IIT और IIM से पढ़कर बनीं IAS अफसर, स्कूली शिक्षा पर उठाए सवाल, बताया क्या नहीं सिखाया जाता
आईएएस अफसर दिव्या मित्तल अक्सर अपने काम को लेकर चर्चा में रहती हैं। लेकिन इस बार वजह दूसरी है। उन्होंने स्कूली शिक्षा में क्या नहीं सिखाया जाता है, इस पर अपनी व्यक्तिगत राय साझा कर सोशल मीडिया पर चर्चा छेड़ दी है। साथ ही उन्होंने IIT दिल्ली से IIM बेंगलुरु और फिर IAS तक के अपने सफर को याद किया।

आईएएस अफसर दिव्या मित्तल अक्सर अपने काम को लेकर चर्चा में रहती हैं। लेकिन इस बार वजह दूसरी है। दरअसल, उन्होंने सोशल मीडिया के एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में कुछ कमियों को उजागर किया है। उन्होंने स्कूली शिक्षा में क्या नहीं सिखाया जाता है, इस पर अपनी व्यक्तिगत राय साझा कर सोशल मीडिया पर चर्चा छेड़ दी है। साथ ही उन्होंने IIT दिल्ली से IIM बेंगलुरु और फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) तक के अपने सफर को याद किया।
यूपीएससी सीएसई में 68वीं रैंक
बता दें कि दिव्या मित्तल काफी पढ़ी-लिखी हैं। उन्होंने आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बैंगलोर से पढ़ाई की। इसके बाद उन्हें लंदन में शानदार पैकेज पर नौकरी मिली। लेकिन वहां काम के दौरान उनका मन देश की सेवा करने की ओर था। फिर वो यूपीएससी की तैयारी में लग जाती हैं। यूपीएससी क्लियर कर वो आईएएस अधिकारी बन जाती हैं। उन्होंने 2012 में अपने पहले प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 68 प्राप्त की और आईपीएस के लिए चयनित हुईं।
सोशल मीडिया पर पर पोस्ट वायरल
सोशल मीडिया पर आईएएस दिव्या मित्तल ने लिखा कि IIT दिल्ली से IIM बेंगलुरु और फिर IAS तक का सफर तय किया। मुझे अपने देश की सबसे बेहतरीन शिक्षा मिली। इसने मुझे कठिन परीक्षाएं पास करना और बड़ी जिम्मेदारियां संभालना तो सिखाया, लेकिन अपने मन को शांत रखना या अकेलेपन से निपटना नहीं सिखाया। हम उपलब्धियां हासिल करना तो सीखते हैं, लेकिन खुश रहना नहीं।" साथ ही आगे उन्होंने कुछ प्वाइंटर्स के साथ बताया कि उनकी नजर में स्कूली शिक्षा में क्या कमी रह गई।
'टूटे हुए दिल की केमिस्ट्री किसी ने नहीं समझाई'
अपने पोस्ट में दिव्या मित्तल ने उन कई जीवन कौशलों का जिक्र किया, जिन्हें उनके अनुसार स्कूल शिक्षा का हिस्सा होना चाहिए। इनमें भावनाओं को संभालना, बेहतर संवाद करना, आलोचनात्मक सोच, वित्तीय साक्षरता, आत्म-अनुशासन, अकेलेपन से निपटना, लोगों को समझना, मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल और खुद को जानना जैसे विषय शामिल हैं।
इमोशनल बैलेंस पर लिखी ये बात
भावनात्मक संतुलन पर बात करते हुए उन्होंने लिखा, "हमने आवर्त सारणी (Periodic Table) तो याद कर ली, लेकिन टूटे हुए दिल की केमिस्ट्री किसी ने नहीं समझाई।" उन्होंने कहा कि स्कूलों में अक्सर छात्रों से चुप रहने की अपेक्षा की जाती है और इस चुप्पी को ही शांति मान लिया जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि बड़े होने पर कई लोग अपनी कठिन भावनाओं को समझने और उनसे सही तरीके से निपटने में संघर्ष करते हैं।
संवाद में कमी
बेहतर संवाद के बारे में बात करते हुए उन्होंने लिखा कि हमें बेहतरीन निबंध लिखना सिखाया गया, लेकिन यह नहीं सिखाया गया कि "मुझे तकलीफ हो रही है" या "नहीं" कैसे कहा जाए। उन्होंने कहा कि बड़े होने के बाद कई लोग कार्यस्थल पर होने वाले उत्पीड़न (Workplace Bullying) का सामना करने या अपनी व्यक्तिगत और पेशेवर सीमाएं (Boundaries) तय करने के लिए तैयार नहीं होते। लोगों को अपनी बात दृढ़ता से रखने और जरूरत पड़ने पर "ना" कहने का कौशल भी सिखाया जाना चाहिए।
पैसा सिर्फ गणित नहीं होता'
दिव्या मित्तल ने वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy) के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने लिखा, "हमने सालों तक गणित पढ़ी और x का मान निकाला, लेकिन यह नहीं सीखा कि कर्ज के जाल में फंसने से खुद को कैसे बचाएं।" उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था हमें भविष्य में पैसा कमाने पर तो ध्यान देना सिखाती है, लेकिन पैसा आने के बाद उसका सही तरीके से मैनेज कैसे किया जाए, यह नहीं सिखाती।
अकेलेपन के बारे में क्या कहा
अकेलेपन के बारे में बात करते हुए उन्होंने लिखा, "सच्ची शांति यह समझने में है कि अकेले होना और अकेलापन महसूस करना एक ही बात नहीं है।" मानसिक स्वास्थ्य पर उन्होंने एक और प्रभावशाली बात कही। उन्होंने लिखा, "हमारे शरीर के लिए तो जिम या खेल की कक्षाएं होती हैं, लेकिन हमारी आत्मा और मन के लिए कुछ नहीं होता।" अपने पोस्ट के अंत में मित्तल ने कहा, "सबसे बड़ी शिक्षा यह है कि दुनिया आपको क्या चाहना चाहिए, यह बताने से पहले आप खुद जान लें कि आपके लिए वास्तव में क्या महत्वपूर्ण है।"
कई यूजर्स का मिला सपोर्ट
आईएएस अफसर दिव्या मित्तल का यह पोस्ट खूब वायरल हो रहा है। साथ ही कई लोगों ने उनके इस विचार से सहमति जाताई है। एक यूजर ने लिखा, “बहुत अच्छी तरह से अपनी बात रखी है। मैं सिर्फ इतना जोड़ना चाहूंगा कि जो बातें हमारी पढ़ाई में नहीं सिखाई जातीं, वे अक्सर जीवन के अनुभवों से सीखने को मिलती हैं और वही सीख हमेशा हमारे साथ रहती है। आपकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएं।” एक अन्य यूजर ने कहा, “अंक और रैंक का जश्न मनाया जाता है, लेकिन भावनात्मक मजबूती को नजरअंदाज कर दिया जाता है।” एक तीसरे यूजर ने लिखा, “वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy) को हर स्कूल में अनिवार्य विषय बनाया जाना चाहिए।” एक यूजर ने लिखा कि यह पोस्ट बताती है कि कई सफल लोग भी अंदर से खालीपन क्यों महसूस करते हैं। एक यूजर ने कहा, “स्कूल हमें परीक्षाओं के लिए तैयार करते हैं, लेकिन जिंदगी हमसे बिल्कुल अलग सवाल पूछती है।” वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने लिखा, “मानसिक स्वास्थ्य की शिक्षा लोगों के थककर टूट जाने के बाद नहीं, बल्कि बहुत पहले से शुरू हो जानी चाहिए।”
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण:
धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।


