JEECUP Result 2026 : यूपी पॉलीटेक्निक में 4 नंबर आने पर भी मिलेगा एडमिशन, 20 जून को रिजल्ट संभव
यूपी पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा का परिणाम 20 जून को जारी हो सकता है, जिसमें मात्र 4 नंबर पाने वाले छात्रों को भी काउंसलिंग के जरिए प्राइवेट कॉलेजों में एडमिशन का मौका मिलेगा।

उत्तर प्रदेश के लाखों युवाओं के लिए एक बेहद जरूरी और बड़ी खबर सामने आई है। संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद (JEECUP) की ओर से आयोजित की गई पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा का परिणाम 20 जून को घोषित किया जा सकता है। अगर आप इस परीक्षा में बैठे हैं और आपको लगता है कि आपका पेपर अच्छा नहीं गया, तो भी आपको निराश होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। इस साल व्यवस्था कुछ ऐसी बनाई गई है कि बहुत कम नंबर लाने वाले छात्र का साल भी बर्बाद नहीं होगा और उसे आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।
सिर्फ 4 नंबर पर भी खुलेगा किस्मत का ताला
परिषद की ओर से तय किए गए नियमों के अनुसार, कुल 400 अंकों की इस प्रवेश परीक्षा में यदि किसी अभ्यर्थी को केवल चार अंक भी मिलते हैं, तो उसे काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल होने का पूरा अवसर दिया जाएगा। हालांकि, यहां एक पेंच जरूर है जिसे समझना जरूरी है। इतने कम नंबर लाने वाले छात्रों को सरकारी या सहायता प्राप्त (एडेड) कॉलेजों में दाखिला नहीं मिल सकेगा। उन्हें सिर्फ प्राइवेट पॉलीटेक्निक कॉलेजों में ही प्रवेश लेने का विकल्प मिलेगा। इस नियम का सीधा फायदा उन छात्रों को होगा जो किसी वजह से परीक्षा में बेहतर स्कोर नहीं कर पाए, लेकिन वे तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं।
परीक्षा में कितने छात्र शामिल हुए?
इस साल पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा को लेकर छात्रों में भारी उत्साह देखने को मिला। आंकड़ों की बात करें तो इस बार कुल 425700 अभ्यर्थियों ने दाखिले के लिए आवेदन फॉर्म भरा था। इसमें से 334322 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए, जबकि बाकी ने परीक्षा छोड़ दी। अब ये तमाम छात्र अपने रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न संस्थानों में इंजीनियरिंग डिप्लोमा और फार्मेसी सहित अलग-अलग पाठ्यक्रमों की करीब 2.71 लाख सीटें मौजूद हैं, जिन पर इन अभ्यर्थियों को मेरिट और काउंसलिंग के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा।
फार्मेसी कोर्स में इस बार भी तगड़ा मुकाबला
हर साल की तरह इस बार भी फार्मेसी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों (डी.फार्मा) में दाखिला पाने के लिए छात्रों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। ग्रुप-ई-एक और ई-दो के तहत आयोजित की गई परीक्षा के लिए कुल 164312 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिसमें से 129977 छात्रों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अगर सीटों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में इस समय लगभग 1800 फार्मेसी संस्थान हैं, जिनमें कुल मिलाकर 119952 सीटें उपलब्ध हैं। आवेदकों और सीटों के इस अनुपात को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि फार्मेसी में एक-एक सीट के लिए छात्रों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।
दूसरी ओर, इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रमों के लिए होने वाली ग्रुप-ए की परीक्षा में भी बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए। इस ग्रुप में कुल 207229 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 167921 छात्रों ने परीक्षा दी थी। संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद के सचिव एसके सिंह ने बताया कि इस वर्ष फार्मेसी संस्थानों के साथ-साथ अन्य डिप्लोमा कोर्सेज में भी दाखिले को लेकर पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा मुकाबला देखने को मिलेगा। इसका मुख्य कारण यह है कि छात्र अब तकनीकी और रोजगारपरक शिक्षा की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।
कब से शुरू होगी काउंसलिंग की प्रक्रिया?
सचिव एसके सिंह के मुताबिक, अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो 20 जून को परीक्षा का परिणाम आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिया जाएगा। रिजल्ट आने के ठीक बाद, जून महीने के आखिरी दिनों में या फिर जुलाई के पहले सप्ताह से काउंसलिंग का दौर शुरू हो जाएगा। काउंसलिंग कई चरणों में आयोजित की जाएगी ताकि सभी योग्य छात्रों को उनकी रैंक के हिसाब से सही कॉलेज और मनपसंद स्ट्रीम मिल सके। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपने सभी जरूरी दस्तावेज जैसे जाति प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र और शैक्षणिक कागजात पहले से ही तैयार रखें ताकि काउंसलिंग के समय किसी भी तरह की भागदौड़ से बचा जा सके।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


