Success Story: पिता ने घर पर खुद बेटियों को पढ़ाया फिजिक्स-केमिस्ट्री, अब NEET पास कर दोनों बहनें बनेंगी डॉक्टर
NEET Success Story: दिल्ली के रोहिणी में रहने वाले कैलाश चौधरी ने खुद शिक्षक बनकर अपनी बेटियों प्रज्ञा और अंबिका को पढ़ाया। दोनों ने नीट पास कर अब डॉक्टर बनने जा रही हैं।

NEET Success Story: कहते हैं कि अगर मन में दृढ़ संकल्प हो और परिवार का सही मार्गदर्शन मिले, तो बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है। इस बात को सच साबित कर दिखाया है दिल्ली के रोहिणी में रहने वाले कैलाश चौधरी और उनकी दो होनहार बेटियों—प्रज्ञा और अंबिका ने। कैलाश चौधरी ने महंगे कोचिंग संस्थानों पर निर्भर रहने के बजाय खुद अपनी बेटियों के शिक्षक बनने का फैसला किया और उन्हें नीट (NEET) जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी कराई। पिता के मार्गदर्शन और बेटियों की मेहनत का नतीजा यह रहा कि आज दोनों बहनें डॉक्टर बनने की राह पर अग्रसर हैं।
बड़ी बेटी प्रज्ञा की शानदार सफलता
कैलाश चौधरी की बड़ी बेटी प्रज्ञा ने नीट परीक्षा 2024 में 668 अंक हासिल किए और ऑल इंडिया 13,000वीं रैंक प्राप्त की। अपनी इस शानदार रैंक के दम पर प्रज्ञा ने बिहार के नालंदा जिले के पावापुरी स्थित प्रसिद्ध भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान (VIMS) में एमबीबीएस (MBBS) कोर्स में दाखिला लिया। प्रज्ञा की इस सफलता ने छोटी बहन अंबिका के लिए भी प्रेरणा का काम किया।
री-नीट में छोटी बेटी अंबिका ने लहराया परचम
बड़ी बहन की राह पर चलते हुए छोटी बेटी अंबिका ने भी हार नहीं मानी। नीट परीक्षा से जुड़े उतार-चढ़ाव और री-नीट (Re-NEET) की चुनौतियों के बावजूद अंबिका ने अपनी एकाग्रता बनाए रखी। उसने री-नीट परीक्षा में 576 अंक हासिल किए और 19,000वीं ऑल इंडिया रैंक लाकर नीट परीक्षा में परचम लहरा दिया। दो-दो बेटियों का डॉक्टर बनना पूरे परिवार और आसपास के लोगों के लिए अत्यंत गर्व का क्षण बन गया है।
पिता ने खुद पढ़ाई फिजिक्स और केमिस्ट्री
इस सफलता के पीछे उनके पिता कैलाश चौधरी का समर्पण सबसे खास रहा। उन्होंने स्वयं अपनी बेटियों को फिजिक्स और केमिस्ट्री जैसे कठिन विषयों की बारीकियां सिखाईं। पिता के संघर्ष और पढ़ाई के प्रति उनके जुनून ने दोनों बेटियों को हर परिस्थिति में आगे बढ़ने का हौसला दिया। बच्चों को जब भी पढ़ाई में कोई परेशानी आती, पिता एक दोस्त और शिक्षक की तरह उनकी समस्या का समाधान करते थे।
पैतृक और मातृक गांव की बनेंगी पहली महिला डॉक्टर
यह सफलता केवल एक परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने एक ऐतिहासिक कीर्तिमान भी रचा है। कैलाश चौधरी मूल रूप से बिहार के दरभंगा जिले के रहने वाले हैं, जबकि उनकी पत्नी का मायका मधेपुरा जिले में है। स्वतंत्रता के बाद से लेकर आज तक इन दोनों गांवों से कोई भी महिला डॉक्टर नहीं बनी थी। प्रज्ञा और अंबिका अपने ददिहाल और ननिहाल दोनों घरों की पहली महिला डॉक्टर बनने जा रही हैं।


