बिना JEE Main कई और IIT में शुरू होगा BTech जैसा 4 साल का डिग्री कोर्स, इस बार खाली रह गईं सीटें
आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास के बाद देश के तीन से चार और आईआईटी संस्थान अगले वर्ष से चार साल का बैचलर ऑफ सायबर सिक्योरिटी डिग्री कोर्स शुरू कर सकते हैं। इसका एंट्रेंस अलग से होगा।

आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास के बाद देश के तीन से चार और आईआईटी संस्थान अगले वर्ष से चार साल का बैचलर ऑफ सायबर सिक्योरिटी डिग्री कोर्स शुरू कर सकते हैं। भले ही इस वर्ष आईआईटी कानपुर और आईआईटी मद्रास ने इस कोर्स में दाखिले जेईई मेन स्कोर से लिए हों लेकिन अगले वर्ष से यह डिग्री कोर्स ऑफर करने वाले तमाम आईआईटी संस्थान अलग एंट्रेंस टेस्ट लेंगे। अगले वर्ष से आईआईटी संस्थानों में एप्टीट्यूड टेस्ट और हैकाथन बेस्ड चयन प्रक्रिया के जरिए सायबर सिक्योरिटी डिग्री कोर्स में एडमिशन मिलेगा। बी सायबर प्रोग्राम का प्रस्ताव रखने वाले और IIT कानपुर के वाधवानी स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स के प्रोफेसर सोमित्र सनाध्या ने कहा कि अगले साल से इस एंट्रेंस में जेईई मेन को खत्म करना चाहते हैं।"
उन्होंने कहा, "हमारा इरादा शुरुआती दौर में एक एप्टीट्यूड टेस्ट कराने और उसके जरिए स्टूडेंट्स को परखने का है। फिर हम कुछ सौ लोगों को बुलाएंगे, शायद कुछ IIT, जो हिस्सा ले रहे हैं और कैंडिडेट चुनने के लिए एक हैकाथॉन ऑर्गनाइज करेंगे।" इस साल IIT कानपुर ने चार साल के बी सायबर प्रोग्राम के लिए 40 सीटें और आईआईटी मद्रास ने 50 सीटें ऑफर की हैं। इंस्टिट्यूट सभी सीटें नहीं भर पाए और 52 स्टूडेंट्स (IIT कानपुर में 32 और IIT मद्रास में 20) को एडमिशन दिया।
कई और आईआईटी संस्थानों में कोर्स हो सकता है शुरू,
सनाध्या ने कहा कि दोनों इंस्टिट्यूट अगले साल सभी सीटें भरने की उम्मीद कर रहे हैं। दूसरे आईआईटी संस्थान, जिनमें नए और पुराने दोनों इंस्टिट्यूट शामिल हैं, अभी इस प्रोग्राम को ऑफर करने पर चर्चा कर रहे हैं। सनाध्या ने कहा कि अगले साल का एंट्रेंस टेस्ट होने तक तीन से चार और IIT संस्थानों के इस पहल का हिस्सा बनने की बहुत ज्यादा संभावना है।
3 गुना बढ़ सकती है सीटें, क्या होगा टेस्ट में
सनाध्या ने आगे कहा कि सीटों की कुल संख्या आखिरकार मौजूदा लेवल से लगभग तीन गुना हो सकती है। प्रपोज्ड एप्टीट्यूड टेस्ट प्रॉब्लम-सॉल्विंग और बेसिक कंप्यूटर साइंस स्किल्स जैसे प्रोग्रामिंग और नेटवर्किंग पर फोकस करेगा। सिलेबस पर चर्चा चल रही है। फाइनल सिलेबस और एग्जामिनेशन शेड्यूल अगले तीन से चार महीनों में घोषित होने की उम्मीद है। इस साल जेईई मेन का इस्तेमाल सिर्फ शुरुआती कटऑफ के तौर पर किया गया था, जिसके बाद हैकाथॉन हुआ।
क्यों बढ़ाई जा रही सीटें
इसे बढ़ाने की योजना इसलिए बनाई जा रही है क्योंकि ट्रेंड साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स की कमी को लेकर चिंता बनी हुई है। वाधवानी स्कूल के पहले डीन, नितिन सक्सेना ने कहा कि यह प्रोग्राम बढ़ती साइबर घटनाओं और देश की साइबर सिक्योरिटी टैलेंट तैयार करने की कैपेसिटी के बीच के गैप को कम करने के लिए बनाया गया था। सक्सेना ने कहा, “भारत में, क्योंकि हमने साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स और साइबर सिक्योरिटी डिग्री की इतनी कम संख्या के साथ शुरुआत की है, इसलिए साइबर सिक्योरिटी अभी भी फॉर्मल तौर पर अपनी जगह बना रही है।”
उन्होंने अनुमान लगाया कि अगले पांच से 10 सालों में साइबर सिक्योरिटी मार्केट हर साल लगभग 15% बढ़ सकता है। सक्सेना ने कहा कि बड़े इंस्टीट्यूट्स में उसी रेट से स्टूडेंट्स की संख्या नहीं हो पाएगी, जिसका मतलब है कि अगले दशक में भी इंडस्ट्री और नेशनल सिक्योरिटी की जरूरतों और इंस्टीट्यूट्स द्वारा ह्यूमन रिसोर्स के मामले में दी जाने वाली चीजों के बीच एक अंतर बना रहेगा। उन्होंने कहा कि यह कमी ग्रेजुएट्स के लिए अच्छे मौकों में बदल सकती है। “उन्हें अट्रैक्ट करने के लिए बहुत डिमांड और कॉम्पिटिशन होगा।
करिकुलम में साइबर सिक्योरिटी, कंप्यूटर साइंस, AI और सिस्टम्स कोर्स शामिल हैं। स्टूडेंट्स को सरकारी ऑर्गनाइजोशन्स और प्राइवेट सेक्टर के साथ प्रोजेक्ट्स और इंटर्नशिप के जरिए प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस मिलेगा।
सक्सेना ने कहा कि यह प्रोग्राम उन स्टूडेंट्स के लिए डिजाइन किया गया है जो सिर्फ थ्योरी के बजाय सिस्टम्स को समझने में इंटरेस्टेड हैं, जिसमें AI एक ज़रूरी हिस्सा है। “यह सिर्फ साइबर सिक्योरिटी नहीं है। AI से जुड़ी और भी बहुत सी चीजें हैं जिनका इस्तेमाल अगले दशक में किया जाएगा।”


