IIT बॉम्बे, दिल्ली और मद्रास में कंप्यूटर साइंस के लिए चाहिए कितनी रैंक, JoSAA पहले राउंड में क्या रही कॉट-ऑफ
JoSAA ने पहले राउंड का सीट अलॉटमेंट और ओपनिंग- क्लोजिंग रैंक जारी कर दी है। आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली और आईआईटी मद्रास में कंप्यूटर साइंस सबसे ज्यादा डिमांड वाला कोर्स बना हुआ है।

देश के लाखों इंजीनियरिंग अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। संयुक्त सीट आवंटन प्राधिकरण (JoSAA) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पहले राउंड का सीट आवंटन परिणाम और शुरुआती तथा अंतिम रैंक जारी कर दी है। इसके साथ ही यह भी साफ हो गया है कि देश के सबसे प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में दाखिले के लिए इस साल कितनी कड़ी प्रतिस्पर्धा रही। पहले राउंड के आंकड़े बताते हैं कि आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली और आईआईटी मद्रास में कंप्यूटर साइंस अब भी छात्रों की पहली पसंद बनी हुई है। शीर्ष रैंक प्राप्त करने वाले अधिकांश विद्यार्थियों ने इसी शाखा को चुना है।
आईआईटी बॉम्बे में कंप्यूटर साइंस के लिए सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धा
आईआईटी बॉम्बे एक बार फिर सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बना रहा। यहां कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग की अंतिम रैंक केवल 65 रही। इसका मतलब है कि देश के शीर्ष 65 रैंक वाले विद्यार्थियों को ही इस पाठ्यक्रम में प्रवेश मिल सका। इसके बाद विद्युत इंजीनियरिंग की अंतिम रैंक 400 और विद्युत इंजीनियरिंग द्वैध डिग्री की अंतिम रैंक 844 दर्ज की गई। अर्थशास्त्र, गणित और इंजीनियरिंग भौतिकी जैसे पाठ्यक्रमों की भी अच्छी मांग देखने को मिली। मैकेनिकल इंजीनियरिंग में 1852 तक रैंक वाले विद्यार्थियों को मौका मिला, जबकि सिविल इंजीनियरिंग में 4376 तक रैंक पाने वाले अभ्यर्थियों को प्रवेश मिला।
आईआईटी दिल्ली में भी कंप्यूटर साइंस सबसे ज्यादा पसंद की गई शाखा
आईआईटी दिल्ली में इस साल भी कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला कोर्स रहा। इस कोर्स में दाखिले की आखिरी रैंक 123 रही। इसके बाद गणित और कंप्यूटिंग कोर्स की आखिरी रैंक 320 दर्ज की गई। वहीं इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में 593 रैंक तक के छात्रों को प्रवेश मिला। एनर्जी इंजीनियरिंग, प्रोडक्शन एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग, केमिकल इंजीनियरिंग और बायोटेक्नोलॉजी जैसे कोर्सों में भी छात्रों ने अच्छी दिलचस्पी दिखाई। वहीं डिजाइन और केमिस्ट्री जैसे कार्यक्रमों में अपेक्षाकृत अधिक रैंक वाले छात्रों को भी दाखिला पाने का मौका मिला।
आईआईटी मद्रास में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बढ़ा आकर्षण
आईआईटी मद्रास के आंकड़े इस साल छात्रों की बदलती पसंद को दिखाते हैं। यहां कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की आखिरी रैंक 149 रही। इसके बाद सबसे ज्यादा पसंद किया गया कोर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स रहा। इस कोर्स की आखिरी रैंक 226 रही, जिससे साफ है कि नई तकनीकों से जुड़े विषय तेजी से छात्रों की पहली पसंद बन रहे हैं। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की आखिरी रैंक 742 और मैकेनिकल इंजीनियरिंग की आखिरी रैंक 2445 रही। इसके अलावा एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, इंजीनियरिंग फिजिक्स और कंप्यूटेशनल इंजीनियरिंग जैसे कोर्सों की भी अच्छी मांग रही।
ओपनिंग और क्लोजिंग रैंक क्यों होती हैं जरूरी?
जोसा की ओर से जारी ओपनिंग और क्लोजिंग रैंक छात्रों के लिए काफी अहम होती हैं। ओपनिंग रैंक उस छात्र की रैंक होती है जिसे किसी कोर्स या संस्थान में सबसे पहले सीट मिली हो। वहीं क्लोजिंग रैंक उस आखिरी छात्र की रैंक होती है जिसे उस कोर्स में प्रवेश मिला। इन आंकड़ों की मदद से छात्र यह समझ सकते हैं कि उनकी रैंक के हिसाब से किस कॉलेज या कोर्स में दाखिला मिलने की कितनी संभावना है। इससे आगे के राउंड में सही विकल्प भरने में भी मदद मिलती है।
सीट मिलने के बाद क्या करना होगा?
जिन छात्रों को पहले राउंड में सीट मिली है, उन्हें तय समय के भीतर ऑनलाइन रिपोर्टिंग पूरी करनी होगी। इसके तहत सीट स्वीकार करनी होगी, जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। सीट स्वीकार करते समय छात्रों को तीन विकल्प मिलेंगे।
- फ्रीज: मौजूदा सीट स्वीकार करके आगे की काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर हो जाना।
- फ्लोट: मिली हुई सीट सुरक्षित रखना और बेहतर विकल्प मिलने का इंतजार करना।
- स्लाइड: उसी संस्थान में बेहतर शाखा मिलने की संभावना बनाए रखना।
138 संस्थानों में हो रहा है दाखिला
इस साल जोसा के जरिए देश के 138 तकनीकी संस्थानों में प्रवेश दिया जा रहा है। इनमें 23 आईआईटी, 31 एनआईटी, 26 आईआईआईटी, आईआईईएसटी शिबपुर और कई अन्य सरकारी तकनीकी संस्थान शामिल हैं। पहले राउंड की कटऑफ से एक बार फिर साफ हो गया है कि कंप्यूटर साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और गणित से जुड़े कोर्सों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। इन शाखाओं में सीट हासिल करना हर साल और ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
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