JEE Advanced 2026: कोटा में 4 साल की मेहनत, आरोही देशपांडे लड़कियों में बनीं टॉपर; कैसे किया ये कमाल

Himanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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JEE Advanced 2026 में लड़कियों में टॉप करने वाली आरोही देशपांडे ने AIR 77 हासिल की है। उन्होंने कोटा में चार साल रहकर पढ़ाई पर फोकस किया हौ शानदार रैंक हासिल की।

JEE Advanced 2026: कोटा में 4 साल की मेहनत, आरोही देशपांडे लड़कियों में बनीं टॉपर; कैसे किया ये कमाल

देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में गिनी जाने वाली जेईई एडवांस्ड 2026 के नतीजों में एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। यह नाम है आरोही देशपांडे का जिन्होंने लड़कियों में पहला स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। पहले जेईई मेन और अब जेईई एडवांस्ड में शानदार प्रदर्शन के साथ उन्होंने साबित कर दिया कि लगातार मेहनत और सही दिशा में की गई तैयारी बड़े लक्ष्य तक पहुंचा सकती है।

जेईई एडवांस्ड 2026 में कैसा रहा प्रदर्शन?

इस साल 17 मई 2026 को आयोजित जेईई एडवांस्ड परीक्षा में कुल 1,87,389 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से 1,79,694 उम्मीदवारों ने दोनों पेपर दिए। परीक्षा में कुल 56,880 अभ्यर्थी सफल रहे, जिनमें 10,107 महिला उम्मीदवार शामिल हैं। आरोही देशपांडे ने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 77 हासिल की। उन्होंने दिल्ली जोन से परीक्षा दी थी और 360 में से 280 अंक प्राप्त किए। लड़कियों में यह सबसे बेहतर प्रदर्शन रहा जिसके चलते वह इस साल की महिला टॉपर बनीं।

जेईई मेन में भी दिखाया था दम

आरोही की सफलता सिर्फ जेईई एडवांस्ड तक सीमित नहीं रही। इससे पहले आयोजित जेईई मेन परीक्षा में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था। जेईई मेन 2026 में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 99 हासिल की थी। लगातार दोनों राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन ने उन्हें देश के मेधावी छात्रों की सूची में शामिल कर दिया है।

महाराष्ट्र से कोटा तक का सफर

आरोही देशपांडे मूल रूप से महाराष्ट्र के पुणे की रहने वाली हैं। हालांकि इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए उन्होंने राजस्थान के कोटा का रुख किया। पिछले चार वर्षों से वह कोटा में रहकर पढ़ाई कर रही थीं। कोटा स्थित एलन संस्थान से उन्होंने अपनी तैयारी की और नियमित अभ्यास, टेस्ट सीरीज तथा रिवीजन के जरिए अपनी तैयारी को मजबूत बनाया। लंबे समय तक लक्ष्य पर फोकस बनाए रखना उनकी सफलता की बड़ी वजह माना जा रहा है।

क्या था उनका स्टडी प्लान?

आरोही ने अपनी सफलता के पीछे की रणनीति साझा करते हुए बताया कि वह नियमित पढ़ाई के साथ छुट्टियों और रविवार का भी पूरा उपयोग करती थीं। यदि किसी अध्याय की पढ़ाई समय पर पूरी नहीं हो पाती थी तो उसके लिए अलग से समय निकालकर उसे पूरा करती थीं। उनका मानना है कि सिर्फ पढ़ लेना काफी नहीं होता, बल्कि बार-बार दोहराना भी उतना ही जरूरी है। इसी वजह से वह नियमित रिवीजन करती थीं और हर विषय के लिए अलग-अलग नोट्स तैयार करती थीं।

कलर कोडिंग तकनीक से बनाई पढ़ाई आसान

आरोही की तैयारी का एक खास हिस्सा उनकी नोट्स बनाने की शैली थी। उन्होंने बताया कि केमिस्ट्री समेत कई विषयों के नोट्स तैयार करते समय वह कलर कोडिंग तकनीक का इस्तेमाल करती थीं। महत्वपूर्ण सूत्र, तथ्य और अवधारणाओं को अलग-अलग रंगों में लिखने से उन्हें रिवीजन के दौरान जरूरी बिंदुओं को जल्दी याद करने में मदद मिलती थी। यह तरीका परीक्षा की तैयारी के दौरान उनके लिए काफी उपयोगी साबित हुआ।

क्लास छूटने पर नहीं होती थीं परेशान

तैयारी के दौरान कई बार बीमारी या अन्य कारणों से कुछ कक्षाएं छूट जाती थीं। लेकिन आरोही ने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। वह छूटी हुई पढ़ाई को व्यवस्थित तरीके से पूरा करती थीं और पिछड़े हुए हिस्से को जल्द से जल्द कवर करने की कोशिश करती थीं। उनके अनुसार किसी एक दिन की परेशानी से घबराने के बजाय लंबे लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखना ज्यादा जरूरी होता है। यही सोच उन्हें लगातार आगे बढ़ाती रही।

मेहनत, अनुशासन और फोकस बना सफलता का मंत्र

आरोही देशपांडे की कहानी उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो आईआईटी में प्रवेश पाने का सपना देखते हैं। चार साल की लगातार मेहनत, समय का सही प्रबंधन, नियमित रिवीजन और अनुशासित दिनचर्या ने उन्हें जेईई एडवांस्ड 2026 की महिला टॉपर बना दिया। उनकी सफलता यह बताती है कि सही रणनीति और निरंतर प्रयास के साथ कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

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हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

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