CAT में 97 परसेंटाइल स्कोर, सिविल सर्विस के लिए छोड़ी कॉर्पोरेट की जॉब, 2 बार UPSC क्रैक कर बने IPS
आईपीएस अधिकारी मकसूद अहमद मेवात से ताल्लुक रखते हैं। यहां के बारे में लोग कहते हैं कि यहां से सिर्फ क्रिमिनल ही निकल सकते हैं या फिर ऑटो चला सकते हैं। लेकिन मकसूद अहमद को इतिहास बदलना था।

आईएएस-आईपीएस की कई हमें प्रेरणादायक कहानियां सुनी और पढ़ी होंगी। लेकिन आईपीएस मकसूद अहमद की कहानी अलग है। क्योंकि आईपीएस बनना इनका सपना था और इसके लिए ना जाने इन्होंने क्या-क्या त्याग किए। क्योंकि यूपीएससी के लिए उन्होंने अच्छी-खासी कॉर्पोरेट की जॉब छोड़ी। साथ ही जब पहली बार यूपीएससी क्रैक किया, तो इनका चयन आईआरटीएस के लिए हुआ। लेकिन इन्होंने इसे भी छोड़ दिया और यूपीएससी की तैयारी में लगे रहे। इनकी कहानी सिर्फ त्याग की नहीं है, बल्कि समर्पण और लोगों का नजरिया बदलने को लेकर भी है। क्योंकि ये जिस जगह से ताल्लुक रखते हैं, वहां के बारे में सिर्फ और सिर्फ नेगेटिव बातें ही सामने आती रही हैं। लेकिन इस नकारात्मक नजरिए का दीवार तोड़ते हुए उन्होंने ये साबित कर दिया की अगर आपके अंदर कुछ भी करने का जज्बा और जुनून हो, तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है। चलिए आज हम सक्सेस स्टोरी में आईपीएस मकसूद अहमद की बात करेंगे।
मेवात की गलियों से आईपीएस तक
आईपीएस अधिकारी मकसूद अहमद मेवात से ताल्लुक रखते हैं। यहां के बारे में लोग कहते हैं कि यहां से सिर्फ क्रिमिनल ही निकल सकते हैं या फिर ऑटो चला सकते हैं। लेकिन मकसूद अहमद को इतिहास बदलना था। उन्होंने अपनी व्यक्तिग सफलता पाकर मेवात के लिए बनी इस रूढ़िवादी सोच को पूरी तरह से बदल दिया। मेवात की गलियों से उठकर आईपीएस अधिकारी बनने तक का मकसूद अहमद का सफर किसी मिसाल से कम नहीं है।
पढ़ाई-लिखाई
आईपीएस अधिकारी मकसूद अहमद की एक से लेकर 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई अलवर केंद्रीय विद्यालय में हुई। उसके बाद 2005 में अलवर स्थित आइईटी कालेज से इलेक्ट्रिक में इंजीनियरिंग की। इंजीनियरिंग करने के बाद आइआइएमटी गाजियाबाद से एमबीए की। उन्होंने CAT परीक्षा में 97 परसेंटाइल स्कोर किया और फिर HR में MBA की पढ़ाई पूरी की।
5 साल की प्राइवेट नौकरी
इतना ही नहीं एमबीए करने के बाद मकसूद अहमद ने पांच सालों तक प्राइवेट क्षेत्र में नौकरी की। इस दौरान मैंने रिलाइंस लाइफ इंश्योरेंस, इंडिया मार्ट डाट काम और एक निजी स्कूल में एचआर हेड के पद पर कार्यरत रहा।
शादी के बाद शुरू की यूपीएससी की तैयारी
फिर, साल 2010 में उनकी शादी हो गई थी। पत्नी को पता था कि उनका सपना आईएएस और आइपीएस बनने का था। इसके बाद साल 2013 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी और यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। पहली बार में ही उनका प्री और मेन पास हो गया था, लेकिन इंटरव्यू में रह गए थे। कुछ दिन तक उदास रहे, लेकिन परिवार के लोगों ने दोबारा तैयारी करने के लिए कहा।
तीसरे प्रयास में बनें आईपीएस
साल 2014 में दोबारा से तैयारी की और आइआरटीएस रेलवे में नौकरी मिल गई, लेकिन उनका आईपीएस बनने का सपना अभी भी अधूरा था। साल 2015 में तीसरी बार फिर प्रयास किया और इस बार उन्हें 611 रैंक मिला। ओबीसी कैटेगरी में उनका चयन आइपीएस में हो गया।
बिना कोचिंग ऐसे की तैयारी
हालांकि ये उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था। बिना किसी स्टडी और लंबे अंतराल के बाद UPSC की तैयारी शुरू करना उनके लिए एक चुनौती थी लेकिन वह आगे बढ़े। उन्होंने कोचिंग और बिना कोचिंग के पढ़ाई के बीच अंतर समझा और अपनी रणनीतियों को सुधारा। मकसूद ने फिर UPSC परीक्षा दी और अपने IPS अफसर बनने का सपना पूरा किया। वह 2016 बैच के हरियाणा कैडर के आईपीएस अधिकारी बने थे। उनका युवाओं के लिए संदेश है कि सफलता से ही समाज का नजरिया बदला जा सकता है। किसी भी परीक्षा के लिए ऑप्शनल सब्जेक्ट का चयन अपनी रुचि के आधार पर करें।
यहां दी है सेवाएं
आईपीएस की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद सबसे पहले उन्हें रोहतक सदर थाने में थाना प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई। कुछ महीने के बाद उन्हें एएसपी रोहतक लगा दिया गया। उसके बाद नारनौल का अतिरिक्त एसपी लगाया गया। साल 2020 में बल्लभगढ़ डीसीपी लगाया गया और 2020 में ही गुरुग्राम ईस्ट का डीसीपी लगा दिया गया।


