Success Story: 11वीं में 34% और B.Tech में 24 बार बैकलॉग लाने वाले समीर शर्मा बने IPS, UPSC में हासिल की 182वीं रैंक
UPSC Success Story: 11वीं कक्षा में महज 34 फीसदी अंक लाने वाले और कॉलेज में 24 बैकलाग झेलने वाले समीर शर्मा ने अपनी कड़ी मेहनत से यूपीएससी परीक्षा पास कर आईपीएस बनने का सपना पूरा किया।

IPS Sameer Sharma UPSC Success Story: अक्सर हमारे समाज में यह मान लिया जाता है कि जो छात्र स्कूल या कॉलेज की पढ़ाई में पीछे रह जाते हैं, वे जिंदगी में कुछ बड़ा नहीं कर सकते। लेकिन कुछ लोग अपनी मेहनत और मजबूत इरादों से इस सोच को पूरी तरह बदल देते हैं। आईपीएस (IPS) अधिकारी समीर शर्मा की कहानी आज देश भर के उन करोड़ों छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद बनकर उभरी है, जो खुद को पढ़ाई में कमजोर मानते हैं। समीर शर्मा का यह सफर साबित करता है कि आपके बीते हुए कल के कम नंबर आपका आने वाला भविष्य तय नहीं कर सकते।
जब स्कूल और कॉलेज में मिला असफलताओं का दौर
समीर शर्मा बचपन से एक बहुत ही सामान्य छात्र थे। स्कूल के दिनों में उनका मन पढ़ाई में बहुत ज्यादा नहीं लगता था। 10वीं में उन्हें 57% अंक मिले थे। उनकी शैक्षणिक जिंदगी का सबसे खराब दौर तब आया जब वे 11वीं कक्षा में थे। इस क्लास में उन्हें महज 34 प्रतिशत अंक मिले थे, जिसे देखकर हर कोई हैरान था। 12वीं में उन्हें 60% नंबर मिले।
इसके बाद जैसे-जैसे उन्होंने स्कूल पूरा किया और आगे इंजीनियरिंग (B.Tech) में दाखिला लिया, तो मुश्किलें और बढ़ गईं। कॉलेज के दौरान उन्हें एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 24 विषयों में बैकलाग का सामना करना पड़ा।
ताने बने ताकत- 18 महीने में पास किया UPSC
इतनी सारी बैकलाग आने के बाद उनके साथ पढ़ने वाले छात्र और आसपास के लोग उन्हें एक 'फेलर' के रूप में देखने लगे थे। हर तरफ से मिलने वाले तानों ने समीर को अंदर से झकझोर दिया। उन्होंने तय किया कि वे इस नाकामी के साथ अपनी जिंदगी नहीं बिताएंगे। उन्होंने अपनी पुरानी गलतियों को सुधारा, अपनी पूरी ताकत पढ़ाई में झोंक दी और सबसे पहले अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की। इसके बाद उन्होंने देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन मानी जाने वाली प्रशासनिक सेवा परीक्षा (UPSC CSE) की तैयारी करने का एक बड़ा फैसला लिया।
समीर शर्मा ने बताया कि परीक्षा से महज 18 महीने पहले तक उन्होंने ठीक से यूपीएससी का नाम भी नहीं सुना था। लेकिन जब उन्होंने तैयारी करने की ठानी, तो उन्होंने शून्य से शुरुआत की और अगले 18 महीनों में अपनी पूरी जान लगा दी। उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 182 हासिल की और साल 2011 में एजीएमयूटी (AGMUT) कैडर के तहत भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल हुए।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई सफलता की कहानी
जब उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की, तो कई लोगों को लगा कि एक औसत छात्र भला इतनी बड़ी परीक्षा कैसे पास कर पाएगा। लेकिन समीर ने दिन-रात एक करके पढ़ाई की और अपने दृढ़ संकल्प के बल पर सिविल सेवा परीक्षा को सफलतापूर्वक पास कर दिखाया। आज वह भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के एक सम्मानित अधिकारी के रूप में देश की सेवा कर रहे हैं। समीर शर्मा की यह यात्रा सिखाती है कि “हार तब नहीं होती जब आप गिरते हैं, हार तब होती है जब आप उठने से मना कर देते हैं।”
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