2 बार प्रीलिम्स में फेल, तीसरे में सिर्फ 14 नंबर से चूकीं... चौथी बार में गोरखपुर की इशिता ने कैसे फहराया UPSC में परचम?
गोरखपुर की इशिता शर्मा ने लगातार नाकामियों के बावजूद हार नहीं मानी और अपने चौथे अटेंप्ट में यूपीएससी 2025 में 26वीं रैंक हासिल करके आईएएस बनने का ख्वाब पूरा किया।

कहते हैं कि मंजिलें उन्हें नहीं मिलतीं जिनके ख्वाब बड़े होते हैं बल्कि कामयाबी उनके कदम चूमती है जो अपनी जिद पर अड़े होते हैं। यूपीएससी (UPSC) का सफर भी कुछ ऐसा ही है जहां सिर्फ पढ़ाई का नहीं, बल्कि आपके हौसले और जज्बे का भी कड़ा इम्तिहान होता है। आज हम आपको एक ऐसी ही सच्ची कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने साबित कर दिया कि अगर इरादा पक्का हो, तो नाकामियां भी कामयाबी का रास्ता बन जाती हैं। गोरखपुर की रहने वाली इशिता शर्मा ने जब 12वीं क्लास टॉप की थी, तो पूरे भरोसे के साथ ऐलान किया था कि वो एक दिन आईएएस (IAS) अफसर जरूर बनेंगी। ये जवानी का कोई जोश या हवा-हवाई बात नहीं थी, बल्कि एक ऐसा पक्का इरादा था जिसने उन्हें कभी रुकने नहीं दिया। और अब, यूपीएससी 2025 के नतीजों में ऑल इंडिया 26वीं रैंक (AIR 26) हासिल करके उन्होंने अपना वो बचपन का वादा आखिरकार हकीकत में बदल दिया है।
हार न मानने की असली मिसाल
ये सफर इशिता के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था। कामयाबी का ये स्वाद उन्हें अपने चौथे अटेंप्ट में जाकर चखने को मिला है। सोचिए उस इंसान के मन पर क्या गुजरती होगी, जो लगातार दो बार प्रीलिम्स भी क्लियर न कर पाए। पहले दो अटेंप्ट में शुरुआती नाकामी मिलने के बाद एक पल को उनके मन में भी शक पैदा होने लगा था कि क्या वो सच में इस कठिन इम्तिहान के काबिल भी हैं या नहीं? लेकिन उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया। तीसरा अटेंप्ट तो और भी ज्यादा रुलाने वाला था। वो इंटरव्यू राउंड तक पहुंचीं, लेकिन फाइनल लिस्ट में अपनी जगह बनाने से सिर्फ 14 नंबरों से चूक गईं। एकदम पास आकर मंजिल का छिन जाना सबसे ज्यादा तकलीफ देता है। ज्यादातर लोग इस मोड़ पर आकर टूट जाते हैं और मैदान छोड़ देते हैं, लेकिन इशिता ने अपनी इस नाकामी को कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना, रणनीति में बदलाव किए और पहले से कहीं ज्यादा मजबूती के साथ वापसी की।
परिवार बना सबसे बड़ी ताकत
इस मुश्किल और थका देने वाले सफर में उनका परिवार एक मजबूत चट्टान की तरह उनके साथ खड़ा रहा। इशिता एक बेहद आम मिडिल क्लास फैमिली से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता डी.के. शर्मा एक बैंक मैनेजर हैं और मां अर्चना शर्मा एक हाउसवाइफ। उनके माता-पिता ने कभी भी अपने सपनों का बोझ बेटी पर नहीं लादा, बल्कि हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। उनके बड़े भाई ने भी उनकी तैयारी में बहुत मदद की। जब भी इशिता निराश होती थीं, घरवाले उन्हें याद दिलाते थे कि एक रिजल्ट उनकी काबिलियत तय नहीं कर सकता।
बड़े कोचिंग हब को छोड़कर घर से की तैयारी
पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो इशिता शुरू से ही एक बेहद होनहार छात्रा रही हैं। गोरखपुर के सरस्वती बालिका विद्यालय से स्कूलिंग करने के बाद, उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकॉम और एमकॉम की डिग्री हासिल की। सबसे खास बात ये है कि डीयू जैसी जगह से पढ़ने के बावजूद, यूपीएससी की तैयारी के लिए उन्होंने दिल्ली के किसी बड़े कोचिंग हब की तरफ भागने के बजाय अपने घर गोरखपुर से ही रहकर पढ़ाई करना बेहतर समझा। उन्होंने सेल्फ-स्टडी को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। उनका मानना है कि सिर्फ टाइमटेबल पूरा करने के लिए घंटों तक किताबें खोलकर बैठने से कोई फायदा नहीं होता, असली चीज है कॉन्सेप्ट्स का क्लियर होना। अपनी इसी शानदार रणनीति की बदौलत उन्होंने अपने पहले ही अटेंप्ट में NET-JRF का एग्जाम भी निकाल लिया था। इससे उन्हें यकीन हो गया था कि 'कॉमर्स' पर उनकी पकड़ बहुत अच्छी है और इसीलिए उन्होंने यूपीएससी में भी इसी को अपना ऑप्शनल सब्जेक्ट चुना।
इंटरव्यू में पूछे गए तीखे सवाल
चौथे अटेंप्ट के इंटरव्यू के दौरान बोर्ड ने उनसे उनके बैकग्राउंड और शहर से जुड़े कई घुमावदार सवाल पूछे। उनसे बैंकिंग सेक्टर की चुनौतियां, जीएसटी (GST), नई एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020), और गोरखपुर के इतिहास को लेकर काफी चर्चा की गई। इसके अलावा, उन पर ये भी सवाल दागे गए कि एक अफसर के तौर पर वो नेताओं के दबाव के बीच ईमानदारी कैसे बनाए रखेंगी। इशिता ने हर सवाल का जवाब पूरे कॉन्फिडेंस और एक सधे हुए अफसर वाले अंदाज में दिया।
लड़कियों के लिए खास पैगाम
इंडियन मास्टरमाइंड में छपी खबर के मुताबिक, एक आईएएस अफसर के तौर पर इशिता शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव लाना चाहती हैं। उनका मानना है कि सही शिक्षा से ही समाज की तस्वीर बदली जा सकती है। इसके अलावा, लड़कियों के लिए उनका एक बहुत ही साफ और मजबूत पैगाम है कि हर लड़की को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना चाहिए। उनका कहना है कि जब आप खुद कमाती हैं, तभी आप अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेने के काबिल बन पाती हैं।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


