Independence Day Poem in Hindi : स्वतंत्रता दिवस पर आसान कविताएं और गीत, भर देंगी जोश

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Poem On Independence Day In Hindi : स्वतंत्रता दिवस के किसी कार्यक्रम में अगर आप भी कविता सुनाना चाहते हैं, तो नीचे दी गईं देशभक्ति वाली कविताएं पढ़कर इनाम जीत सकते हैं। इन्हें आप आसानी से याद कर सकते हैं।

Independence Day Poem in Hindi
स्वतंत्रता दिवस पर आसान कविताएं और गीत

Poem On Independence Day In Hindi : स्वतंत्रता दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि उन वीर सपूतों के महान त्याग और बलिदान को याद करने का भी अवसर है जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। देश प्रेम की भावना को हर भारतवासी के दिल में जिंदा रखने और उसमें उफान लाने में देश के कवियों और उनकी कविताओं की भूमिका अहम रही है। कवियों की ओजपूर्ण कविताएं आज भी लोगों की रगों में जोश भर देती हैं। 15 अगस्त के अवसर पर स्कूल, कॉलेज और विभिन्न संस्थानों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जहां छात्र-छात्राएं देशभक्ति से ओतप्रोत कविताएं प्रस्तुत करते हैं। यदि आप भी स्वतंत्रता दिवस के किसी कार्यक्रम में कविता सुनाना चाहते हैं, तो नीचे दी गई 15 अगस्त पर कविता को पढ़कर याद कर सकते हैं और इनाम जीत सकते हैं।

आदरणीय प्रिंसिपल, गुरुजनों और मेरे प्यारे दोस्तों,

आज स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सभी महान स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हुए मैं छोटी सी कविता/छोटा सा गीत सुनाने जा रहा हूं-

कविता - 1

प्यारा प्यारा मेरा देश,

सबसे न्यारा मेरा देश।

दुनिया जिस पर गर्व करे,

वो जगमग सितारा मेरा देश।

गंगा जमुना की माला का,

फूलों वाला मेरा देश।

अंतरिक्ष में ऊंचा जाता मेरा देश,

प्यारा प्यारा मेरा देश।

इतिहास में बढ़ चढ़ कर,

नाम लिखाए मेरा देश।

नित नए चेहरों में,

मुस्कानें लाता मेरा देश।।

जय हिंद... जय भारत

कविता -2

उठो, धरा के अमर सपूतों।

पुन: नया निर्माण करो।

जन-जन के जीवन में

फिर से नव स्फूर्ति, नव प्राण भरो।

नई प्रात है नई बात है

नई किरन है, ज्योति नई।

नई उमंगें, नई तरंगें

नई आस है, सांस नई।

युग-युग के मुरझे सुमनों में

नई-नई मुस्कान भरो।

उठो, धरा के अमर सपूतों।

पुन: नया निर्माण करो।।1।।

डाल-डाल पर बैठ विहग

कुछ नए स्वरों में गाते हैं।

गुन-गुन, गुन-गुन करते भौंरें

मस्त उधर मँडराते हैं।

नवयुग की नूतन वीणा में

नया राग, नव गान भरो।

उठो, धरा के अमर सपूतों।

पुन: नया निर्माण करो।।2।।

कली-कली खिल रही इधर

वह फूल-फूल मुस्काया है।

धरती माँ की आज हो रही

नई सुनहरी काया है।

नूतन मंगलमय ध्वनियों से

गुँजित जग-उद्यान करो।

उठो, धरा के अमर सपूतों।

पुन: नया निर्माण करो।।3।।

सरस्वती का पावन मंदिर

शुभ संपत्ति तुम्हारी है।

तुममें से हर बालक इसका

रक्षक और पुजारी है।

शत-शत दीपक जला ज्ञान के

नवयुग का आह्वान करो।

उठो, धरा के अमर सपूतों।

पुन: नया निर्माण करो।।4।। ( -द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी )

जय हिंद... जय भारत

कविता - 3

कवि - माखनलाल चतुर्वेदी

प्यारे भारत देश

प्यारेभारत देश

गगन-गगन तेरा यश फहरा

पवन-पवन तेरा बल गहरा

क्षिति-जल-नभ पर डाल हिंडोले

चरण-चरण संचरण सुनहरा

ओ ऋषियों के त्वेष

प्यारे भारत देश।।

वेदों से बलिदानों तक जो होड़ लगी

प्रथम प्रभात किरण से हिम में जोत जागी

उतर पड़ी गंगा खेतों खलिहानों तक

मानो आँसू आये बलि-महमानों तक

सुख कर जग के क्लेश

प्यारे भारत देश।।

तेरे पर्वत शिखर कि नभ को भू के मौन इशारे

तेरे वन जग उठे पवन से हरित इरादे प्यारे!

राम-कृष्ण के लीलालय में उठे बुद्ध की वाणी

काबा से कैलाश तलक उमड़ी कविता कल्याणी

बातें करे दिनेश

प्यारे भारत देश।।

जपी-तपी, संन्यासी, कर्षक कृष्ण रंग में डूबे

हम सब एक, अनेक रूप में, क्या उभरे क्या ऊबे

सजग एशिया की सीमा में रहता केद नहीं

काले गोरे रंग-बिरंगे हममें भेद नहीं

श्रम के भाग्य निवेश

प्यारे भारत देश।।

वह बज उठी बासुँरी यमुना तट से धीरे-धीरे

उठ आई यह भरत-मेदिनी, शीतल मन्द समीरे

बोल रहा इतिहास, देश सोये रहस्य है खोल रहा

जय प्रयत्न, जिन पर आन्दोलित-जग हँस-हँस जय बोल रहा,

जय-जय अमित अशेष

प्यारे भारत

कविता - 4

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,

झंडा ऊंचा रहे हमारा।

सदा शक्ति बरसाने वाला,

प्रेम सुधा सरसाने वाला,

वीरों को हरषाने वाला,

मातृभूमि का तन-मन सारा।।

झंडा ऊंचा रहे हमारा।

स्वतंत्रता के भीषण रण में,

लखकर बढ़े जोश क्षण-क्षण में,

कांपे शत्रु देखकर मन में,

मिट जाए भय संकट सारा।।

झंडा ऊंचा रहे हमारा।

इस झंडे के नीचे निर्भय,

लें स्वराज्य यह अविचल निश्चय,

बोलें भारत माता की जय,

स्वतंत्रता हो ध्येय हमारा।।

झंडा ऊंचा रहे हमारा।

आओ! प्यारे वीरो, आओ।

देश-धर्म पर बलि-बलि जाओ,

एक साथ सब मिलकर गाओ,

प्यारा भारत देश हमारा।।

झंडा ऊंचा रहे हमारा।

इसकी शान न जाने पाए,

चाहे जान भले ही जाए,

विश्व-विजय करके दिखलाएं,

तब होवे प्रण पूर्ण हमारा।।

झंडा ऊंचा रहे हमारा।

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,

झंडा ऊंचा रहे हमारा।

– विजयी विश्व तिरंगा प्यारा (झंडा गीत) / श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’

कविता 5

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा

हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिस्ताँ हमारा

ग़ुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में

समझो वहीं हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा

परबत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमाँ का

वो संतरी हमारा, वो पासबाँ हमारा

गोदी में खेलती हैं, जिसकी हज़ारों नदियाँ

गुलशन है जिसके दम से, रश्क-ए-जिनाँ हमारा

ऐ आब-ए-रूद-ए-गंगा! वो दिन है याद तुझको

उतरा तेरे किनारे, जब कारवाँ हमारा

मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना

हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा

यूनान-ओ-मिस्र-ओ- रोमा, सब मिट गए जहाँ से

अब तक मगर है बाकी, नाम-ओ-निशाँ हमारा

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी

सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-जहाँ हमारा

‘इक़बाल’ कोई महरम, अपना नहीं जहाँ में

मालूम क्या किसी को, दर्द-ए-निहाँ हमारा

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा

हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिसताँ हमारा

– सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा / इक़बाल

गीत -1

जहां डाल-डाल पर

सोने की चिड़िया करती है बसेरा

वो भारत देश है मेरा

जहां सत्य, अहिंसा और धर्म का

पग-पग लगता डेरा

वो भारत देश है मेरा

ये धरती वो जहां ऋषि-मुनि

जपते प्रभु नाम की माला

जहां हर बालक मोहन है

और राधा है हर एक बाला

जहां सूरज सबसे पहले आकर

डाले अपना डेरा

वो भारत देश है मेरा...

अलबेलों की इस धरती के

त्योहार भी हैं अलबेले

कहीं दीवाली की जगमग है

कहीं हैं होली के मेले

जहां राग रंग और हंसी खुशी का

चारों ओर है घेरा

वो भारत देश है मेरा...

जहाँ आसमान से बाते करते

मंदिर और शिवाले

जहाँ किसी नगर मे किसी द्वार पर

कोई न ताला डाले

प्रेम की बंसी जहाँ बजाता

है ये शाम सवेरा

वो भारत देश है मेरा ...

जय हिंद... जय भारत

गीत 2

मेरा रंगदे बसंती चोला

मेर रंग दे बसंती चोला

हो आज रंग दे हो माँ ऐ रंग दे

मेर रंग दे बसंती चोला

आज़ादी को चली ब्याहने दीवानों की टोलियाँ

खून से अपने लिखे देंगे हम इंक़लाब की बोलियाँ

हम वापस लौटेंगे लेकर आज़ादी का डोला

मेर रंग दे …

ये वो चोला है के जिस पे रंग न चढ़े दूजा

हमने तो बचपन से की थी इस चोले की पूजा

कल तक जो चिंगारी थी वो आज बनी है शोला

मेर रंग दे …

सपनें में देखा था जिसको आज वही दिन आया है

सूली के उस पार खड़ी है माँ ने हमें बुलाया है

आज मौत के पलड़े में जीवन को हमने तौला

मेर रंग दे …

Pankaj Vijay

लेखक के बारे में

Pankaj Vijay

पंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार

शॉर्ट बायो पंकज विजय एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में livehindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे करियर, स्कूल व हायर एजुकेशन, जॉब्स से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। 9 वर्षों से यहां इसी भूमिका में हैं। सरकारी भर्तियों, बोर्ड व एंट्रेंस एग्जाम, प्रतियोगी परीक्षाओं, उनके परिणाम, बदलते दौर में करियर की नई राहों, कोर्स, एडमिशन एवं नए जमाने के रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स से जुड़ी अपडेट तेजी से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।


15 से अधिक सालों का अनुभव

पंकज विजय ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। अमर उजाला समाचार पत्र में रिसर्च, संपादकीय और करियर एजुकेशन जॉब्स डेस्क पर काम किया। यहां उन्हें फीचर लेखन व रिपोर्टिंग का भी मौका मिला। इसके बाद उन्होंने आज तक डिजिटल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आज तक वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और एजुकेशन व रोजगार जगत से जुड़ी खबरें लिखीं। इसके बाद एनडीटीवी ऑनलाइन में एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर इस विषय में अपनी समझ को और व्यापक बनाया। एनडीटीवी की पारी के बाद वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और बीते 9 वर्षों से करियर एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर रहे हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा, गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में एमए व दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में बीए ऑनर्स किया है। एनसीसी सी सर्टिफिकेट होल्डर हैं जिसके चलते उन्हें रक्षा क्षेत्र जैसे पुलिस व सेनाओं की भर्तियों की बेहतर समझ है।


विजन

तमाम तरह के करियर, स्कूल एजुकेशन, हायर एजुकेशन, भर्तियों, प्रतियोगी परीक्षाओं, एंट्रेंस एग्जाम, नौकरी के लिए जरूरी स्किल्स एवं बेरोजगार युवाओं के मुद्दों को लेकर पंकज के पास गहरी समझ है। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के कई टॉपरों के इंटरव्यू किए हैं। उनकी लिखी सक्सेस स्टोरीज युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को प्रेरित करती रही हैं। पंकज का मानना है कि विश्वसनीयता, पारदर्शिता और तथ्यपरकता ही पत्रकारिता की असली ताकत है। उनका लक्ष्य स्कूली छात्रों व बेहतर करियर एवं सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को आसान भाषा में सटीक, तेज और भरोसेमंद जानकारी देना है।


विशेषज्ञता

तमाम तरह की सरकारी भर्तियां, परीक्षाएं व उनके परिणाम
स्कूल एजुकेशन, हायर एजुकेशन, कोर्स, एडमिशन से जुड़े विषय
बोर्ड रिजल्ट लाइव कवरेज और शिक्षा एवं रोजगार जगत संबंधी ब्रेकिंग
स्कूलिंग के बाद करियर की राहें
यूपीएससी, जेईई मेन व नीट जैसी बड़ी परीक्षाओं के टॉपरों के इंटरव्यू
छात्रों के ज्ञान के लिए रिसर्च बेस्ड और एक्सप्लेनर स्टोरी

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