IPS Sarika Chaudhari: JNU से पीएचडी छोड़ी, 4 बार UPSC में फेल, फिर बिमारी को हरा ऐसे बनीं IPS अफसर

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स्कूल और कॉलेज में टॉपर रहीं सारिका ने JNU से पीएचडी की पढ़ाई छोड़कर UPSC की तैयारी शुरू की। शुरुआती चार प्रयासों में वह प्रीलिम्स तक पास नहीं कर सकीं। इतना ही नहीं उन्हें बीमारी ने भी खूब परेशान किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

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आईपीएएस सारिका चौधरी कौन हैं?

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। कई बार लगातार असफल होने के बाद उम्मीदवारों का हौसला टूट जाता है, लेकिन सारिका चौधरी की कहानी अलग है। उनकी कहानी ये बताती है कि अगर असफलताओं के बाद भी अगर कोशिश जारी रखी जाए, तो मंजिल मिल सकती है। स्कूल और कॉलेज में टॉपर रहीं सारिका ने JNU से पीएचडी की पढ़ाई छोड़कर UPSC की तैयारी शुरू की। शुरुआती चार प्रयासों में वह प्रीलिम्स तक पास नहीं कर सकीं। इतना ही नहीं उन्हें बीमारी ने भी खूब परेशान किया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और पांचवें प्रयास में ऑल इंडिया 548वीं रैंक हासिल कर IPS बनीं।

सहारनपुर की नई ASP बनीं सारिका चौधरी

बता दें कि सारिका चौधरी इस वक्त चर्चे में हैं। क्योंकि 20 अगस्त 2026 को यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने साल 2023 व 2024 बैच के 23 आईपीएस अधिकारियों को उनकी पहली नियमित पोस्टिंग दी है। इसमें आईपीएस सारिका चौधरी का भी नाम शामिल है। उन्हें सहायक पुलिस आयुक्त से सहारनपुर एएसपी लगाया गया है। हालांकि यहां तक पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था।

कौन हैं IPS सारिका चौधरी?

सारिका चौधरी का संबंध राजस्थान के झुंझुनूं जिले के पिलानी के वार्ड 13 से है। उनका जन्म 1 जनवरी 1994 को हुआ था। जब उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की, उस समय उनके पिता मुकेश चौधरी बीकानेर में तहसीलदार और उनकी मां सुमन चौधरी सरकारी स्कूल में प्राचार्या थीं। सारिका चौधरी ने एक मीडिया इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने 12वीं कक्षा में टॉप किया था, जिसकी वजह से उनको राजस्थान के बिट्स पिलानी में इंजीनियरिंग में दाखिला मिला। फिर इंजीनियरिंग छोड़ दी और दिल्ली के हिंदू कॉलेज में प्रवेश लिया। यहां से साल 2014 में स्नातक व मास्टर डिग्री ली। कॉलेज टॉपर भी रहीं।

पीएचडी के दौरान यूपीएससी का किया रुख

उसके बाद दिल्ली में ही रहकर इतिहास से नेट पास किया। जेएनयू से पीएचडी करने लगीं, लेकिन इसी दौरान स‍िव‍िल सेवा की ओर रुझान हुआ तो पीएचडी छोड़कर यूपीएससी की तैयारी करने लगीं। लेकुन 2019 से 2022 के बीच दिए गए लगातार चार प्रयासों में वह UPSC प्रीलिम्स भी पास नहीं कर सकीं। बार-बार शुरुआती चरण में असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी और पांचवें प्रयास में अपनी रणनीति बदलकर आगे बढ़ने का फैसला किया।

FOMO को हराया, पांचवें प्रयास में मिली सफलता

सारिका ने एक मीडिया इंटरव्यू में बताया कि पांचवें प्रयास से पहले उन्हें FOMO यानी Fear of Missing Out का डर सताने लगा था। उन्हें लग रहा था कि कहीं इस प्रयास में भी कुछ छूट न जाए या वह दूसरों से पीछे न रह जाएं। हालांकि, उन्होंने इस डर को खुद पर हावी नहीं होने दिया और तय किया कि परिणाम की चिंता किए बिना वह एक और प्रयास जरूर करेंगी।

परिस्थितियां नहीं थ आसान

पांचवें प्रयास के दौरान भी उनके लिए परिस्थितियां आसान नहीं थीं। प्रीलिम्स से कुछ दिन पहले उनके दो करीबी दोस्तों का UPSC में चयन नहीं हुआ, जिससे वह निराश हुईं। इसके बावजूद उन्होंने खुद पर भरोसा बनाए रखा और परीक्षा दी। इस बार उन्होंने प्रीलिम्स पास कर लिया और फिर मुख्य परीक्षा की तैयारी पूरे आत्मविश्वास के साथ की।

माइग्रेन अटैक भी आया

उन्होंने सीमित और भरोसेमंद स्रोतों के साथ एक स्पष्ट रणनीति अपनाई। हालांकि, परीक्षा से करीब 10 दिन पहले उन्हें माइग्रेन अटैक भी आया। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के बावजूद उन्होंने तैयारी और परीक्षा दोनों से अपना ध्यान नहीं हटने दिया।

548वीं रैंक हासिल कर बनीं IPS

प्रीलिम्स और मेन्स के बाद सारिका ने इंटरव्यू में भी सफलता हासिल की। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने UPSC में ऑल इंडिया 548वीं रैंक हासिल की। इसके साथ ही उनका IPS बनने का सपना पूरा हुआ और उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला।

सारिका की कहानी सिर्फ UPSC में सफलता की नहीं, बल्कि लगातार असफलताओं, करियर के फैसलों, आत्मविश्वास और मुश्किल परिस्थितियों के बीच लक्ष्य पर टिके रहने की कहानी है।

Dheeraj Pal

लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण: धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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