International Women's Day: फ्री MBA से लेकर UK में पढ़ाई तक, इन स्कॉलरशिप्स से संवरेगा बेटियों का भविष्य

Mar 07, 2026 12:29 pm ISTHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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इस इंटरनेशनल विमेंस डे पर पूरी तरह से फंडेड STEM स्कॉलरशिप, फ्री UPES ऑनलाइन MBA प्रोग्राम और टॉप सरकारी फेलोशिप के बारे में जानें, जो हायर एजुकेशन, रिसर्च और ग्लोबल लीडरशिप में भारतीय महिलाओं को मजबूत बनाने के लिए डिजाइन किए गए हैं।

International Women's Day: फ्री MBA से लेकर UK में पढ़ाई तक, इन स्कॉलरशिप्स से संवरेगा बेटियों का भविष्य

हर साल 8 मार्च को दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (International Women's Day) मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ रस्मी तौर पर जश्न मनाने का नहीं है, बल्कि समाज, सियासत, अर्थव्यवस्था और कारोबार में महिलाओं की बेमिसाल कामयाबी को सलाम करने का एक खास मौका है। हम सब जानते हैं कि सच्ची आजादी और तरक्की तभी मुमकिन है जब आधी आबादी को तालीम और अपने पैरों पर खड़े होने के बराबर मौके मिलें।

इसी सोच को हकीकत में बदलने के लिए, इस साल महिला दिवस के मौके पर कई बड़े संस्थानों और सरकारी महकमों ने महिलाओं के लिए शानदार स्कॉलरशिप, फेलोशिप और ट्यूशन-फ्री प्रोग्राम्स का ऐलान किया है। अगर आप भी अपने सपनों को ऊंची उड़ान देना चाहती हैं, तो देश और दुनिया के ये बेहतरीन मौके आपके लिए ही हैं। साइंस और टेक्नोलॉजी से लेकर मैनेजमेंट तक, इन इनिशिएटिव्स का सीधा मकसद महिलाओं को हायर एजुकेशन और लीडरशिप की कतार में सबसे आगे खड़ा करना है। आइए तफसील से जानते हैं इन शानदार मौकों के बारे में।

ब्रिटिश काउंसिल की फुली फंडेड STEM स्कॉलरशिप

ब्रिटिश काउंसिल ने 2026-27 के एकेडमिक सेशन के लिए एक बेहद शानदार पहल की है। इसके तहत साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स (STEM) में अपना करियर बनाने की चाहत रखने वाली महिलाओं को फुली फंडेड स्कॉलरशिप दी जा रही है। इसका सबसे बड़ा मकसद दुनिया भर में साइंस और इनोवेशन के इकोसिस्टम में महिलाओं की हिस्सेदारी को बढ़ाना और जेंडर गैप को खत्म करना है।

कितनी मिलेगी मदद: इस स्कॉलरशिप के तहत हर होनहार छात्रा को कम से कम 40,000 पाउंड (यानी करीब 36.16 लाख रुपये) की तगड़ी आर्थिक मदद दी जाएगी।

क्या-क्या होगा कवर: इसमें आपकी ट्यूशन फीस, रहने-खाने का खर्च, ट्रैवल और वीजा का पूरा खर्च, हेल्थ कवरेज और यहां तक कि अंग्रेजी भाषा का सपोर्ट भी पूरी तरह से शामिल है।

कहां मिलेगा दाखिला: चुनी गई छात्राओं को यूके (UK) की टॉप और बेहतरीन यूनिवर्सिटीज में पढ़ने का मौका मिलेगा। इनमें यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग, यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो, यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर, क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन और ब्रुनेल यूनिवर्सिटी लंदन जैसी जानी-मानी संस्थाएं शामिल हैं।

सिर्फ पैसों की मदद ही नहीं, बल्कि यह प्रोग्राम छात्राओं को इंटरनेशनल रिसर्च कम्युनिटी के साथ जुड़ने और एलुमनाई एंगेजमेंट के जरिए अपना मजबूत प्रोफेशनल नेटवर्क बनाने का भी बेहतरीन मौका देता है।

UPES का '1,000 वीमेन - 1,000 ड्रीम्स' इनिशिएटिव

देहरादून की मशहूर यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज (UPES) ने भी इस साल महिला दिवस पर एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। यूनिवर्सिटी ने '1,000 वीमेन - 1,000 ड्रीम्स' नाम से एक खास मुहिम का आगाज किया है। इसके तहत देशभर की 1,000 होनहार महिलाओं को ऑनलाइन MBA प्रोग्राम के लिए 100% ट्यूशन फीस की छूट (Free MBA) दी जाएगी। इस स्कॉलरशिप को तीन खास कैटेगरीज में बड़ी ही समझदारी से बांटा गया है:

आर्म्ड फोर्सेज की महिलाओं के लिए (300 सीटें): ये स्कॉलरशिप्स उन महिलाओं के लिए रिजर्व हैं जिनका सीधा ताल्लुक हमारी आर्म्ड फोर्सेज से है। इसमें आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में अपनी सेवाएं दे रही महिलाओं के साथ-साथ सर्विंग और रिटायर्ड जवानों की पत्नियां और बेटियां भी खुशी-खुशी अप्लाई कर सकती हैं।

टेक और स्टार्टअप्स से जुड़ी महिलाओं के लिए (250 सीटें): जो महिलाएं टेक्नोलॉजी कंपनियों में शानदार काम कर रही हैं या जिन्होंने अपना खुद का स्टार्टअप शुरू किया है, उनके लिए यह एक बेहतरीन मौका है। टेक सेक्टर में महिलाओं की कमी को दूर करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

ओपन कैटेगरी (450 सीटें): बाकी बची 450 स्कॉलरशिप पूरे भारत की किसी भी योग्य महिला के लिए ओपन हैं। इसमें सेक्टर या बैकग्राउंड की कोई पाबंदी नहीं है।

UPES के वाइस-चांसलर डॉ. सुनील राय ने इस शानदार पहल पर कहा, "हर महिला को लीडरशिप के वो टूल्स मिलने चाहिए जिनकी वो असल में हकदार है। '1,000 वीमेन - 1,000 ड्रीम्स' के जरिए हम उनके सपनों के आड़े आने वाली पैसों की सबसे बड़ी रुकावट को हमेशा के लिए दूर कर रहे हैं।" यह प्रोग्राम असल में 2020 में शुरू हुए यूनिवर्सिटी के 'प्रोजेक्ट शक्ति' का ही एक बड़ा और बेहतर रूप है।

सरकारी स्कॉलरशिप्स और फेलोशिप्स की भरमार

अगर बात तालीम की हो, तो सिर्फ विदेशी संस्थाएं या प्राइवेट यूनिवर्सिटीज ही नहीं, बल्कि भारत सरकार भी महिलाओं के लिए कई शानदार योजनाएं चला रही है। 'इंडिया साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन' (ISTI) पोर्टल पर ऐसी कई स्कॉलरशिप्स की लंबी चौड़ी लिस्ट मौजूद है, जो अंडरग्रेजुएट से लेकर पोस्ट-डॉक्टोरल लेवल तक की पढ़ाई के लिए दी जाती हैं।

कुछ बेहद खास सरकारी स्कीम्स इस तरह हैं:

  • INSPIRE - SHE: (स्कॉलरशिप फॉर हायर एजुकेशन)
  • इंदिरा गांधी स्कॉलरशिप: सिंगल गर्ल चाइल्ड के लिए पोस्ट-ग्रेजुएट स्कॉलरशिप
  • प्रगति (PRAGATI): टेक्निकल एजुकेशन में लड़कियों के लिए खास स्कॉलरशिप
  • WISE SCOPE फेलोशिप और WISE-PDF UGC पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप: महिला उम्मीदवारों के लिए
  • WIDUSHI योजना: साइंस और इनोवेशन में महिलाओं को आगे लाने के लिए

वीमेन साइंटिस्ट स्कीम: (WOS-A, WOS-B, WOS-C)

ये तमाम बेहतरीन स्कीम्स भारत सरकार के साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग (DST), यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) और ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) जैसी बड़ी सरकारी संस्थाओं के सपोर्ट से चलाई जाती हैं।

सपनों को हकीकत में बदलने का सही वक्त

इन तमाम स्कॉलरशिप्स और फेलोशिप्स का असल मकसद सिर्फ कुछ रुपयों की आर्थिक मदद देना बिल्कुल नहीं है। इसका विजन महिलाओं को उन क्षेत्रों में आगे और मजबूती से खड़ा करना है, जहां उनकी नुमाइंदगी अब भी उम्मीद से काफी कम है। चाहे वह साइंस और रिसर्च का मैदान हो, या फिर आंत्रप्रेन्योरशिप की दुनिया, आज महिलाओं के लिए कामयाबी के अनगिनत दरवाजे खुल चुके हैं। यह महिला दिवस सिर्फ बधाइयां कुबूल करने का नहीं है, बल्कि इन सुनहरे मौकों का भरपूर फायदा उठाकर अपने मुस्तकबिल को एक नई दिशा देने का है।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

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शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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