है, जिससे आम जनता और स्कूली बच्चों की परेशानी काफी बढ़ने वाली है।

महाराष्ट्र में थमेगी रफ्तार, ई-चालान के खिलाफ ट्रांसपोर्टर्स का चक्का जाम; क्या स्कूलों पर भी पड़ेगा असर

महाराष्ट्र की तेज तर्रार और कभी न रुकने वाली रफ्तार पर एक बार फिर ब्रेक लगने जा रहा है। अगर आप कल सुबह घर से निकलने वाले हैं या फिर आपका बच्चा स्कूल जाने वाला है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। महाराष्ट्र ट्रांसपोर्ट एक्शन कमेटी (M-TAC) ने सूबे में 5 मार्च, 2026 की आधी रात से अनिश्चितकालीन 'चक्का जाम' यानी राज्यव्यापी हड़ताल का बड़ा ऐलान कर दिया है। यह फैसला तब लिया गया जब बुधवार की शाम महाराष्ट्र के परिवहन आयुक्त कार्यालय में हुई कई दौर की बातचीत पूरी तरह से बेनतीजा रही। सरकार और ट्रांसपोर्ट यूनियनों के बीच कोई बीच का रास्ता नहीं निकल पाया, जिसके बाद यूनियनों ने अपनी गाड़ियां सड़क पर न उतारने का सख्त कदम उठाया है।

आखिर क्यों भड़के हैं ट्रांसपोर्टर्स?

इस पूरी नाराजगी और हड़ताल के केंद्र में है 'ई चालान सिस्टम'। दरअसल, ट्रांसपोर्टरों और ड्राइवरों का साफ तौर पर कहना है कि ई चालान के नाम पर उनके साथ ज्यादती हो रही है। इस व्यवस्था का जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है। हालात ये हैं कि एक ही गलती के लिए ड्राइवरों को कई कई बार भारी भरकम जुर्माना भेजा जा रहा है। ट्रांसपोर्ट यूनियनों का आरोप है कि ट्रैफिक और परिवहन विभाग के अधिकारी ई चालान का खौफ दिखाकर उन्हें परेशान कर रहे हैं। दिन रात मेहनत करके दो पैसे कमाने वाले ड्राइवरों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ इन बेजा जुर्मानों को भरने में जा रहा है। यूनियन की दो टूक मांग है कि इस पूरे ई चालान सिस्टम की फौरन समीक्षा की जाए, खामियों को दूर किया जाए और अब तक जो गलत पेनल्टी लगाई गई हैं, उन्हें सरकार पूरी तरह से माफ करे। जब तक इन मांगों पर कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, गाड़ियां सड़कों पर नहीं दौड़ेंगी।

कौन कौन सी गाड़ियों के पहिए थम जाएंगे?

इस चक्का जाम का असर सिर्फ माल ढुलाई तक सीमित नहीं रहने वाला है। M TAC के इस आह्वान के बाद राज्य भर के ट्रक, टेंपो, टूरिस्ट बसें, प्राइवेट कैब, ऑटो रिक्शा और काली पीली टैक्सियों के पहिए थम जाने की पूरी आशंका है। मुंबई, पुणे, नागपुर जैसे बड़े शहरों में जहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट लाइफलाइन है, वहां आम लोगों को दफ्तर, अस्पताल या रेलवे स्टेशन पहुंचने में भारी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है। बसों और कैब की कमी की वजह से सड़कों पर अफरा तफरी का माहौल बन सकता है।

स्कूली बच्चों और माता पिता की बढ़ी टेंशन

इस हड़ताल ने सबसे ज्यादा टेंशन माता पिता को दे दी है। स्कूल बस ओनर्स एसोसिएशन के एक प्रमुख नेता अनिल गर्ग ने स्थिति साफ करते हुए कहा है कि गुरुवार तक तो स्कूल बसों की सर्विस पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा, लेकिन अगर यह हड़ताल अनिश्चितकालीन चलती रही, तो शुक्रवार (6 मार्च 2026) से पूरे राज्य में स्कूल बसें भी पूरी तरह से बंद हो जाएंगी।

चूंकि स्कूल बसें बंद होने से हजारों बच्चों की सुरक्षा और उनके स्कूल पहुंचने का सिस्टम चरमरा सकता है, इसलिए माता पिता यह सोचकर परेशान हैं कि क्या शुक्रवार को स्कूलों की छुट्टी घोषित कर दी जाएगी? या फिर कोरोना काल की तरह एक बार फिर से ऑनलाइन क्लास का सहारा लिया जाएगा? हालांकि, अभी तक राज्य सरकार या स्कूल प्रशासन की तरफ से स्कूलों को बंद करने या छुट्टी घोषित करने को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अधिकारियों का कहना है कि हालात पर नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर सही समय पर फैसला लिया जाएगा।

कहां कहां होगा विरोध प्रदर्शन?

M-TAC के प्रतिनिधियों ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। आधी रात से गाड़ियां खड़ी करने के साथ साथ, गुरुवार दिन में मुंबई के ऐतिहासिक आजाद मैदान में विशाल प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा, राज्य भर के अलग अलग आरटीओ (RTO) कार्यालयों के बाहर भी ट्रांसपोर्टर्स धरना देंगे। प्रदर्शनकारियों ने यह चेतावनी भी दी है कि वे अपनी गाड़ियों को शहर के प्रमुख चौराहों और 'हॉटस्पॉट्स' पर लाकर खड़ा कर सकते हैं, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो सकती है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार ट्रांसपोर्टरों की इन मांगों के आगे झुकती है या आम जनता को अगले कुछ दिनों तक इस भारी परेशानी के बीच अपना रास्ता खुद तलाशना होगा।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

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हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

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