दिव्यांग कोटे के लिए खुद काट लिया पैर, MBBS एडमिशन की सनक में पार कर दी सारी हदें
जौनपुर से हैरान करने वाली घटना सामने आई है। MBBS में दाखिले की चाह ने एक युवक को खौफनाक रास्ते पर धकेल दिया, जहां उसने दिव्यांग कोटे के लिए खुद का पैर काटकर फर्जी कहानी रची।

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था बल्कि इंसानी सोच को भी झकझोर कर रख दिया है। MBBS में दाखिला पाने की चाह में एक युवक ने दिव्यांग कोटे का फायदा उठाने के लिए खुद का पैर काट लिया । शुरू में इस घटना को बाहरी हमले की साजिश बताया गया, लेकिन पुलिस जांच में सच्चाई सामने आने के बाद पूरा मामला धोखाधड़ी और मानसिक दबाव की दर्दनाक कहानी बन गया।
कौन है आरोपी छात्र और क्या था उसका दावा
24 वर्षीय युवक सूरज भास्कर , जो कि जौनपुर का निवासी है, ने अपने परिवार को बताया कि 18 जनवरी की रात वह अपने निर्माणाधीन मकान में अकेले सो रहा था। सूरज का दावा था कि आधी रात को दो अज्ञात लोगों ने उस पर हमला किया, मारपीट की और बेहोश करने के बाद उसका पैर काट दिया। उसने कहा कि सुबह करीब 5 बजे होश आने पर उसे अपने पैर के कटे होने का पता चला, जिसके बाद वह इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचा।
पुलिस जांच में कैसे टूटी कहानी
सूरज की शिकायत पर पुलिस ने शुरू में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। लेकिन जैसे जैसे जांच आगे बढ़ी, उसकी कहानी में कई विरोधाभास सामने आने लगे। मेडिकल रिपोर्ट में बाहरी संघर्ष के स्पष्ट निशान नहीं मिले। जब पुलिस ने सूरज की करीबी महिला मित्र से पूछताछ की, तो पूरा मामला पलट गया।
गर्लफ्रेंड के बयान से खुला राज
पुलिस को दिए बयान में सूरज की गर्लफ्रेंड ने खुलासा किया कि युवक ने उसे पहले ही अपनी योजना के बारे में बता दिया था। उसने कहा कि सूरज काफी समय से गलत तरीके से दिव्यांग प्रमाण पत्र हासिल करने की कोशिश कर रहा था , ताकि MBBS में दिव्यांग कोटे से दाखिला मिल सके। चूंकि दिव्यांग सर्टिफिकेट के लिए पुलिस रिपोर्ट जरूरी होती है, इसलिए उसने हमले की झूठी कहानी गढ़ी।
मौके से मिले आपत्तिजनक सबूत
जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल के पास से एनेस्थीसिया की शीशियां, सिरिंज और आरी जैसी मशीन बरामद हुईं। इन सबूतों ने साफ कर दिया कि यह कोई बाहरी हमला नहीं बल्कि सुनियोजित कदम था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सूरज ने अपने D फार्मा कोर्स के दौरान मिली मेडिकल जानकारी का इस्तेमाल कर यह कदम उठाया।
मानसिक दबाव और डायरी का खुलासा
परिवार के सदस्यों ने पुलिस को बताया कि सूरज पिछले तीन सालों से MBBS में दाखिले की तैयारी कर रहा था, लेकिन बार बार असफल होने के कारण वह गहरे मानसिक तनाव और अवसाद में चला गया था। पुलिस को उसके पास से एक डायरी भी मिली, जिसमें उसने लिखा था कि वह 2026 में किसी भी कीमत पर MBBS में एडमिशन लेगा। अक्टूबर में वह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) भी कुछ दस्तावेजों के लिए गया था।
आगे क्या कार्रवाई होगी
सिटी सीओ ने बताया कि सूरज फिलहाल अस्पताल में भर्ती है और उसकी हालत स्थिर है। पुलिस अब इस पूरे मामले में कानूनी कार्रवाई कर रही है और यह भी जांच की जा रही है कि घटना में इस्तेमाल हथियार वैध था या नहीं। यह मामला दिव्यांग कोटे के दुरुपयोग और शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते दबाव पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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