MBBS-BDS छात्रों की बल्ले-बल्ले, कर्नाटक के मेडिकल कॉलेजों में नहीं बढ़ेगी फीस, सरकारी से प्राइवेट तक देखें लिस्ट
कर्नाटक सरकार ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए मेडिकल और डेंटल कोर्सेज की फीस न बढ़ाने का फैसला किया है।

कर्नाटक में डॉक्टर बनने का ख्वाब देख रहे स्टूडेंट्स और उनके माता-पिता के लिए एक बहुत ही राहत भरी खबर आई है। राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए मेडिकल और डेंटल कोर्सेज की फीस में कोई भी बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री और सरकार के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स के जरिए इस फैसले की जानकारी साझा की गई है। आइए सिलसिलेवार ढंग से समझते हैं कि इस बार फीस का पूरा ढांचा क्या रहने वाला है और सरकार ने छात्रों के हक में और क्या बड़े कदम उठाए हैं।
समझिए फीस का पूरा गणित
सरकार के इस फैसले के बाद राज्य में पुरानी फीस संरचना ही पूरी तरह लागू रहेगी। इसका मतलब है कि सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में सीटों के हिसाब से फीस पहले जैसी ही बनी रहेगी। नीचे दिए गए चार्ट से आप एमबीबीएस और बीडीएस की फीस को आसानी से समझ सकते हैं।
| कोर्स और सीट का कोटा | सालाना ट्यूशन फीस (रुपये में) |
|---|---|
| सरकारी मेडिकल कॉलेज (एमबीबीएस) | ₹5,000 |
| प्राइवेट कॉलेज - सरकारी कोटा (एमबीबीएस) | ₹1.41 लाख |
| प्राइवेट कॉलेज - प्राइवेट कोटा (एमबीबीएस) | ₹11.88 लाख |
| सरकारी डेंटल कॉलेज (बीडीएस) | ₹40,000 |
| प्राइवेट डेंटल कॉलेज - सरकारी कोटा (बीडीएस) | ₹83,358 |
| प्राइवेट डेंटल कॉलेज - प्राइवेट कोटा (बीडीएस) | ₹7.32 लाख |
मुफ्त बस यात्रा योजना
शिक्षा के सफर को आसान बनाने के लिए कर्नाटक सरकार सिर्फ फीस पर ही नहीं रुकी है। सरकार ने छात्रों के लिए 'मुफ्त बस यात्रा योजना' को भी पूरी ताकत से लागू किया है। यह स्कीम प्राइमरी स्कूल के बच्चों से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) तक के सभी छात्र-छात्राओं के लिए है। अक्सर देखा गया है कि ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले बच्चे सिर्फ इसलिए स्कूल या कॉलेज छोड़ देते हैं क्योंकि उनके माता-पिता हर महीने आने-जाने का किराया नहीं दे पाते। इस योजना से न सिर्फ ड्रॉपआउट रेट में भारी कमी आएगी, बल्कि कॉलेजों में बच्चों की रेगुलर हाजिरी भी बढ़ेगी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस शानदार प्रोग्राम पर राज्य सरकार हर साल 286.9 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। इसके साथ ही, सफर के दौरान छात्रों की सुरक्षा का ख्याल रखते हुए 15 करोड़ रुपये का अलग से दुर्घटना बीमा कवरेज भी तय किया गया है। इस योजना का लाभ अब तक करीब 19,792 छात्र उठा चुके हैं।
15000 शिक्षकों की होगी बंपर भर्ती
राज्य में शिक्षा के स्तर को सुधारने और स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भी एक बहुत बड़ा ऐलान किया गया है। सरकारी स्कूलों में खाली पड़े पदों को भरने के लिए सरकार अगले 100 दिनों के भीतर 15,000 शिक्षकों की बंपर बहाली करने जा रही है। यह उन सरकारी स्कूलों के लिए एक नई जिंदगी जैसा होगा जहां स्टाफ की कमी की वजह से पढ़ाई का नुकसान हो रहा था। इसके अलावा, आज का दौर पूरी तरह डिजिटल हो चुका है, इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने बच्चों को कंप्यूटर और आधुनिक तकनीक से जोड़ने का पूरा प्लान तैयार किया है। इसके तहत 2,500 आईटी (IT) शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी, जो सीधे तौर पर स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा और डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देंगे। कर्नाटक सरकार के इन फैसलों से साफ है कि वह राज्य के हर बच्चे को बिना किसी आर्थिक कंगाली और रुकावट के बेहतर शिक्षा देने के रास्ते पर आगे बढ़ रही है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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