लखनऊ यूनिवर्सिटी में दाखिले की महाजंग, LLB और LLM की एक-एक सीट पर भारी मारामारी

लखनऊ यूनिवर्सिटी के पीजी कोर्सेज में 19862 आवेदन आए हैं, जिसमें एलएलबी और एलएलएम में एक सीट पर भारी मुकाबला है।

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पढ़ाई का नया सत्र शुरू होने वाला है और इसके साथ ही शुरू हो गई है देश की नामी यूनिवर्सिटीज में दाखिले की जद्दोजहद। बात अगर लखनऊ यूनिवर्सिटी (एलयू) की करें, तो शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नौजवानों में एक गजब का क्रेज देखने को मिल रहा है। पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) कोर्सेज में एडमिशन के लिए जिस तरह से फार्म भरे गए हैं, उसने साफ कर दिया है कि इस बार मुकाबला बेहद कड़ा और दिलचस्प होने वाला है। कुल 19,862 उम्मीदवारों ने एलयू में अपनी किस्मत आजमाने के लिए आवेदन किया है। ये आंकड़ा सिर्फ एक नंबर नहीं है, बल्कि ये बताता है कि तालीम हासिल करने के लिए आज का युवा कितना संजीदा है और यूनिवर्सिटी की साख छात्रों के बीच कितनी मजबूत है।

वकालत की पढ़ाई फुल क्रेज

सबसे ज्यादा कशमकश अगर कहीं है, तो वो है कानून की पढ़ाई यानी विधि संकाय में। वकालत के पेशे को लेकर युवाओं का रुझान किस कदर बढ़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एलएलबी (तीन वर्षीय) की महज 320 सीटों के लिए 6073 छात्र-छात्राओं ने अपनी दावेदारी पेश की है। जरा सोचिए, एक कुर्सी और उस पर बैठने की चाह रखने वाले 19 उम्मीदवार!

वहीं, एलएलएम की राह तो और भी ज्यादा मुश्किल नजर आ रही है। यहां 60 सीटों के लिए 2,941 फार्म जमा हुए हैं। इसका सीधा सा मतलब ये है कि एलएलएम की एक सीट के लिए 49 दावेदारों के बीच कांटे की टक्कर होगी। जो सबसे बेहतरीन होगा, वही मेरिट में अपनी जगह पक्की कर पाएगा।

राजनीति विज्ञान ने मारी बाजी

कला संकाय (आर्ट्स फैकल्टी) की तरफ रुख करें, तो यहां राजनीति विज्ञान (पॉलिटिकल साइंस) ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा है। यह विषय छात्र-छात्राओं की पहली पसंद बनकर उभरा है। एम.ए. राजनीति विज्ञान में कला संकाय के सबसे ज्यादा 969 आवेदन आए हैं। इसके बाद अंग्रेजी साहित्य का नंबर आता है, जिसमें 529 फार्म भरे गए हैं। इंसानी दिमाग और समाज को समझने की चाह रखने वाले भी कम नहीं हैं। एम.ए. मनोविज्ञान (साइकोलॉजी) के लिए 507, अर्थशास्त्र (इकोनॉमिक्स) के लिए 439 और समाजशास्त्र (सोशियोलॉजी) के लिए 432 युवाओं ने आवेदन किया है। वहीं, मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास पढ़ने के लिए 340 और मास्टर ऑफ सोशल वर्क (एमएसडब्ल्यू) में 320 छात्र-छात्राओं ने अपनी गहरी दिलचस्पी दिखाई है।

साइंस में जूलॉजी और कॉर्पोरेट के लिए मैनेजमेंट की धूम

विज्ञान संकाय (साइंस फैकल्टी) के आंकड़े भी काफी कुछ बयां कर रहे हैं। यहां एम.एससी. जूलॉजी (प्राणी विज्ञान) का दबदबा साफ नजर आ रहा है, जिसके लिए 978 आवेदन आए हैं—जो विज्ञान के किसी भी विषय में सर्वोच्च है। इसके अलावा, एम.एससी. बायोटेक्नोलॉजी में 500, एम.एससी. केमिस्ट्री (रसायन विज्ञान) में 419, बॉटनी (वनस्पति विज्ञान) में 359, मैथमेटिक्स (गणित) में 313, फोरेंसिक साइंस में 313, माइक्रोबायोलॉजी में 281 और एम.एससी. फिजिक्स (भौतिक विज्ञान) में 259 उम्मीदवारों ने दाखिले की ख्वाहिश जाहिर की है।

आज के इस तेजी से बढ़ते कॉर्पोरेट दौर में मैनेजमेंट की पढ़ाई का अपना ही एक अलग जलवा है। युवाओं को बड़े-बड़े दफ्तरों और बिजनेस की दुनिया खूब लुभा रही है। यही वजह है कि एमबीए और एमबीए एमटीटीएम जैसे कोर्सेज को मिलाकर कुल 2,905 फार्म भरे गए हैं। वहीं अगर हम पारंपरिक कॉमर्स की बात करें, तो वाणिज्य संकाय में एम.कॉम के लिए 985 आवेदन आए हैं।

क्या कहते हैं कुलपति और क्या है आगे का रास्ता?

लखनऊ यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर जय प्रकाश सैनी इस शानदार रिस्पॉन्स से काफी खुश नजर आ रहे हैं। उनका मानना है कि इतनी भारी तादाद में आवेदनों का आना यूनिवर्सिटी की बढ़ती साख और अकादमिक उत्कृष्टता का जीता-जागता सबूत है। उन्होंने सभी छात्रों को भरोसा दिलाया है कि प्रशासन पूरी प्रवेश प्रक्रिया को एकदम पारदर्शी, सुव्यवस्थित और पूरी तरह से मेरिट (मेधा) के आधार पर कराने के लिए तैयार है। केंद्रीय प्रवेश प्रकोष्ठ ने भी इसके लिए अपनी कमर कस ली है।

दूसरी तरफ, एलयू में ग्रेजुएशन (स्नातक) की प्रवेश परीक्षाएं रविवार को खत्म हो चुकी हैं। आखिरी दिन बीएससी (गणित) और बीसीए की परीक्षा मुख्य और न्यू कैंपस में शांतिपूर्ण तरीके से निपट गई। अब इन छात्र-छात्राओं को बस अपनी आंसर-की (उत्तर कुंजी) और नतीजों का बेसब्री से इंतजार है। इसके तुरंत बाद काउंसलिंग का दौर शुरू होगा। हालांकि, कुछ पाठ्यक्रमों की काउंसलिंग प्रक्रिया पहले से ही जारी है।

Himanshu Tiwari

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शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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