जेईई एडवांस्ड AIR 8 ने ठुकराया IIT बॉम्बे का BTech CSE, चुनी वर्ल्ड की नंबर 1 यूनिवर्सिटी
जेईई एडवांस्ड परीक्षा 2026 में ऑल इंडिया रैंक 8 हासिल करने वाले कनिष्क जैन ने आईआईटी बॉम्बे के बीटेक कंप्यूटर साइंस जैसे मलाईदार कोर्स को छोड़कर अमेरिका की प्रतिष्ठित एमआईटी यूनिवर्सिटी जाने का निर्णय लिया है।

जेईई एडवांस्ड टॉपरों का देश के दिग्गज इंजीनियरिंग संस्थान आईआईटी को छोड़ दुनिया की नंबर 1 यूनिवर्सिटी एमआईटी में दाखिला लेने का सिलसिला इस साल भी जारी है। जेईई एडवांस्ड परीक्षा 2026 में ऑल इंडिया रैंक 8 हासिल करने वाले कनिष्क जैन ने आईआईटी बॉम्बे के बीटेक कंप्यूटर साइंस जैसे मलाईदार कोर्स को छोड़कर अमेरिका की प्रतिष्ठित एमआईटी यूनिवर्सिटी जाने का निर्णय लिया है। आपको बता दें कि आईआईटी बॉम्बे का बीटेक कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग डिग्री कोर्स हर साल जेईई एडवांस्ड के टॉपरों की टॉप चॉइस रहता है। देश-विदेश की प्रतिष्ठित आईटी कंपनियों की ओर से मिलने वाले मोटे सैलरी पैकेज इसकी बड़ी वजह रही है। वहीं एमआईटी को क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग में दुनिया की नंबर वन यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त है।
रिपोर्ट के मुताबिक कनिष्क जैन की एमआईटी में प्रवेश की सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। कनिष्क से पहले पिछले साल के जेईई एडवांस्ड में 8वीं रैंक पाने वाले देवेश भैया भी एमआईटी जा चुके हैं। 2024 के टॉपरों में शामिल वेद लाहोटी भी एमआईटी में फुल्ली फंडेड स्कॉलरशिप के लिए आईआईटी बॉम्बे पवई कैंपस में एक साल पढ़ाई करने के बाद इसे छोड़ चुके हैं। बीते कुछ सालों से जेईई एडवांस्ड टॉपरों का एमआईटी रुख करना एक ट्रेंड बन गया है। पिछले वर्षों में चिराग फालोर (जेईई एडवांस्ड 2020 टॉपर) और चित्रांग मुर्डिया (जेईई एडवांस्ड 2014 टॉपर) जैसे छात्रों ने भी इसी तरह के निर्णय लिए थे। मुर्डिया ने एमआईटी जाने से पहले आईआईटी बॉम्बे में एक साल बिताया और बाद में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले से पीएचडी पूरी की।
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रिसर्च के लिए एमआईटी का रुख
आईआईटी बॉम्बे जोन के कनिष्क के जेईई एडवांस्ड में 313 अंक थे। कनिष्क की मां सरिता जैन ने बताया कि कनिष्क फिजिक्स में रिसर्च करना चाहता है और एमआईटी में सेकंड ईयर के बाद ही रिसर्च वर्क शुरू कर दिया जाता है। माता और पिता ऋतुल जैन दोनों ही आईटी सेक्टर्स से जुड़े हैं। परिवार मूलत: कोटा का है।
क्यों छोड़ रहे आईआईटी बॉम्बे
बीते वर्ष अपने फैसले पर वेद लोहाटी ने कहा था, 'मैं आईआईटी बॉम्बे से पूरी तरह संतुष्ट हूं। लेकिन यह रिसर्च में पीछे है। वैश्विक स्तर पर यह शीर्ष 100 में भी नहीं है। इसलिए मैंने एमआईटी में आवेदन किया - और जब यह पास हुआ, तो मैंने इसे स्वीकार कर लिया। बहुत से छात्रों ने एमआईटी में ट्रांसफर लिया है और जब मैंने उनसे पूछा तो उन्होंने कहा कि ट्रांसफर का फैसला वास्तव में सही था।' हालांकि लाहोटी का कहना है कि उनकी अमेरिका में बसने की कोई योजना नहीं है।
2023 में साहिल अख्तर ने जेईई एडवांस्ड 2023 परीक्षा में 99वीं रैंक हासिल की थी। लेकिन साहिल ने आईआईटी की बजाय अमेरिका के प्रतिष्ठित मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में एडमिशन लेने का फैसला किया था। साहिल का कहना था कि वह रिसर्च में अपना करियर बनाना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने एमआईटी को चुना।
निशंक अभंगी ने भी MIT के लिए पैकिंग करने से पहले 2019-2020 आईआईटी बॉम्बे में कुछ समय बिताया। 2022 में रैंक 9 महित गढ़ेवाला ने भी आईआईटी-बी को एक साल के बाद छोड़ दिया।
आपको बता दें कि वर्ल्ड क्यूएस रैंकिंग 2027 में एमआईटी पिछले कई वर्षों से पहले स्थान पर काबिज है। एमआईटी के बाद इंपीरियल कॉलेज लंदन, यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड (यूके), हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (अमेरिका), यूनिवर्सिटी ऑफ कैंम्ब्रिज (यूके), स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (अमेरिका) का नंबर आता है। इसमें आईआईटी बॉम्बे 134वें, आईआईटी दिल्ली 118वें स्थान पर है।


