IIT की प्रवेश परीक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी: अब रटने से नहीं, समझ से मिलेगा दाखिला
IIT में दाखिले के लिए JEE एडवांस परीक्षा में बड़ा बदलाव हो सकता है। कोचिंग पर निर्भरता कम करने के लिए 'कंप्यूटर एडैप्टिव टेस्टिंग' (CAT) सिस्टम अपनाने पर विचार किया जा रहा है।

देश के प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IITs) में एडमिशन के लिए आयोजित होने वाली सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक JEE एडवांस के पैटर्न में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। IIT में दाखिले की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और आधुनिक बनाने के लिए परीक्षा नियामक संस्थाएं इसमें कंप्यूटर एडैप्टिव टेस्टिंग (CAT) सिस्टम लागू करने की योजना पर विचार कर रही हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य छात्रों की कोचिंग सेंटरों पर बढ़ती निर्भरता को कम करना और उनकी मेंटल एबिलिटी को चेक करना है।
क्या है कंप्यूटर एडैप्टिव टेस्टिंग (CAT) सिस्टम?
आसान शब्दों में कहें तो एडैप्टिव टेस्ट एक ऐसी कंप्यूटर आधारित परीक्षा होती है जो उम्मीदवार के उत्तर देने के पैटर्न के अनुसार खुद को ढाल लेती है।
प्रश्नों का स्तर बदलना: जब कोई छात्र किसी प्रश्न का सही उत्तर देता है, तो कंप्यूटर स्क्रीन पर आने वाला अगला प्रश्न थोड़ा अधिक कठिन होता है।
गलत उत्तर पर आसान प्रश्न: वहीं, यदि छात्र किसी प्रश्न का गलत उत्तर देता है, तो अगला प्रश्न थोड़ा आसान हो जाता है।
सटीक मूल्यांकन: इस प्रणाली के जरिए हर छात्र को अपनी क्षमता और समझ के हिसाब से प्रश्नों का एक अनूठा सेट मिलता है, जिससे रटकर या कोचिंग के पैटर्न को समझकर उत्तर देने की संभावना खत्म हो जाती है।
कोचिंग कल्चर पर नकेल कसने की पहल
फिलहाल, देश भर में लाखों छात्र JEE एडवांस की तैयारी के लिए महंगे कोचिंग इंस्टीटयूट पर निर्भर हैं। कोचिंग सेंटरों में अक्सर छात्रों को पुराने पैटर्न, शॉर्टकट ट्रिक्स और चुनिंदा प्रकार के प्रश्नों को हल करने का अभ्यास कराया जाता है। एक्सपर्ट मानते हैं कि इससे छात्रों की स्वाभाविक सोच और समस्या सुलझाने की क्षमता प्रभावित होती है। एडैप्टिव टेस्टिंग लागू होने से रटे-रटाए ढर्रे और कोचिंग के बनाए पैटर्न पर निर्भर रहने वाले छात्रों के बजाय उन छात्रों को लाभ मिलेगा जिनका बेसिक कॉन्सेप्ट पूरी तरह क्लियर हैं।
छात्रों को क्या होंगे प्रमुख फायदे?
केवल किताबों के पन्ने पलटने या ट्रिक्स याद रखने से काम नहीं चलेगा। छात्रों को विषयों को गहराई से समझना होगा। दूरदराज और ग्रामीण इलाकों के वे होनहार छात्र, जो महंगी कोचिंग की फीस नहीं भर सकते, उन्हें भी अपनी प्रतिभा साबित करने का बराबर मौका मिलेगा। एडैप्टिव सिस्टम से परीक्षा का स्तर छात्र की अपनी समझ के अनुसार तय होता है, जिससे बेवजह का मानसिक दबाव कम हो सकता है।
IIT प्रशासन और एक्सपर्ट इस बात पर गहराई से चर्चा कर रहे हैं कि इस नई प्रणाली को किस तरह से सुरक्षित रूप से लागू किया जाए। यदि यह बदलाव लागू होता है, तो यह देश की इंजीनियरिंग शिक्षा प्रणाली में एक नया और बड़ा बदलाव साबित होगा।


