गिरफ्तारी से बचने के लिए खान सर ने ले लिया अपने ज्ञान का सहारा, जिस विषय को पढ़ाया, वही आ रहा काम

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Khan Sir News : फायरिंग केस में मशहूर कोचिंग गुरु खान सर पुलिस के सामने सरेंडर नहीं करेंगे बल्कि अदालत से अग्रिम जमानत की मांग करेंगे। खान सर के वकील ने इस बात की जानकारी दी है।

गिरफ्तारी से बचने के लिए खान सर ने ले लिया अपने ज्ञान का सहारा, जिस विषय को पढ़ाया, वही आ रहा काम

Khan Sir News : पटना वाले जिस खान सर के पढ़ाने के अनूठे और मजेदार अंदाज का पूरा हिंदुस्तान मुरीद है आज वही खान सर कानून के गहरे पचड़े में बुरी तरह से फंसते नजर आ रहे हैं। कभी क्लासरूम में खड़े होकर अपने छात्रों को कानून और पुलिस के दांव-पेंच सिखाने वाले खान सर को आज खुद उसी कानूनी ज्ञान की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ गई है। खान ग्लोबल स्टडीज सेंटर के बाहर हुई फायरिंग और बवाल के बाद उन पर हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट जैसी संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई है। पुलिस की दबिश और गिरफ्तारी की लटकती तलवार के बीच यह अहम खबर सामने आई है कि खान सर अपने वकील के जरिए एंटीसिपेटरी बेल (अग्रिम जमानत) की अर्जी दायर करने की तैयारी कर रहे हैं।

खुद का पढ़ाया ज्ञान ही आ रहा है काम

इस पूरे बवाल के बीच सोशल मीडिया पर एक बड़ा ही अजीब इत्तेफाक देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां पटना पुलिस खान सर की सरगर्मी से तलाश में जुटी थी, तो वहीं दूसरी तरफ उनका एक पुराना वीडियो इंटरनेट पर आग की तरह फैलने लगा। इस वायरल वीडियो में खान सर बड़े ही इत्मीनान से अपने छात्रों को यह समझा रहे हैं कि अगर कभी एफआईआर दर्ज हो जाए और गिरफ्तारी की नौबत आ जाए, तो उससे कैसे बचा जा सकता है। वह कहते सुने जा सकते हैं, "जैसे ही आपको भनक लगे कि पुलिस आपको पकड़ने वाली है, तो सीधे जज साहब के पास जाइए और एंटीसिपेटरी बेल यानी अग्रिम जमानत मांग लीजिए।"

उन्होंने अपने उसी चिर-परिचित और ठेठ अंदाज में छात्रों को समझाया था कि जज के सामने जाकर अपनी बात कैसे रखनी चाहिए। वीडियो में वो बता रहे हैं, "जज साहब से कहिए कि मैं आपके सामने हाजिर हूं, मेरे अंदर कोई चोर नहीं छिपा है। मैं दो गवाह भी लाया हूं। आप बस मुझे जमानत दे दीजिए, मैं अपना केस लड़ लूंगा पर मुझे जेल न भेजें।" आज किस्मत का पहिया कुछ यूं घूमा है कि खान सर को खुद पुलिस की पकड़ से बचने के लिए उसी अग्रिम जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा है।

आखिर कहां से शुरू हुआ ये पूरा बवाल?

इस पूरी कानूनी उलझन और हंगामे की जड़ में पटना के कोचिंग संस्थानों की आपसी खींचतान और वर्चस्व की लड़ाई छिपी है। दरअसल, जब से बिहार पुलिस सिपाही भर्ती का रिजल्ट सामने आया है, तब से ही खान सर के संस्थान और पटना की ही एक दूसरी मशहूर कोचिंग 'ज्ञान बिंदु एकेडमी' के बीच विवाद सुलग रहा था। यह जुबानी जंग तब एक खौफनाक मोड़ ले बैठी जब मंगलवार की देर रात खान सर के कोचिंग सेंटर पर कुछ लोगों ने अचानक धावा बोल दिया, जहां जमकर तोड़फोड़ की गई और पथराव हुआ। इस घटना के बाद पटना पुलिस फौरन हरकत में आई और ज्ञान बिंदु एकेडमी के डायरेक्टर रौशन आनंद समेत तीन लोगों को हिरासत में ले लिया।

फिर आया कहानी में बड़ा ट्विस्ट

सबको लगा कि शायद अब मामला यहीं शांत हो जाएगा, लेकिन अगले ही दिन कहानी पूरी तरह पलट गई। ज्ञान बिंदु की तरफ से उसी रात का एक सीसीटीवी फुटेज जारी कर दिया गया। इस वीडियो ने पूरे केस का रुख ही मोड़ कर रख दिया। फुटेज में साफ नजर आ रहा था कि बवाल के दौरान खान सर के दो बॉडीगार्ड हवा में ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहे हैं। शुरुआत में 2 जून को तो पुलिस किसी भी तरह की गोलीबारी होने से साफ इनकार कर रही थी। लेकिन 4 जून को जैसे ही यह फायरिंग का वीडियो पब्लिक डोमेन में आया, पुलिस को अपना स्टैंड बदलना पड़ा।

इसके बाद दूसरी एफआईआर दर्ज हुई, जिसमें बकायदा फायरिंग की बात कबूली गई और खान सर के साथ-साथ उनके दोनों गार्ड्स को भी आरोपी बना दिया गया। वीडियो की सच्चाई परखने के बाद पुलिस ने दोनों गार्ड्स को तो फौरन धर दबोचा, और इसी के साथ खान सर पर भी जेल जाने का खतरा मंडराने लगा।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

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हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

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