बिना बॉस, बिना ऑफिस... एक भारतीय लड़की ने कैसे दुनिया के सबसे महंगे देश में बिताए 6 महीने?
भारतीय कंटेंट क्रिएटर स्नेह गौड़ ने अपनी नौकरी छोड़कर एक खास हुनर के दम पर दुनिया के सबसे महंगे देश स्विट्जरलैंड में बिना कॉर्पोरेट जॉब के 6 महीने बिताए।

आज के दौर में ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित भविष्य का सीधा सा मतलब होता है एक फुल-टाइम कॉर्पोरेट नौकरी। हम में से कई लोग इसी जद्दोजहद में अपनी आधी उम्र गुजार देते हैं कि एक अच्छी डिग्री मिले, फिर एक फिक्स सैलरी वाली नौकरी हाथ लग जाए और हर साल ठीक-ठाक प्रमोशन होता रहे। लेकिन, क्या वाकई जिंदगी सिर्फ इतनी ही है? इसी सवाल का जवाब एक भारतीय कंटेंट क्रिएटर स्नेह गौड़ ने ढूंढा है। स्नेह ने हाल ही में सोशल मीडिया पर अपनी जिंदगी का वो दिलचस्प सफर साझा किया है, जिसने लाखों लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने बिना किसी मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी किए, दुनिया के सबसे महंगे और खूबसूरत देशों में से एक स्विट्जरलैंड में पूरे छह महीने गुजारे।
स्नेह का यह सफर रातों-रात तय नहीं हुआ। स्विट्जरलैंड की उन खूबसूरत वादियों में सुबह उठने का ख्वाब देखने से बहुत पहले, वह भी उसी रवायती रास्ते पर चल रही थीं जिस पर हम में से अधिकतर लोग चलते हैं। शुरुआत में वह एक आम कॉर्पोरेट नौकरी कर रही थीं, जहां उनकी तनख्वाह करीब 45,000 रुपये महीना थी। उस वक्त उन्हें लगता था कि यही कामयाबी है।
वीडियो में दिया बेबाकी के जवाब
अपने एक वीडियो में स्नेह बड़ी बेबाकी से कहती हैं, "मुझे लगता था कि कामयाबी इसी को कहते हैं कि डिग्री लो, सैलरी कमाओ, नौकरी करो और अगले प्रमोशन के इंतजार में लग जाओ।" लेकिन जैसे-जैसे वक्त बीता, उन्हें इस बात का एहसास होने लगा कि उन्हें कॉर्पोरेट दुनिया की इस बंधी-बंधाई जिंदगी से कहीं ज्यादा 'आजादी' की तलाश है। उनके लिए आजादी के मायने बहुत साफ थे। वह कहती हैं, "मुझे ये चुनने की आजादी चाहिए थी कि मैं कहां रहूं, मनचाही जगहों पर सफर कर सकूं, और उन चीजों पर काम कर सकूं जिनकी मुझे वाकई में परवाह है।"
यहीं से उनकी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया। अपनी इस आजादी को हकीकत में बदलने के लिए स्नेह ने एक ऐसा कदम उठाया जिसने उनके करियर की दिशा ही बदल दी। उन्होंने स्पेनिश भाषा सीखने में अपना वक्त और पैसा इन्वेस्ट किया। ये एक ऐसा फैसला था जिसने उनके लिए दुनिया भर के दरवाजे खोल दिए। इस नई भाषा के हुनर की बदौलत उन्हें स्पेन जाने का मौका मिला। वहां उन्हें न सिर्फ इंटरनेशनल माहौल को समझने का नजरिया मिला, बल्कि दुनिया भर के अलग-अलग लोगों से जुड़ने का शानदार मौका भी हासिल हुआ।
स्पेनिश बोलने को बनाया हुनर
वक्त गुजरने के साथ स्नेह ने अपने इस स्पेनिश बोलने और समझने के हुनर को महज एक शौक तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे एक पूरे बिजनेस में तब्दील कर दिया। उन्होंने शुरुआत स्पेनिश पढ़ाने से की। जब इसमें कामयाबी मिली, तो उन्होंने अपने काम का दायरा बढ़ाना शुरू कर दिया। इसके बाद उन्होंने स्पेन के लिए एक खास ट्रैवल गाइड तैयार की, कई तरह के डिजिटल प्रोडक्ट्स बनाए, और उन युवाओं के लिए मेंटरशिप प्रोग्राम शुरू किए जो ऑनलाइन एंटरप्रेन्योर या कंटेंट क्रिएटर बनना चाहते हैं। इसके अलावा ब्रांड कोलैबोरेशन के जरिए भी उन्होंने कमाई के कई रास्ते खोल लिए।
धीरे-धीरे स्नेह ने अपनी आमदनी के इतने अलग-अलग जराए बना लिए कि उन्हें किसी एक कंपनी की बंधी हुई सैलरी पर निर्भर रहने की जरूरत ही नहीं पड़ी। अपने इस अनुभव को साझा करते हुए वह बताती हैं, "जब मैं स्विट्जरलैंड गई, तो मैं किसी कंपनी की तनख्वाह के भरोसे नहीं बैठी थी। मेरे लिए मेरा लैपटॉप और मेरी रिमोट टीम ही काफी थी।" उनका मानना है कि कई बार आपकी जिंदगी बदलने वाली चीज कोई प्रमोशन नहीं होता, बल्कि आपका एक हुनर होता है।
अपने वायरल हो रहे वीडियो के कैप्शन में स्नेह ने बड़े ही गर्व और सुकून के साथ लिखा, "कोई नौकरी नहीं। कंपनी की कोई सैलरी नहीं। फिर भी हर सुबह स्विट्जरलैंड में उठती थी।" अक्सर लोग उनसे ये सवाल पूछते हैं कि स्विट्जरलैंड जैसी महंगी जगह पर रहने का खर्च उन्होंने आखिर कैसे उठाया? इसका जवाब देते हुए स्नेह बड़ी ईमानदारी से कहती हैं कि इसका सीधा सा राज वो बिजनेस है जो उन्होंने स्पेन में रहते हुए खड़ा किया था। इसी ने उन्हें वो आजादी दी कि वो दुनिया के किसी भी कोने में जाकर रह सकें।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


