कौन हैं श्रेय पारिख? 14 साल की उम्र जीती दुनिया की सबसे बड़ी स्पेलिंग प्रतियोगिता

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

14 वर्षीय भारतीय मूल के अमेरिकी छात्र श्रेय पारिख ने 2026 स्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बी का खिताब जीत लिया है। आइए जानते हैं श्रेय कैसे इतनी कम उम्र में ऐसे कामयाब बने।

कौन हैं श्रेय पारिख? 14 साल की उम्र जीती दुनिया की सबसे बड़ी स्पेलिंग प्रतियोगिता

दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित स्पेलिंग प्रतियोगिताओं में गिनी जाने वाली स्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बी 2026 में इस बार भारतीय मूल के 14 वर्षीय छात्र श्रेय पारिख ने इतिहास रच दिया। कैलिफोर्निया में रहने वाले श्रेय ने तीन दिनों तक चली कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद खिताब अपने नाम किया। उनकी जीत इसलिए भी खास है क्योंकि यह सफलता उन्हें लगातार मेहनत और कई सालों की तैयारी के बाद मिली है।

छोटी सी उम्र में बड़े कमाल करने वाले श्रेय पारिख के लिए यह पहली बार नहीं था जब वह नेशनल स्पेलिंग बी के मंच पर पहुंचे हों। यह उनका तीसरा राष्ट्रीय मुकाबला था। इससे पहले वर्ष 2022 में वह 89वें स्थान पर रहे थे। इसके बाद 2024 में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया। इन नतीजों ने उन्हें और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। श्रेय का कहना है कि उन्होंने पहले की तुलना में कहीं ज्यादा समय शब्दों को समझने, उनके पैटर्न सीखने और अभ्यास करने में लगाया। यही अतिरिक्त मेहनत उन्हें तीसरे स्थान से सीधे चैंपियन बनने तक ले गई।

रोमांचक स्पेल-ऑफ में दर्ज की जीत

फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। आखिरी दौर में श्रेय का सामना 12 वर्षीय इशान गुप्ता से हुआ। दोनों प्रतिभागियों को 90 सेकंड के भीतर जितने संभव हो उतने शब्द सही स्पेल करने थे। इस तेज रफ्तार स्पेल-ऑफ में श्रेय ने कुल 32 शब्द सही लिखे। आखिर में "कैशॉ" (Cashaw) नामक शब्द उनके लिए जीत का शब्द साबित हुआ। यह एक प्रकार का कद्दू होता है। इस शब्द को सही स्पेल करते ही श्रेय राष्ट्रीय चैंपियन बन गए।

बचपन से ही था शब्दों से खास लगाव

श्रेय की मां ख्याति मेहता बताती हैं कि उनके बेटे का शब्दों के प्रति लगाव बचपन से ही अलग था। जब भी वह कोई नया या कठिन शब्द पढ़ते थे तो तुरंत उसका अर्थ जानने के लिए शब्दकोश देखने लगते थे। आम बच्चों की तरह वह किसी अनजान शब्द को नजरअंदाज नहीं करते थे। शब्द का मतलब समझना और उसे याद रखना उनकी आदत बन गई थी। यही आदत आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुई।

तैयारी का अनोखा तरीका

श्रेय ने अपनी तैयारी के लिए तकनीक का भी सहारा लिया। उन्होंने टाइपिंग आधारित अध्ययन कार्यक्रमों का उपयोग किया, जिससे वे कम समय में बड़ी संख्या में शब्दों का अभ्यास कर सके। दिलचस्प बात यह रही कि यही अभ्यास फाइनल के स्पेल-ऑफ दौर में भी उनके काम आया। क्योंकि वे पहले से ही तेज गति से शब्द टाइप करने की प्रैक्टिस कर चुके थे, इसलिए अंतिम मुकाबला उन्हें किसी अभ्यास सत्र जैसा महसूस हुआ।

कैसे रखते हैं खुद को शांत?

इतनी बड़ी प्रतियोगिता में दबाव होना स्वाभाविक है, लेकिन श्रेय ने इसे संभालने का अपना तरीका विकसित किया है। वह मुकाबले से पहले खुद को याद दिलाते हैं कि उन्होंने हजारों घंटों की तैयारी की है और वही अभ्यास उन्हें सफलता दिला सकता है। फाइनल के दौरान भी उनका पूरा ध्यान केवल शब्दों पर था। उन्होंने जीत या हार के बारे में सोचने के बजाय हर शब्द को सही और तेज गति से स्पेल करने पर फोकस किया।

कई भाषाएं जानते हैं श्रेय

श्रेय अंग्रेजी के साथ-साथ गुजराती भी बोलते हैं और एक अन्य भाषा का भी थोड़ा ज्ञान रखते हैं। पढ़ाई और स्पेलिंग प्रतियोगिताओं की तैयारी के बीच संतुलन बनाए रखना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने समय प्रबंधन के जरिए दोनों चीजों को साथ लेकर चलने की कोशिश की।

परिवार से मिली सबसे बड़ी प्रेरणा

जब श्रेय से पूछा गया कि उनका आदर्श कौन है, तो उन्होंने सबसे पहले अपने परिवार का नाम लिया। उनके अनुसार परिवार की मेहनत, अनुशासन और लगातार समर्थन ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।उन्होंने सोहम सुखातंकर का भी जिक्र किया, जिन्होंने उन्हें बेहतर अध्ययन तकनीकें सीखने और तैयारी को अधिक प्रभावी बनाने में मदद की।

एआई का भी लिया सीमित इस्तेमाल

आज के दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई का उपयोग शिक्षा में तेजी से बढ़ रहा है। श्रेय ने भी अपनी तैयारी में एआई का सीमित इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि वह कभी-कभी एआई टूल्स की मदद से शब्दों की सूची को व्यवस्थित करते थे ताकि अध्ययन करना आसान हो सके। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी अधिकांश तैयारी पूरी तरह खुद की मेहनत और नियमित अभ्यास पर आधारित थी।

माता-पिता ने क्या कहा?

श्रेय की जीत के बाद उनके माता-पिता बेहद भावुक नजर आए। उनकी मां ने इसे कई वर्षों की मेहनत का परिणाम बताया। वहीं उनके पिता गौरव पारिख ने कहा कि उन्होंने हमेशा अपने बेटे को परिणाम के बजाय तैयारी पर ध्यान देने की सीख दी। उनका मानना है कि यदि कोई व्यक्ति सबसे बेहतर तैयारी करता है तो अच्छे परिणाम अपने आप मिल जाते हैं। श्रेय की सफलता इस सोच का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है।

युवा छात्रों को क्या सलाह देते हैं श्रेय?

राष्ट्रीय चैंपियन बनने के बाद भी श्रेय का संदेश बेहद सरल है। उनका कहना है कि किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए सबसे जरूरी चीज कोशिश करना है। इंसान केवल अपनी मेहनत को नियंत्रित कर सकता है, नतीजों को नहीं। यही सोच उन्हें लगातार आगे बढ़ाती रही और आखिरकार उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी स्पेलिंग प्रतियोगिताओं में से एक का खिताब अपने नाम कर लिया।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

और पढ़ें
करियर सेक्शन में लेटेस्ट एजुकेशन न्यूज़, सरकारी जॉब , एग्जाम , एडमिशन , CBSE 12th Result 2026 Live के साथ सभी Board Results 2026 देखें। सबसे पहले अपडेट पाने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।