गिरफ्तारी से कैसे बचा जाए? खान सर ने पहले ही दे दिया था ज्ञान, पुराना VIDEO वायरल
पटना के मशहूर खान सर पर गिरफ्तारी का खतरा मंडरा रहा है और ऐसे में उनका अग्रिम जमानत से जुड़ा एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

पटना के जिस खान सर के पढ़ाने के अनूठे अंदाज का पूरा देश मुरीद है, आज वही खान सर कानून के पचड़े में बुरी तरह फंसते नजर आ रहे हैं। खान ग्लोबल स्टडीज सेंटर के बाहर हुई हालिया गोलीबारी ने पूरे पटना के कोचिंग हब में तहलका मचा कर रख दिया है। एक तरफ जहां पुलिस ने उनके खिलाफ हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है, तो वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर एक पुराना वीडियो खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में खान सर अपने चिर-परिचित अंदाज में छात्रों को यह समझा रहे हैं कि अगर कभी गिरफ्तारी की नौबत आ जाए, तो उससे बचने के लिए अग्रिम जमानत कैसे ली जाती है। इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि जो ज्ञान वह कभी क्लासरूम में दूसरों को बांट रहे थे, आज शायद उन्हें खुद उसी कानूनी दांव-पेंच की सबसे ज्यादा जरूरत आन पड़ी है।
वायरल वीडियो में क्या है वो खास कानूनी ज्ञान?
वायरल हो रहे वीडियो की बात करें तो खान सर बहुत ही इत्मीनान से कानूनी प्रक्रिया को समझा रहे हैं। वह कहते सुने जा सकते हैं, "जैसे ही आपको भनक लगे कि आपके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई है और अब गिरफ्तारी तय है, तो पुलिस के पास जाने की भूल कभी मत कीजिए। सीधे जज साहब के पास जाइए और अपने वकील के जरिए एंटीसिपेटरी बेल यानी अग्रिम जमानत की मांग कर लीजिए।"
उन्होंने आगे बहुत ही ठेठ और मजेदार अंदाज में समझाया है कि जज के सामने अपनी बात कैसे रखनी चाहिए। वीडियो में वह बता रहे हैं, "देखिए जज साहब, मैं आपके सामने खुद हाजिर हूं। मेरे अंदर किसी तरह का कोई चोर नहीं छिपा है। मैं अपने साथ दो गवाह भी लाया हूं जो मेरी गारंटी ले रहे हैं। आप बस हमें जमानत दे दीजिए, हम अपना केस लड़ लेंगे, मगर हमें जेल न भेजें।" कानून की मानें तो अगर जज इस तरह की दलील पर अग्रिम जमानत दे देते हैं, तो आरोपी गिरफ्तारी से फौरी तौर पर बच जाता है।
आखिर क्यों पैदा हुई गिरफ्तारी की नौबत?
इस पूरे बवाल की जड़ में है कोचिंग संस्थानों की आपसी खींचतान और वर्चस्व की लड़ाई। मामला तब गरमाया जब बिहार पुलिस सिपाही भर्ती का रिजल्ट सामने आया। इसके बाद खान सर के संस्थान का पटना की ही एक दूसरी मशहूर कोचिंग 'ज्ञान बिंदु एकेडमी' के साथ सीधा टकराव शुरू हो गया। बात सिर्फ जुबानी जंग तक सीमित नहीं रही। मंगलवार की देर रात हालात तब बेकाबू हो गए जब खान सर के कोचिंग सेंटर पर अचानक कुछ लोगों ने धावा बोल दिया।
इस घटना के तुरंत बाद पुलिस हरकत में आई और ज्ञान बिंदु एकेडमी के डायरेक्टर रौशन आनंद समेत तीन लोगों को हिरासत में ले लिया। लगा कि शायद मामला यहीं शांत हो जाएगा, लेकिन अगले ही दिन कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट आ गया। ज्ञान बिंदु की तरफ से उसी रात का एक सीसीटीवी वीडियो जारी किया गया, जिसने पूरे केस का रुख ही मोड़ दिया। इस वीडियो में साफ नजर आ रहा था कि खान सर के दो बॉडीगार्ड हवा में ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहे हैं। वीडियो की सत्यता जांचने के बाद पुलिस ने फौरन दोनों गार्ड्स को धर दबोचा। अब उसी एफआईआर में खान सर को भी लपेटे में ले लिया गया है और उन पर जेल जाने का खतरा मंडरा रहा है।
शुरुआत में जब बवाल हुआ था, तब 2 जून को पुलिस ने किसी भी तरह की गोलीबारी होने की बात से साफ इनकार किया था। लेकिन जैसे ही 4 जून को फायरिंग का वीडियो पब्लिक डोमेन में आया, पुलिस को अपना स्टैंड बदलना पड़ा। दूसरी एफआईआर में बकायदा फायरिंग की पुष्टि की गई और खान सर के साथ-साथ उनके दोनों गार्ड्स को आरोपी बनाया गया। फिलहाल पूरे पटना में भारी तनाव का माहौल है। पुलिस ने आज दोपहर एक आधिकारिक बयान जारी कर छात्रों से खास अपील की है। पुलिस का कहना है कि यह दो कोचिंग सेंटर्स के बीच प्रतिस्पर्धा और आपसी रंजिश का मामला है, इसलिए कोई भी छात्र किसी के बहकावे में आकर अपनी पढ़ाई और करियर दांव पर न लगाए। सूत्रों की मानें तो पुलिस इस वक्त बेहद सतर्कता बरत रही है। खान सर की गिरफ्तारी किसी भी वक्त हो सकती है, लेकिन पुलिस जानबूझकर शाम ढलने का इंतजार कर रही है। इसके पीछे की रणनीति यह है कि शाम तक सभी कोचिंग सेंटरों में छात्रों की छुट्टी हो जाती है। ऐसे में जब स्टूडेंट्स अपने घर या हॉस्टल लौट जाएंगे, तो गिरफ्तारी के दौरान किसी भी तरह के हंगामे या प्रदर्शन की गुंजाइश न के बराबर रह जाएगी।
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Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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