IIT Madras BS Degree 2026: बिना JEE के बनें स्पेस साइंटिस्ट, IIT मद्रास ने लॉन्च किया एरोनॉटिक्स में BS कोर्स
IIT Madras BS Degree 2026: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) मद्रास ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए 'एरोनॉटिक्स और स्पेस टेक्नोलॉजी' में एक नया बैचलर ऑफ साइंस (BS) प्रोग्राम शुरू किया है।

IIT Madras BS Degree 2026: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) मद्रास ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए 'एरोनॉटिक्स और स्पेस टेक्नोलॉजी' में एक नया बैचलर ऑफ साइंस (BS) प्रोग्राम शुरू किया है। इस कोर्स की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें एडमिशन लेने के लिए छात्रों को कठिन मानी जाने वाली JEE Main या Advanced परीक्षा की आवश्यकता नहीं है।
यह पहल उन लाखों छात्रों के लिए एक वरदान साबित होगी जो स्पेश साइंस और एविऐशन के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं, लेकिन किन्हीं कारणों से जेईई की परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए।
कोर्स की रूपरेखा और विशेषताएं
आईआईटी मद्रास द्वारा शुरू किया गया यह कोर्स पूरी तरह से भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
अवधि: यह एक चार वर्षीय (4-Year) डिग्री प्रोग्राम है। हालांकि, छात्रों को उनकी सुविधा के अनुसार 'मल्टीपल एग्जिट' विकल्प भी दिए जा सकते हैं (जैसे सर्टिफिकेट या डिप्लोमा)।
सीखने का तरीका (हाइब्रिड मॉडल): यह कोर्स मुख्य रूप से ऑनलाइन मोड में उपलब्ध होगा, लेकिन इसमें आईआईटी मद्रास के कैंपस में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और वर्कशॉप के अवसर भी मिलेंगे।
सिलेबस: छात्र इसमें एरोडायनामिक्स, प्रोपल्शन सिस्टम, सैटेलाइट टेक्नोलॉजी और स्पेस मिशन डिजाइन जैसे आधुनिक विषयों के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे।
दाखिला प्रक्रिया
बिना जेईई के एडमिशन देने का मतलब यह नहीं है कि गुणवत्ता से समझौता होगा। आईआईटी मद्रास ने इसके लिए अपनी एक अलग चयन प्रक्रिया तैयार की है:
योग्यता: किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं कक्षा (साइँस स्ट्रीम- फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स) उत्तीर्ण छात्र इसके लिए पात्र हैं।
क्वालीफायर एग्जाम: उम्मीदवारों को आईआईटी मद्रास द्वारा आयोजित एक विशेष क्वालीफायर टेस्ट देना होगा। इस टेस्ट में प्राप्त अंकों के आधार पर ही कोर्स में प्रवेश दिया जाएगा।
उम्र की कोई सीमा नहीं: इस कोर्स में आवेदन करने के लिए कोई ऊपरी आयु सीमा नहीं रखी गई है, जिससे वर्किंग प्रोफेशनल्स भी अपनी स्किल बढ़ा सकते हैं।
करियर के अवसर
एरोनॉटिक्स और स्पेस सेक्टर दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहा है। इसरो (ISRO), डीआरडीओ (DRDO) और प्राइवेट स्पेस कंपनियों (जैसे SpaceX या Skyroot) के उभार के साथ, इस डिग्री को प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए रोजगार के अपार अवसर होंगे। छात्र न केवल भारत में बल्कि नासा (NASA) जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भी रिसर्च के लिए जा सकते हैं।



