गांवों में वैक्सीन स्टोरेज का मिला अनोखा हल, इन 3 भारतीय युवाओं ने बनाया नमक से चलने वाला फ्रिज; जीते 12500 डॉलर
ध्रुव, मिथ्रन और मृदुल ने एशिया क्षेत्र का खिताब अपने नाम किया। इस उपलब्धि के साथ उन्हें 12500 अमेरिकी डॉलर (करीब 10 लाख रुपये) की पुरस्कार राशि भी मिली।

आज भी भारत के कई दूरदराज के गांवों में बिजली की कमी के कारण वैक्सीन और दूसरी जरूरी दवाओं को सही तापमान पर सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती है। इसी चुनौती को देखते हुए इंदौर के तीन युवाओं ने ऐसा समाधान तैयार किया, जिसने उन्हें इंटरनेशनल लेवल पर पहचान दिलाई। इंदौर के ध्रुव चौधरी, मिथ्रन लाधानिया और मृदुल जैन ने अपने माता-पिता को इस समस्या से जूझते देखा। उनके माता-पिता मेडिकल क्षेत्र से जुड़े हैं और अक्सर उन्हें यह परेशानी होती थी कि जिन इलाकों में बिजली नहीं है, वहां वैक्सीन को सुरक्षित तापमान पर कैसे रखा जाए। इसी समस्या का हल खोजते हुए तीनों ने 'थर्मावॉल्ट (Thermavault)' नाम का एक खास इंसुलेटेड कूलिंग बॉक्स बनाया, जो बिना बिजली, बैटरी और बर्फ के सिर्फ नमक की मदद से वैक्सीन को लंबे समय तक ठंडा रखने में सक्षम है।
अर्थ प्राइज विजेता बने
इतना ही नहीं उनके इस अभिनव आविष्कार ने उन्हें 2025 अर्थ प्राइज का विजेता बना दिया। यह पुरस्कार पर्यावरण से जुड़े नवाचार करने वाले किशोरों को दिया जाता है और दुनिया के प्रत्येक क्षेत्र से एक विजेता चुना जाता है। ध्रुव, मिथ्रन और मृदुल ने एशिया क्षेत्र का खिताब अपने नाम किया। इस उपलब्धि के साथ उन्हें 12500 अमेरिकी डॉलर (करीब 10 लाख रुपये) की पुरस्कार राशि भी मिली। तीनों छात्रों ने बताया कि वे इस पैसे का उपयोग थर्मावॉल्ट के 200 यूनिट तैयार करने और उन्हें 120 अस्पतालों में परीक्षण के लिए भेजने में करेंगे।
कैसे आया आइडिया
इस अनोखे विचार की शुरुआत कोविड-19 महामारी के दौरान हुई। उस समय तीनों अपने माता-पिता से बार-बार एक ही समस्या सुनते थे कि वैक्सीन तो उपलब्ध है, लेकिन जिन ग्रामीण इलाकों में बिजली नहीं है, वहां उसे सही तापमान पर सुरक्षित रखना बेहद मुश्किल है। इलाज मौजूद होने के बावजूद उसे जरूरतमंद लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में यही सबसे बड़ी बाधा थी। इसी चुनौती को दूर करने के उद्देश्य से इन तीनों किशोरों ने थर्मावॉल्ट विकसित किया।
सही नमक की खोज कैसे पूरी हुई?
थर्मावॉल्ट के पीछे का विज्ञान एक साधारण रासायनिक प्रक्रिया पर आधारित है। कुछ प्रकार के नमक (Salts) जब पानी में घुलते हैं, तो वे आयन (Ions) नामक आवेशित कणों में टूट जाते हैं। इस प्रक्रिया के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिसे नमक अपने आसपास के वातावरण से खींच लेता है। परिणामस्वरूप आसपास का पानी ठंडा हो जाता है और बिना बिजली के शीतलन (Cooling) संभव हो जाता है। ध्रुव चौधरी, मिथ्रन लाधानिया और मृदुल जैन ने सबसे पहले इंटरनेट पर शोध शुरू किया। उन्होंने ऐसे करीब 150 तरह के नमकों की सूची तैयार की, जिनमें ठंडक पैदा करने की क्षमता हो सकती थी। शुरुआती जांच के बाद उन्होंने लगभग 20 नमकों को प्रयोग के लिए चुना।
प्रयोग करने के लिए तीनों ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) की प्रयोगशाला का उपयोग किया। हालांकि, शुरुआती परीक्षणों में कोई भी नमक पानी को आवश्यक स्तर तक ठंडा नहीं कर सका।आखिरकार समाधान इंटरनेट नहीं, बल्कि उनकी स्कूल की विज्ञान की किताब में मिला। उनके शिक्षक ने बेरियम हाइड्रॉक्साइड ऑक्टाहाइड्रेट और अमोनियम क्लोराइड का सुझाव दिया। ये दोनों रसायन कक्षा 9 की विज्ञान की पुस्तक में शामिल थे और परीक्षण में सबसे प्रभावी साबित हुए।
थर्मावॉल्ट के अंदर क्या है और यह कैसे काम करता है?
थर्मावॉल्ट (Thermavault) का डिजाइन बेहद सरल लेकिन प्रभावी है। इसके बाहरी हिस्से को इंसुलेटेड प्लास्टिक से बनाया गया है, जबकि अंदर तांबे (कॉपर) की परत लगी होती है। इसी तांबे वाले हिस्से में वैक्सीन या अंग (ऑर्गन) सुरक्षित रखे जाते हैं।
प्लास्टिक और तांबे की परत के बीच की जगह में नमक को पानी में घोलकर तैयार किया गया विशेष कूलिंग सॉल्यूशन भरा जाता है। यही घोल रासायनिक प्रक्रिया के जरिए ठंडक पैदा करता है और अंदर का तापमान बनाए रखता है। हालांकि, वैक्सीन को ठंडा रखने के लिए कोल्ड बॉक्स और कूलेंट पैक पहले से मौजूद हैं, लेकिन उनमें ज्यादातर आइस पैक (बर्फ) का इस्तेमाल होता है। इसके विपरीत, थर्मावॉल्ट का सबसे बड़ा फायदा इसकी दोबारा उपयोग (रीयूजेबिलिटी) की क्षमता है।
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक इंदौर के वी वन अस्पताल में इस उपकरण का परीक्षण करने वाले ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. प्रितेश व्यास ने थर्मावॉल्ट की वेबसाइट पर साझा किए गए एक वीडियो में बताया कि, "हम थर्मावॉल्ट के अंदर वैक्सीन को लगभग 10 से 12 घंटे तक सुरक्षित तापमान पर रखने में सफल रहे हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि यदि इसमें इनबिल्ट तापमान मॉनिटर जैसी कुछ अतिरिक्त सुविधाएं जोड़ दी जाएं, तो यह उपकरण दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में वैक्सीन और अन्य चिकित्सा सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।
पुरस्कार राशि का क्या होगा इस्तेमाल?
अर्थ प्राइज जीतने के बाद इन तीनों छात्रों को सिर्फ आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि अपने नवाचार को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने का अवसर भी मिला। मृदुल जैन के अनुसार, वे पुरस्कार में मिली राशि का एक हिस्सा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की परफॉर्मेंस, क्वालिटी एंड सेफ्टी प्रमाणन प्राप्त करने की प्रक्रिया में खर्च करना चाहते हैं। यह प्रमाणन मिलने के बाद वे गावी (Gavi) के सामने थर्मावॉल्ट को प्रस्तुत कर सकेंगे। गावी एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जो दुनिया भर में वैक्सीन की आपूर्ति और वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। तीनों छात्रों का सपना है कि थर्मावॉल्ट उन दूरदराज के गांवों तक पहुंचे, जहां आज भी आधुनिक कोल्ड-चेन (Cold Chain) व्यवस्था नहीं पहुंच सकी है। उनका मानना है कि यह तकनीक बिजली की कमी वाले क्षेत्रों में वैक्सीन और अन्य आवश्यक चिकित्सा सामग्री को सुरक्षित रखने का एक प्रभावी और किफायती समाधान बन सकती है।


