
जादवपुर यूनिवर्सिटी में अब किस बात का बवाल, शिक्षकों ने काटा हंगामा; शिक्षा विभाग भी हलकान
जादवपुर यूनिवर्सिटी में वेतन और पेंशन रोकने के आरोपों पर शिक्षकों में नाराजगी सामने आ गई है। जबकि सरकार ने कहा कि पेंशन या सैलरी रोकने का कोई सवाल नहीं।
कोलकाता की प्रतिष्ठित जादवपुर यूनिवर्सिटी एक नए विवाद के बीच आ गई है। शिक्षकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल उच्च शिक्षा विभाग संस्थान नवंबर की सैलरी और दो महीनों की पेंशन रोकने की तैयारी में है। इससे कर्मचारियों और शिक्षकों में गहरी चिंता फैल गई है। इसके मद्देनजर शिक्षा विभाग हलकान है। हालांकि, विभाग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि पेंशन और वेतन रोकने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
दो महीने की पेंशन और एक महीने की सैलरी रोकी गई: जादवपुर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन
जादवपुर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (JUTA) ने सोमवार को दावा किया कि अक्टूबर और नवंबर की पेंशन, साथ ही नवंबर महीने की सैलरी रोक दी गई है। JUTA के महासचिव पार्थ प्रोतिम रॉय के मुताबिक, यूनिवर्सिटी का कोष कर्मचारियों की तनख्वाह और रिटायरमेंट लाभों के भुगतान में लगभग खत्म होने की कगार पर है।
पेंशन फाइलें DPPG को भेजने से बढ़ी चिंता
JUTA ने आरोप लगाया कि हाईयर एजुकेशन डिपार्टमेंट ने हाल ही में एक आदेश जारी कर विश्वविद्यालय से पेंशन मंज़ूरी का अधिकार लेकर इसे डायरेक्टरेट ऑफ पेंशन, प्रोविडेंट फंड एंड ग्रुप इंश्योरेंस (DPPG) को सौंप दिया है। JUTA का कहना है कि विश्वविद्यालयों के पास दस्तावेज़ सरकारी दफ्तरों जितनी सुव्यवस्थित हालत में नहीं होते, जिससे पेंशन प्रॉसेसिंग में देरी होना लगभग तय है।
क्या अगले महीने मिलेगी पेंशन?
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि कई शिक्षक यह सोचकर परेशान हैं कि उन्हें अगले महीने पेंशन मिलेगी या नहीं। साथ ही HRMS जैसी नई इंटीग्रेटेड सिस्टम को लागू करने को लेकर भी आशंका जताई जा रही है कि इससे भी वेतन मंजूरी विश्वविद्यालय से छिन सकती है।
यूनिवर्सिटी के एग्जीक्यूटिव काउंसिल पर भी उठे सवाल
रॉय ने आरोप लगाया कि उन्होंने कई बार अपनी चिंताएं यूनिवर्सिटी को सौंपीं, लेकिन एग्जीक्यूटिव काउंसिल (EC) ने इस मुद्दे पर चर्चा तक नहीं की। उनका कहना है कि EC में मौजूद कुछ सदस्य “सरकार के प्रतिनिधि” बनकर विभाग के पक्ष में खड़े हैं।
वेतन-पेंशन रोके जाने का कोई सवाल नहीं: शिक्षा अधिकारी
दूसरी तरफ, राज्य के एक वरिष्ठ उच्च शिक्षा अधिकारी ने JUTA के सभी आरोपों को आधारहीन बताया। अधिकारी ने कहा कि कुछ संबंधित कामों को नई केंद्रीकृत प्रणाली में ट्रांसफर करने के कारण कुछ प्रक्रियाएं शेड्यूल से पीछे चली गईं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी का हक रोका जाएगा। सरकार के मुताबिक, शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की पेंशन, रिटायरमेंट लाभ और सैलरी समय पर दी जाएंगी।





