आईआईटी में देश के पहले सुपर कंप्यूटर शट डाउन से खलबली, पीएम मोदी ने किया था उद्घाटन
सुपर कंप्यूटर को चलाने वाली ‘शिवाय सपोर्ट टीम’ की इसे बंद करने का ईमेल शोध और अनुसंधान कार्यों में ‘परम शिवाय’ की मदद लेने वाले विश्वविद्यालय के आचार्यों, शोधार्थियों और वैज्ञानिकों के पास भेजा गया है।

आईआईटी बीएचयू में स्थापित देश के पहले स्वदेशी सुपर कंप्यूटर ‘परम शिवाय’ को बंद करने से जुड़े एक ईमेल ने खलबली मचा दी है। सुपर कंप्यूटर को चलाने वाली ‘शिवाय सपोर्ट टीम’ की तरफ से यह ईमेल शोध और अनुसंधान कार्यों में ‘परम शिवाय’ की मदद लेने वाले विश्वविद्यालय के आचार्यों, शोधार्थियों और वैज्ञानिकों के पास भेजा गया है। नेशनल सुपर कंप्यूटिंग मिशन (एनएसएम) के तहत आईआईटी बीएचयू द्वारा स्थापित पहले स्वदेशी सुपर कंप्यूटर का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 फरवरी 2019 को उद्घाटन किया था।
इसके बाद समय-समय पर इसकी क्षमता भी बढ़ाई गई। सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सीडेक) द्वारा डिजाइन और विकसित 833 टेराफ्लॉप्स क्षमता वाले इस सुपर कंप्यूटर की लागत 32.5 करोड़ रुपये आई थी। हालांकि इस सुपर कंप्यूटर को ‘शट डाउन’ करने के ईमेल पर बीएचयू और आईआईटी में उन्नत शोध और अत्याधुनिक तकनीकी पर काम कर रहे वैज्ञानिकों और शोधार्थियों में तनाव है। विभिन्न तरह की डेटा एनालिसिस, कंप्यूटिंग सहित तमाम जटिल कार्य जो परम शिवाय पर सेकेंडों में हो जाते थे, अब उनमें या तो हफ्तों-महीनों लगेंगे, या उन्हें कर पाना संभव ही नहीं होगा। सपोर्ट टीम की तरफ से जारी ईमेल में सभी उपयोगकर्ताओं को परम शिवाय से अपने डेटा हटा लेने और बैकअप ले लेने का संदेश दिया गया था। जानकारों की मानें तो अपग्रेडेशन या मेंटेनेंस के लिए पहले भी इसे कुछ घंटों या दिनों के लिए इसे बंद किया गया था मगर यह पहली बार है जब डेटा हटा लेने का संदेश दिया गया है। हालांकि आईआईटी सुपर कंप्यूटर बंद करने के दावों को खारिज किया है।
ii
इस संबंध में आईआईटी बीएचयू की प्रवक्ता डॉ. स्वाति बिस्वास ने बताया कि सुपर कंप्यूटर को मेंटेनेंस के लिए बंद किया गया था। मंगलवार को इसका संचालन पूर्ववत शुरू हो जाएगा। इससे छात्र-छात्राओं को काफी सहूलियत होगी। उन्होंने बताया कि मेंटनेंस के लिए सिस्टम को बंद किया जाना अति आवश्यक है।
बीएचयू में रेडियो फ्रीक्वेंसी कार्ड शुरू
बीएचयू में यूजी-पीजी और पीएचडी में प्रवेश लेने वाले सभी नए छात्रों के लिए आरएफआईडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडेंटिटी कार्ड) की व्यवस्था शुरू हो गई है। छात्रों के प्रवेश अनुक्रमांक के आधार पर छात्र अधिष्ठाता कार्यालय की ओर से विभागों से ब्योरा मंगा रहा है। अगले कुछ दिनों में नवप्रवेशियों को भी विशिष्ट परिचय पत्र मिल जाएंगे।
जुलाई-25 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हुई इस योजना को अब पूरे विश्वविद्यालय में एकीकृत परिचय पत्र के रूप में लागू कर दिया गया है। खास यह भी कि शिक्षक, कर्मचारी और छात्रों को इस एक आरएफआईडी से ही लाइब्रेरी, हेल्थ सेंटर सहित अन्य सभी सुविधाएं मिल सकेंगी। स्मार्ट आईडी कार्ड में धारक का नाम, फोटो और विश्वविद्यालय से संबंधित आवश्यक विवरण दर्ज होंगे। इस वर्ष एक जनवरी से छात्र अधिष्ठाता कार्यालय की तरफ से छात्रों और कर्मचारियों को आरएफआईडी कार्ड मुहैया कराने शुरू किए गए थे।
पीजी प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही स्नातकोत्तर के नए छात्रों के लिए भी कार्ड की प्रिंटिंग शुरू हो गई है। बीएचयू की तरफ से अब तक लगभग 15 हजार छात्रों और कर्मचारियों को यह स्मार्ट आईडी कार्ड उपलब्ध कराए जा चुके हैं। छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिह ने बताया कि नए पीजी छात्रों के लिए आरएफआईडी कार्ड तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है जबकि स्नातक प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन छात्रों को भी यह स्मार्ट आईडी कार्ड इश्यू किए जाएंगे।
कार्ड के दुरुपयोग पर की जाएगी सख्त कार्रवाई
वाराणसी। बीएचयू ने आरएफआईडी के लिए नियमावली भी तैयार की है। कार्ड के दुरुपयोग पर छात्र-छात्राएं या कर्मचारी सख्त कार्रवाई के दायरे में लाए जाएंगे। इसके अलावा कार्ड क्षतिग्रस्त होने, खोने या संशोधन की स्थिति में नए कार्ड के लिए शुल्क जमा करना होगा। कार्ड क्षतिग्रस्त होने या विवरण में संशोधन की निर्धारित प्रक्रिया और शुल्क के बाद नया कार्ड जारी किया जाएगा।


