क्या IIT में दाखिले जैसा है दिल्ली नर्सरी एडमिशन, क्यों पेरेंट्स का छूट जाता है पसीना
कई शहरी भारतीय अभिभावकों के लिए नर्सरी एडमिशन अब बच्चे की जिंदगी की पहली और सबसे मुश्किल रैट रेस बन चुका है। कुछ प्रतिष्ठित स्कूलों में चयन की संभावना अब आईआईटी जेईई से भी कम हो गई है, खर्च एमबीए प्रोग्राम्स के बराबर पहुंच गया है।

दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नर्सरी में दाखिले के लिए शॉर्टलिस्ट बच्चों की पहली लिस्ट शुक्रवार से जारी होना शुरू हो गई है। पेरेंट्स सुबह से ही तमाम स्कूलों की वेबसाइट को खंगालते नजर आए। एक दिन पहले ही पेरेंट्स ने बर्थ सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, बिजली के बिल, वोटर आईडी, पासपोर्ट साइज फोटो जैसे विभिन्न दस्तावेजों की फोटोकॉपियों से भरा प्लास्टिक फोल्डर तैयार कर लिया था। डीप रिसर्च, पेरेंट्स ग्रुप, स्कूल की वेबसाइट, रैंकिंग, इंस्टाग्राम व फेसबुक पेज देखकर कुछ माता पिताओं ने 15 से 20 स्कूलों के ऑप्शन भरे थे। दिल्ली में हर स्कूल में औसतन 60 जनरल-कैटेगरी सीटों के लिए लगभग 2000 परिवार मुकाबला करते हैं और हर कोई चाहता है कि उनके बच्चे को फायदा मिले।
कई शहरी भारतीय अभिभावकों के लिए नर्सरी एडमिशन अब बच्चे की जिंदगी की पहली और सबसे मुश्किल रैट रेस बन चुका है। कुछ प्रतिष्ठित स्कूलों में चयन की संभावना अब आईआईटी जेईई से भी कम हो गई है, खर्च एमबीए प्रोग्राम्स के बराबर पहुंच गया है।
आईआईटी जेईई
करीब 1.8 लाख छात्र जेईई एडवांस्ड देते हैं; लगभग 18 हजार आईआईटी हैं। चयन दर करीब 10 फीसदी रहती है।
दिल्ली के एलीट नर्सरी स्कूल:
कई इंटरनेशनल स्कूलों में सामान्य श्रेणी की केवल 70–100 सीटें होती हैं, जबकि आवेदन हजारों में आते हैं। चयन की संभावना 3–5 फीसदी से भी कम रह जाती है। यानी IIT, IIM या यहां तक कि आइवी लीग कॉलेजों से भी ज्यादा कठिन।
नर्सरी की आसमान छूती फीस, एमबीएस से भी महंगी
दिल्ली के टॉप-टियर स्कूल: सालाना 2.5–6 लाख (₹20,000–50,000 प्रति माह) + 1.5 लाख तक एडमिशन चार्ज।
मुंबई के IB स्कूल: सालाना 4–10 लाख, साथ में पहले से इन्फ्रास्ट्रक्चर और डेवलपमेंट फीस।
बेंगलुरु के प्रीमियम स्कूल: सालाना 2–4 लाख, जो ऊंची कक्षाओं में तेजी से बढ़ती है
इसके अलावा यूनिफॉर्म, किताबें, एक्टिविटी चार्ज और ट्रांसपोर्ट का खर्च अलग। कई अभिभावकों के अनुसार प्रीमियम स्कूलों में पहले साल का कुल खर्च 7–8 लाख तक पहुंच जाता है। गुरुग्राम के एक अभिभावक ने साफ कहा, 'मेरी MBA की पढ़ाई का खर्च मेरी बेटी की नर्सरी से कक्षा 5 तक की फीस से कम था।'
माता-पिता की योग्यता: फॉर्म रिजेक्ट होने का डर
हालांकि दिल्ली ने सालों पहले मां की शिक्षा या माता-पिता की जॉब प्रोफाइल जैसे अनुचित मानदंडों पर बैन लगा दिया था, फिर भी कई फॉर्म में अभी भी डिटेल्स मांगी जाती हैं। माता-पिता को डर है कि भले ही इसका आधिकारिक तौर पर इस्तेमाल न हो, फिर भी भेदभाव हो सकता है। आईटी प्रोफेशनल राहुल खन्ना कहते हैं, 'मुझसे तीन स्कूलों में मेरे पेशे के बारे में पूछा गया। भले ही वे दावा करें कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, एक माता-पिता के तौर पर आप लगातार सोचते रहते हैं। क्या मेरी पढ़ाई और कमाई इतनी है कि बच्चे को एडमिशन के लिए चुन सकें?'
कई सरकारी स्कूल बन रहे विकल्प
दिलचस्प बात यह है कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे मॉडल स्कूलों (दिल्ली एसओएसई, प्रतिभा विकास विद्यालय, नवोदय स्कूल, पीएम श्री वगैरह) में रिकॉर्ड संख्या में आवेदन आ रहे हैं। प्राइवेट स्कूलों का खर्च नहीं उठा पाने वाले मिडिल-क्लास परिवारों के लिए ये स्कूल जीवनरेखा बन रहे हैं।
दाखिला के लिए यह दस्तावेज जरूरी
-माता-पिता/अभिभावक के नाम पर जारी राशन कार्ड/स्मार्ट कार्ड (जिसमें बच्चे का नाम भी हो)
-बच्चे या माता-पिता का मूल निवास प्रमाण पत्र
-माता-पिता में से किसी एक का वोटर आई कार्ड
-बच्चे या माता-पिता के नाम पर बिजली/टेलीफोन/पानी का बिल या पासपोर्ट
-माता-पिता में से किसी एक का आधार कार्ड/यूआईडी कार्ड
- बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)
- भाई-बहन का प्रमाण
- माता-पिता का एलुमनाई प्रमाण
- भाई-बहन का ट्रांसफर सर्टिफिकेट
- पासपोर्ट साइज फोटो
जरूरी तारीखें (Key Dates at a Glance)
24 जनवरी – 3 फरवरी: अभिभावक आपत्तियां/क्वेरी दर्ज करा सकते हैं
9 फरवरी: दूसरी सूची जारी
10–16 फरवरी: आपत्ति/क्वेरी समाधान अवधि
5 मार्च: अगली सूची (यदि सीटें बचती हैं)
19 मार्च: एडमिशन प्रक्रिया समाप्त



