JEE Main में दो बार किया कमाल, ये हैं बीते साल जनवरी-अप्रैल के दोनों सेशन में 100 पर्सेंटाइल लाने वाले टॉपर्स
National Testing Agency द्वारा जारी वर्ष 2025 के आधिकारिक आंकड़ों जनवरी और अप्रैल में होने वाली परीक्षाओं के टॉपर की लिस्ट जारी की है, जिन्होंने दोनों बार 100 पर्सेंटाइल स्कोर किया है।

देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन अब सिर्फ एक परीक्षा नहीं रह गई है, बल्कि यह विद्यार्थियों के लिए रणनीति, धैर्य और लगातार सुधार का खेल बन चुकी है। पिछले वर्ष के आंकड़े बताते हैं कि दो बार परीक्षा देने की सुविधा ने अभ्यर्थियों के सोचने का तरीका ही बदल दिया। अब छात्र एक ही मौके पर सब कुछ दांव पर लगाने के बजाय पहले चरण से सीखते हैं, अपनी गलतियों को सुधारते हैं और दूसरे चरण में बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करते हैं।
National Testing Agency द्वारा जारी वर्ष 2025 के आधिकारिक आंकड़ों ने इस बदलते रुझान को साफ दिखाया। जनवरी चरण में 12,58,136 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। अप्रैल चरण में 9,92,350 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। इनमें से 7,75,383 ऐसे थे जिन्होंने दोनों चरणों में बैठकर अपने अंक सुधारने की कोशिश की। कुल मिलाकर 14,75,103 अलग अलग अभ्यर्थियों ने परीक्षा में भाग लिया। ये संख्या बताती है कि अब विद्यार्थी परीक्षा को एक प्रक्रिया की तरह लेने लगे हैं, न कि एक दिन की किस्मत मानकर।
दो मौके मिलने से कैसे बदली तैयारी की सोच
पहले जब परीक्षा साल में केवल एक बार होती थी, तब विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव बहुत ज्यादा रहता था। एक गलती, एक खराब दिन या थोड़ी घबराहट पूरे साल की मेहनत पर भारी पड़ सकती थी। अब दो चरण होने से छात्रों को यह भरोसा रहता है कि अगर पहला प्रयास उम्मीद के मुताबिक न भी जाए, तो दूसरा मौका उनके पास है।
कोचिंग शिक्षकों के अनुसार, अब विद्यार्थी पहले चरण को अभ्यास की तरह लेते हैं। वे परीक्षा का माहौल समझते हैं, समय प्रबंधन सीखते हैं और फिर दूसरे चरण में ज्यादा आत्मविश्वास के साथ बैठते हैं। यही कारण है कि बड़ी संख्या में छात्र दोनों चरणों में शामिल हुए।
सबसे चौंकाने वाला रिकॉर्ड
वर्ष 2025 में एक ऐसा ट्रेंड सामने आया जिसने सभी को हैरान कर दिया। आमतौर पर जो छात्र पहले ही चरण में 100 प्रतिशतांक हासिल कर लेते हैं, वे दोबारा परीक्षा देने की जरूरत नहीं समझते। लेकिन पिछले साल 14 ऐसे मेधावी छात्र थे जिन्होंने जनवरी में 100 प्रतिशतांक लाने के बाद भी अप्रैल चरण में परीक्षा दी और फिर से 100 प्रतिशतांक हासिल कर लिया। यह केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि निरंतरता और आत्मविश्वास का भी उदाहरण माना गया।
जनवरी और अप्रैल दोनों चरण में 100 प्रतिशतांक लाने वाले विद्यार्थी
1. आयुष सिंघल
2. कुशाग्र गुप्ता
3. दक्ष
4. हर्ष झा
5. रजित गुप्ता
6. श्रेयस लोहिया
7. सक्षम जिंदल
8. सौरव
9. विशद जैन
10. अर्नव सिंह
इन विद्यार्थियों की सफलता इसलिए खास मानी गई क्योंकि उन्होंने पहले से मिली परफेक्ट सफलता के बाद भी खुद को परखा। विशेषज्ञ इसे प्रतिस्पर्धा की बदलती मानसिकता से जोड़ते हैं, जहां छात्र केवल चयन नहीं बल्कि सर्वोच्च रैंक सुनिश्चित करना चाहते हैं।
क्यों बढ़ रहा है दोनों चरण में बैठने का चलन
शिक्षा जगत से जुड़े जानकार बताते हैं कि दो बार परीक्षा देने की व्यवस्था ने छात्रों को जोखिम लेने की आजादी दी है। अब वे पहले चरण में अपेक्षाकृत शांत रहते हैं। उन्हें पता होता है कि अगर कुछ सवाल छूट भी गए तो दूसरा मौका बाकी है। इससे घबराहट कम होती है और प्रदर्शन बेहतर होता है।
इसके अलावा, परीक्षा के बाद मिलने वाला विस्तृत परिणाम छात्रों को अपनी कमजोरियां पहचानने में मदद करता है। कई छात्र पहले चरण के बाद अपने पढ़ने का तरीका बदलते हैं, अभ्यास बढ़ाते हैं और दूसरे चरण में अंक सुधार लेते हैं। यही वजह है कि लाखों छात्रों ने दोनों चरणों में भाग लेना ज्यादा सुरक्षित विकल्प माना।
प्रतियोगिता का स्तर और ज्यादा हुआ सख्त
आंकड़ों से यह भी साफ हुआ कि अब केवल परीक्षा पास करना ही लक्ष्य नहीं रहा। छात्र उच्चतम प्रतिशतांक, बेहतर रैंक और प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। दो चरण होने से प्रतिस्पर्धा भी दो गुना तीखी हो गई है, क्योंकि हर छात्र को खुद को सुधारने का अतिरिक्त मौका मिल रहा है।
शिक्षाविद मानते हैं कि आने वाले वर्षों में यह रुझान और मजबूत होगा। छात्र परीक्षा को एक लंबी दौड़ की तरह लेंगे, जहां निरंतर अभ्यास, मानसिक संतुलन और रणनीतिक तैयारी सबसे बड़ा हथियार बनेंगे।

लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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