आईपीएस पिता को पेंशन तक नहीं मिली, नौकरी छोड़ने की वजह सुन बेटी भी बनीं IPS, अब दिल्ली पुलिस लीगल सेल की नई DCP
1998 में मुंबई में जन्मी ईशा सिंह के पिता योगेश प्रताप सिंह (वाई पी सिंह) 1985 बैच के IPS ऑफिसर थे। कहा जाता है कि भ्रष्टाचार से तंग आकर उन्होंने आईपीएस की नौकरी छोड़ दी थी।

UPSC IPS Isha Singh success story : तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी ईशा सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। एजीयूएमटी कैडर 2021 बैच की आईपीएस ईशा सिंह को दिल्ली पुलिस में डीसीपी वेलफेयर के साथ-साथ अब लीगल सेल की भी अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले 30 साल की ईशा जनहित के कई मामले में कड़े फैसले लेकर सभी का ध्यान खींच चुकी हैं। इससे पहले वह तब सबसे ज्यादा चर्चा में आई थीं जब वह पुडुचेरी में एक्टर विजय की रैली में टीवीके नेता से भिड़ गई थीं। इसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें लेडी सिंघम, रियल लेडी सिंघम जैसे नाम मिले थे। जनवरी 2026 में उनका दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया था।
कौन हैं ईशा सिंह
1998 में मुंबई में जन्मी ईशा सिंह के पिता योगेश प्रताप सिंह (वाई पी सिंह) 1985 बैच के IPS ऑफिसर थे। कहा जाता है कि भ्रष्टाचार से तंग आकर उन्होंने आईपीएस की नौकरी छोड़ दी थी। उनकी मां आभा सिंह पेशे से एडवोकेट हैं। कई बार धांधली के मामलों की पोल खोलने के बाद बार-बार बतौर सजा वाली पोस्टिंग मिलने के बाद वाई पी सिंह ने इस्तीफा दे दिया था, जबकि उनकी मां आभा सिंह ने कानून की प्रैक्टिस करने के लिए भारतीय डाक सेवा छोड़ दी थी। आभा सिंह ने सलमान खान हिट-एंड-रन सहित हाई-प्रोफाइल जनहित के मामलों को संभाला है। ईशा सिंह के नाना भी एक आईपीएस ऑफिसर थे।
वकालत कर चुकी हैं ईशा सिंह ने किया
ईशा ने बेंगलूरू स्थित नेशनल लॉ स्कूल से वकालत की डिग्री हासिल की थी। कुछ साल की प्रैक्टिस के बाद उन्होंने पाया कि अगर लोगों की जिंदगी में बदलाव लाना है तो इसका सबसे अच्छा तरीका है सरकार का हिस्सा बनना। ईशा को अच्छी कॉर्पोरेट फर्म से लाखों रुपए की नौकरी का ऑफर था, लेकिन बतौर वकील उन्होंने दो ऐसे मामले लड़े जिसने उनकी सोच बदल दी। पहला मामला एक बड़े नेता पर आरोप लगाने वाली महिला का था, जिसके फलस्वरूप नेता को बिना किसी कारण 50 दिन जेल में रहना पड़ा और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार अदालत से राहत मिली। दूसरा मामला सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान तीन मजदूरों की मौत का था। ईशा ने उनकी पत्नियों की लड़ाई लड़ी और अदालत के आदेश के बाद उन्हें 10-10 लाख का मुआवजा मिला।
रोज सुबह चाय बनाते थे पिता
ईशा के पिता वाईपी सिंह ने भ्रष्टाचार और दबाव से नाराज होकर पुलिस की नौकरी छोड़ी थी। वह तो ईशा को भी वकालत जारी रखने की सलाह दे रहे थे। लेकिन ईशा बचपन से ही वर्दी में किए गए अपने पिता के काम से प्रभावित थीं। इसलिए भी उन्होंने वर्दी चुनी। परीक्षा की मदद में ईशा को पिता से बहुत मदद मिली। उन्होंने पिछले सालों के प्रश्नपत्रों के प्रिंटआउट निकालकर दिए और रोज सुबह चाय बनाकर भी दी ताकि ईशा का पूरा ध्यान पढ़ाई पर रहे। तैयारी के दौरान ईशा बॉम्बे हाई कोर्ट में प्रैक्टिस भी करती रहीं।
यूपीएससी में आई 191वीं रैंक
यूपीएससी परीक्षा के लिए उन्होंने ऑप्शनल समाजशास्त्र विषय चुना था। ईशा ने यूपीएससी परीक्षा 2020 में 191वीं रैंक हासिल की।
आईपीएस बनने पर ईशा ने क्या पोस्ट किया था-
"मैं अपने परिवार में आईपीएस अधिकारी बनने वाली तीसरी पीढ़ी हूं। मुझसे पहले मेरे स्वर्गीय दादाजी श्री आर.बी. सिंह और मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी प्रेरणा, मेरे पिता श्री वाई.पी. सिंह इस सेवा में रहे। मेरे पिता सबसे ईमानदार और निडर अधिकारियों में से एक रहे हैं। वे सीबीआई में थे और देश की जनता के प्रति इतने समर्पित थे कि उन्होंने 1990 के दशक में हुए कुछ सबसे बड़े घोटालों का बिना किसी डर के पर्दाफाश किया।"
"अपनी ईमानदारी की वजह से सिस्टम से मिले नुकसान और विरोध के बावजूद उन्हें आज तक पेंशन भी नहीं मिली है। वे अपने सिद्धांतों और प्रतिबद्धता पर अडिग रहे। जब 2004 में उन्होंने इस्तीफा देकर मुझे इस बारे में बताया, तब मैं महज साढ़े आठ साल की थी। उसी वक्त मैंने यह संकल्प लिया था कि मैं उनकी इस जंग को आगे बढ़ाऊंगी, क्योंकि हमारे सिस्टम को उनके जैसे ईमानदार अधिकारियों की सख्त जरूरत है। यही एकमात्र वजह थी कि मैंने यूपीएससी की परीक्षा दी। मेरी जिंदगी की दूसरी प्रेरणा मेरी मां आभा सिंह हैं, जो केंद्रीय सेवा में थीं और बाद में बेजुबानों की आवाज बनने के लिए वीआरएस लेकर वकील बन गईं। उन्होंने मुझे हमेशा समाज को लौटाना और सबसे बढ़कर एक अच्छा इंसान बनना सिखाया है। वकालत के पेशे में उनकी उत्कृष्टता और लोगों के लिए उनका काम मुझे बेहद प्रेरित करता है। मैं खुद को बहुत खुशकिस्मत मानती हूं कि मैंने इतनी अद्भुत इच्छाशक्ति वाली मां के घर जन्म लिया।"


