
IIIT : आईआईआईटी के वैज्ञानिकों का कमाल, हवा में लिखते ही स्क्रीन पर उभर आएंगे अक्षर
ट्रिपलआईटी के वैज्ञानिकों ने एयर-राइटिंग तकनीक विकसित की है। सेंसरयुक्त कैमरे-डीप लर्निंग सॉफ्टवेयर से अंगुली की हरकत डिजिटल टेक्स्ट बनेगी। शिक्षा, बैंकिंग, स्मार्ट डिवाइस, वर्चुअल रियलिटी में काफी काम आ सकती है।
अब लिखने के लिए कागज या की-बोर्ड की जरूरत नहीं होगी। बस हवा में अपनी अंगुली या पेन से अक्षर बनाइए और वे सीधे कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखाई देंगे। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) के वैज्ञानिकों ने विकसित की है यह अद्भुत ‘एयर-राइटिंग’ तकनीक। यह मूक-बधिर, दृष्टिबाधित और शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए भी बेहद उपयोगी साबित होगी।

ट्रिपलआईटी के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के डॉ. मोहम्मद जावेद और शोध छात्र अपूर्वा चक्रवर्ती द्वारा विकसित यह तकनीक सेंसर, कंप्यूटर विजन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) युक्त डीप लर्निंग पर आधारित है। इसमें अंगुली की हलचल को पहचान कर उसे डिजिटल टेक्स्ट में बदल दिया जाता है। इससे संबंधित इनका शोध पत्र यूरोप के एक प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशित हुआ है। अब इसके पेटेंट की भी तैयारी की जा रही है।
डॉ. जावेद ने बताया कि एयर-राइटिंग तकनीक खास तौर पर मूक-बधिर, दृष्टिबाधित और शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। इसके अलावा, कोरोना जैसी महामारी के समय स्पर्श-रहित (टचलेस) तकनीक के रूप में भी यह काफी मददगार है।
इस तरह से काम करेगी एयर-राइटिंग तकनीक: एयर-राइटिंग तकनीक में व्यक्ति अपनी अंगुली या पेन से हवा में आकृति बनाता है। इस हरकत को सामने लगा सेंसरयुक्त कैमरा पहचान लेता है। वहां से यह सूचना कम्प्यूटर में फीड डीप लर्निंगयुक्त सॉफ्टवेयर तक पहुंचती है। इस सॉफ्टवेयर की मदद से अंगुली या पेन की हरकतें (खास तौर से बनाई गई आकृति की दिशा) डिजिटल टेक्स्ट के तौर पर परिवर्तित होकर कम्प्यूटर की स्क्रीन पर उभर कर आ जाती है।
कोविड की चुनौती से जन्मी नवाचार की सोच
कोरोना के दौरान की चुनौती से प्रेरित होकर डॉ. मोहम्मद जावेद के मन में ऐसी तकनीक का विचार आया, जिसमें बिना छुए काम किया जा सके। यह स्पष्ट हो गया था कि स्पर्श-आधारित उपकरण से संक्रमण हो सकता है। ऐसे में संपर्क रहित तकनीक की आवश्यकता महसूस हुई।
शिक्षा, बैकिंग में उपयोगी
डॉ. मोहम्मद जावेद ने बताया कि इस तरह की तकनीक अभी तक बहुत बेसिक स्तर पर है लेकिन उन्होंने एआईयुक्त डीप लर्निंग और सेंसर की मदद से एडवांस तकनीक विकसित की है। भविष्य में इसका उपयोग शिक्षा, बैंकिंग, स्मार्ट डिवाइस, वर्चुअल रियलिटी और सार्वजनिक सेवाओं में बड़े पैमाने पर किया जा सकेगा।
नई उम्मीद जगेगी
अपूर्वा ने बताया कि एयर-राइटिंग तकनीक लोकोमोटर विकार और आंशिक पक्षाघात से जूझ रहे लोगों के लिए नई उम्मीद बनेगी। अंगुलियों की हरकतों या सूक्ष्म इशारों से भी अब वे अपने विचार डिजिटल रूप में व्यक्त कर सकेंगे, जिससे संचार, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास को नई मजबूती मिलेगी।





