जिस बीमारी में सिकुड़ने लगता है इंसानी दिमाग, उसे मात देकर लखनऊ की आरुषि ने ISC बोर्ड 12वीं में लाए 91.5% नंबर

Himanshu Tiwari हिन्दुस्तान टाइम्स, राजीव मलिक, लखनऊ
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लखनऊ की आरुषि कपूर ने इडियोपैथिक इंट्राक्रैनियल हाइपरटेंशन जैसी गंभीर और दर्दनाक न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जूझते हुए भी आईएससी 12वीं की परीक्षा में 91.5% अंक हासिल किया है।

जिस बीमारी में सिकुड़ने लगता है इंसानी दिमाग, उसे मात देकर लखनऊ की आरुषि ने ISC बोर्ड 12वीं में लाए 91.5% नंबर

कहते हैं कि अगर इंसान ठान ले, तो कोई भी मुश्किल उसका रास्ता नहीं रोक सकती। ऐसी ही एक बेहद प्रेरणादायक कहानी है लखनऊ की रहने वाली आरुषि कपूर की है। 12वीं (ISC) की इस छात्रा ने साबित कर दिया है कि इरादों में जान हो, तो बड़ी से बड़ी बीमारी भी आपके सपनों के आगे घुटने टेक देती है। इडियोपैथिक इंट्राक्रैनियल हाइपरटेंशन (IIH) जैसी एक दुर्लभ और बेहद दर्दनाक न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जूझने के बावजूद, आरुषि ने बोर्ड परीक्षाओं में 91.5% नंबर हासिल करके हर किसी को हैरान कर दिया है। आइए जानते हैं आरुषि की सफलता की कहानी के बारे में...

आरुषि लखनऊ के मशहूर सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल की छात्रा हैं। जिस उम्र में बच्चे सिर्फ अपनी पढ़ाई, करियर और दोस्तों के साथ बिजी रहते हैं, उस उम्र में आरुषि एक ऐसी बीमारी से लड़ रही थीं जिसके बारे में सुनना ही रूह कंपा देता है। इडियोपैथिक इंट्राक्रैनियल हाइपरटेंशन एक ऐसी अजीब और दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल दिक्कत है, जिसमें दिमाग की नसों से सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (CSF) रिसने लगता है। इस फ्लूइड के लीक होने की वजह से दिमाग पर इतना खतरनाक दबाव पड़ता है कि उसका आकार ही सिकुड़ने लगता है। आप खुद सोचिए, एक तरफ बोर्ड एग्जाम्स का स्ट्रेस और दूसरी तरफ इस कदर जानलेवा बीमारी।

सिर में रहता था भयानक दर्द

इस बीमारी का असर सिर्फ दिमाग तक सीमित नहीं रहता। आरुषि बताती हैं कि इसकी वजह से अक्सर उन्हें सिर में भयानक दर्द का सामना करना पड़ता है। सबसे डरावना पल तो वो होता है जब आंखों में भारी सूजन आ जाती है और कुछ वक्त के लिए आंखों की रोशनी तक चली जाती है। ऐसे हालात में जहां एक आम इंसान अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से हार मान ले, वहां इस बच्ची ने किताबें नहीं छोड़ीं।

परेशानी ने पढ़ने में डाली बहुत सी मुश्किलें

अपनी इस बीमारी को लेकर आरुषि ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया, "मुझे ब्रेन स्टेंटिंग नाम की एक बड़ी सर्जरी से गुजरना पड़ा। यह सर्जरी इसलिए की गई ताकि दिमाग के सिकुड़ते आकार को रोका जा सके।" अब अपने स्कूल में दोस्तों और टीचर्स के साथ इस शानदार कामयाबी का जश्न मनाते हुए आरुषि के चेहरे पर जो मुस्कान है, उसके पीछे अनगिनत रातों का दर्द और आंसू छिपे हैं। वो बताती हैं, "इस बीमारी के साथ पढ़ाई करना और लगातार बैठकर परीक्षा देना बिल्कुल भी आसान नहीं था। जब CSF लिक्विड दिमाग पर दबाव डालता है तो आंखों की रोशनी अचानक से गायब हो जाती है। ऐसे में पढ़ना तो दूर, कुछ भी देख पाना मुमकिन नहीं होता।"

प्री-बोर्ड एग्जाम के वक्त अस्पतालों के लगते थे चक्कर

आरुषि के लिए 12वीं का यह सफर बिल्कुल भी सीधा नहीं था। जब अक्टूबर और नवंबर के महीने में स्कूल के बाकी बच्चे अपने प्री-बोर्ड एग्जाम्स की तैयारियों में दिन-रात एक कर रहे थे, उस वक्त आरुषि अस्पतालों के चक्कर काट रही थीं। अपने इलाज के लिए उन्हें लखनऊ से लेकर चेन्नई और गुड़गांव तक के कई बड़े अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ी। यही वजह थी कि वो अपने प्री-बोर्ड एग्जाम्स में भी नहीं बैठ पाई थीं। लगातार अस्पतालों के बिस्तर पर वक्त बिताना, भारी-भरकम दवाइयां खाना और सर्जरी के दर्द को सहना, किसी भी स्टूडेंट का फोकस बिगाड़ने के लिए काफी है। लेकिन इन सब के बावजूद, आरुषि का लक्ष्य एकदम साफ था।

माता-पिता की तरह सीए बनना चाहती हैं आरुषि

उनके सपनों की बात करें तो आरुषि के माता-पिता, रुचि कपूर और आशीष कपूर दोनों ही पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) हैं। आरुषि भी अपने मम्मी-पापा के नक्शेकदम पर चलना चाहती हैं और आगे चलकर एक कामयाब सीए बनना उनका सबसे बड़ा सपना है। माता-पिता ने भी अपनी बेटी के इस मुश्किल सफर में उसका पूरा साथ दिया और हर कदम पर उसकी ढाल बनकर खड़े रहे।

प्रिंसिपल ने तरीफ करते नहीं थक रहीं

स्कूल की प्रिंसिपल प्रोमिनी चोपड़ा अपनी इस होनहार और बहादुर छात्रा की तारीफ करते नहीं थकतीं। आरुषि की मेहनत और हिम्मत की मिसाल देते हुए उन्होंने कहा, "एक ऐसे बच्चे के लिए बोर्ड की परीक्षा में बैठना और इतने अच्छे नंबर लाना बहुत बड़ी बात है, जो इतने ज्यादा दर्द और तकलीफ से गुज़र रहा हो। इसके लिए सच में बहुत ज्यादा हिम्मत चाहिए होती है।" उन्होंने आगे कहा, "हमें इस बात का बहुत गर्व है कि हमारे स्कूल में ऐसे बहादुर बच्चे पढ़ते हैं। आरुषि जैसे बच्चे उन सभी लोगों के लिए एक जीती-जागती मिसाल हैं जो छोटी-छोटी परेशानियों से घबरा जाते हैं। उसने दिखाया है कि ज़िंदगी की कड़वी और मुश्किल सच्चाइयों का सामना कैसे पूरी बहादुरी के साथ किया जाता है।"

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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