लखनऊ में मदरसा बोर्ड परीक्षाओं की शुरुआत, सीसीटीवी निगरानी और पांच टीमों की सख्त नजर
लखनऊ में मदरसा बोर्ड की परीक्षा आज से शुरू हो रही है, वहीं यूपी बोर्ड परीक्षा से पहले 121 केन्द्रों की व्यवस्थाएं जांचने के लिए पांच टीमों को मैदान में उतारा गया है।

लखनऊ में परीक्षा का माहौल एक बार फिर गर्म है। कहीं मदरसा बोर्ड की वार्षिक परीक्षा शुरू हो रही है तो कहीं यूपी बोर्ड परीक्षा की तैयारियों को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। सीसीटीवी कैमरों की निगरानी, पांच अलग-अलग जांच टीमें और केन्द्रों पर बुनियादी सुविधाओं की सख्त पड़ताल के बीच हजारों छात्र-छात्राएं परीक्षा देने जा रहे हैं।
लखनऊ में आज से मदरसा बोर्ड की परीक्षा
उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड की वार्षिक परीक्षा आज यानी 9 फरवरी से शुरू हो रही है। यह परीक्षा 14 फरवरी तक चलेगी और पूरी तरह सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में आयोजित की जाएगी। लखनऊ जिले में इसके लिए कुल छह परीक्षा केन्द्र बनाए गए हैं, जहां हजारों छात्र अपनी किस्मत आजमाएंगे।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी पवन कुमार सिंह के अनुसार, लखनऊ में कुल 48 मदरसों के 2105 छात्र-छात्राएं इस परीक्षा के लिए पंजीकृत हैं। परीक्षा को पारदर्शी और नकल मुक्त बनाने के लिए हर केन्द्र पर कैमरों से निगरानी की व्यवस्था की गई है, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो।
इन मदरसों को बनाया गया परीक्षा केन्द्र
मदरसा बोर्ड परीक्षा के लिए जिन संस्थानों को केन्द्र बनाया गया है, उनमें केजीएमयू चौराहे पर स्थित मदरसा सुल्तानुल मदारिस, मदरसा अलफिरदौस रहमानी सहित अन्य प्रमुख मदरसे शामिल हैं। इन केन्द्रों पर परीक्षा संचालन से लेकर निगरानी तक की जिम्मेदारी तय अधिकारियों को सौंपी गई है। प्रशासन का साफ कहना है कि परीक्षा के दौरान अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और किसी भी तरह की शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई होगी।
यूपी बोर्ड परीक्षा केन्द्रों की तैयारी भी जोरों पर
मदरसा बोर्ड परीक्षा के साथ-साथ यूपी बोर्ड परीक्षा को लेकर भी लखनऊ में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। बोर्ड परीक्षा से पहले केन्द्रों की बुनियादी सुविधाओं की जांच के लिए पांच विशेष टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें सोमवार से जिले के हर परीक्षा केन्द्र का दौरा करेंगी। इन टीमों का काम सिर्फ औपचारिक निरीक्षण नहीं होगा, बल्कि हर छोटी-बड़ी व्यवस्था को मौके पर जाकर जांचा जाएगा। अगर किसी भी तरह की कमी पाई गई, तो उसकी जिम्मेदारी सीधे केन्द्र व्यवस्थापक की मानी जाएगी।
क्या-क्या जांचेंगी निरीक्षण टीमें
निरीक्षण के दौरान टीमें परीक्षार्थियों के बैठने के लिए बनाए गए कक्षों की स्थिति देखेंगी। इसके साथ ही कक्षों में पर्याप्त रोशनी है या नहीं, पीने के पानी की व्यवस्था ठीक है या नहीं, शौचालय साफ और उपयोग लायक हैं या नहीं, इन सभी बिंदुओं पर ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा स्ट्रांग रूम की स्थिति, वहां रखी चार अलमारियां और सीसीटीवी कैमरों का भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा। प्रशासन का मकसद है कि परीक्षा के दिन किसी भी छात्र को असुविधा न हो और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो।
121 परीक्षा केन्द्र, एक लाख से ज्यादा परीक्षार्थी
जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार ने बताया कि लखनऊ जिले में आदर्श कारागार समेत कुल 121 परीक्षा केन्द्र बनाए गए हैं। यूपी बोर्ड परीक्षा में करीब 1 लाख 3 हजार 800 छात्र-छात्राएं शामिल होंगे, जो जिले के अलग-अलग केन्द्रों पर परीक्षा देंगे। इतनी बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों को देखते हुए प्रशासन किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहता। इसी वजह से पहले ही निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है।
कक्ष निरीक्षक और शिक्षकों की तैनाती
परीक्षा को सुचारु रूप से कराने के लिए कक्ष निरीक्षकों की सूची तैयार की जा रही है। डीआईओएस कार्यालय इस काम में जुटा हुआ है। इसके अलावा ड्यूटी के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी से करीब दो हजार प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों की मांग की गई है, ताकि परीक्षा के दौरान पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध रहे। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षक और कक्ष निरीक्षक दोनों की जिम्मेदारी होगी कि परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और नियमों के अनुसार हो।
प्रशासन की सख्ती से बढ़ा भरोसा
मदरसा बोर्ड और यूपी बोर्ड, दोनों परीक्षाओं को लेकर प्रशासन की सख्ती साफ नजर आ रही है। सीसीटीवी निगरानी, बार-बार निरीक्षण और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने से अभिभावकों और छात्रों में भी भरोसा बढ़ा है कि परीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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