JEE Main Result 2026 के नाम पर फर्जी वेबसाइटों का जाल, रिजल्ट देखने से पहले रहें सावधान

Feb 16, 2026 11:44 am ISTHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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JEE Main 2026 का रिजल्ट बस आने ही वाला है। रिजल्ट की जल्दी में एक गलत क्लिक आपकी मेहनत पर भारी पड़ सकता है, इसलिए केवल आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें और किसी भी अनजान लिंक से पूरी तरह दूर रहें।

JEE Main Result 2026 के नाम पर फर्जी वेबसाइटों का जाल, रिजल्ट देखने से पहले रहें सावधान

JEE Main 2026 का रिजल्ट जारी होते के साथ ही छात्रों के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो जाती है। लाखों उम्मीदवार जहां अपने स्कोर देखने की जल्दी में रहते हैं, वहीं साइबर ठग इस मौके का फायदा उठाकर फर्जी वेबसाइटों के जरिए छात्रों को निशाना बनाते हैं। National Testing Agency ने साफ चेतावनी दी है कि केवल आधिकारिक वेबसाइटों पर ही भरोसा करें, क्योंकि कई नकली पोर्टल रिजल्ट जारी होने का झूठा दावा कर रहे हैं।

रिजल्ट के दिन सबसे ज्यादा ट्रैफिक सर्च इंजन पर आता है। छात्र जल्दी में जो पहला लिंक दिखाई देता है, उसी पर क्लिक कर देते हैं। ठग इसी मनोविज्ञान का इस्तेमाल करते हैं। वे असली वेबसाइट जैसी दिखने वाली नकली साइट बना देते हैं, जिनका यूआरएल देखने में लगभग असली जैसा होता है, लेकिन उसमें छोटा सा बदलाव होता है।

फर्जी साइट्स कैसे पहचाने?

कई फर्जी साइट्स में .nic.in की जगह .com या .in का इस्तेमाल किया जाता है, कहीं नाम के बीच अतिरिक्त शब्द जोड़ दिए जाते हैं, तो कहीं स्पेलिंग में मामूली बदलाव कर दिया जाता है। सामान्य नजर से यह फर्क पकड़ना मुश्किल होता है और छात्र आसानी से जाल में फंस जाते हैं।

सिर्फ यहां से चेक करें रिजल्ट

एनटीए ने छात्रों को स्पष्ट किया है कि JEE Main 2026 का रिजल्ट केवल दो आधिकारिक पोर्टल पर ही उपलब्ध होगा। पहला है nta.ac.in और दूसरा jeemain.nta.nic.in। इसके अलावा किसी भी अन्य वेबसाइट पर दिखाया गया रिजल्ट मान्य नहीं माना जाएगा।

फर्जी वेबसाइटों का असली मकसद रिजल्ट दिखाना नहीं, बल्कि छात्रों की संवेदनशील जानकारी हासिल करना होता है। ये साइट्स लॉगिन के नाम पर आवेदन संख्या, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और कई बार बैंक से जुड़ी जानकारी तक मांग लेती हैं। एक बार जानकारी भरते ही डेटा सीधे साइबर अपराधियों तक पहुंच जाता है।

नकली पोर्टल देते हैं लालच

कुछ नकली पोर्टल तो छात्रों को यह लालच भी देते हैं कि वे “रैंक सुधार”, “पक्की सीट”, या “डायरेक्ट एडमिशन” जैसी सेवाएं दिला सकते हैं। ऐसे दावे पूरी तरह धोखाधड़ी होते हैं। JEE Main जैसी राष्ट्रीय परीक्षा में इस तरह का कोई शॉर्टकट संभव ही नहीं होता।

विशेषज्ञों के अनुसार रिजल्ट के समय छात्रों को तीन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। पहला, वेबसाइट का पूरा यूआरएल ध्यान से पढ़ें। दूसरा, किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें, चाहे वह सोशल मीडिया, मैसेज या ईमेल के जरिए आया हो। तीसरा, रिजल्ट देखने के लिए गूगल सर्च के बजाय सीधे आधिकारिक वेबसाइट का पता ब्राउजर में टाइप करें।

13 लाख से ज्यादा उम्मीदवार हुए थे शामिल

इस साल जनवरी सेशन में 13 लाख से ज्यादा उम्मीदवार शामिल हुए थे और बड़ी संख्या में छात्र एक ही समय पर रिजल्ट देखने की कोशिश करेंगे। ऐसे समय सर्वर स्लो होने पर कई छात्र वैकल्पिक लिंक ढूंढने लगते हैं, जो उन्हें फर्जी साइटों तक पहुंचा देता है। यही वह क्षण होता है जब साइबर ठग सक्रिय हो जाते हैं।

एनटीए ने यह भी कहा है कि यदि किसी छात्र को संदिग्ध वेबसाइट दिखाई दे, तो उसकी तुरंत शिकायत करनी चाहिए। जागरूकता ही इस तरह की ऑनलाइन ठगी से बचने का सबसे मजबूत तरीका है।

JEE Main देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में से एक है और इसका स्कोर आगे चलकर देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में प्रवेश का आधार बनता है। ऐसे में रिजल्ट से जुड़ी छोटी सी लापरवाही भी छात्रों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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